Read latest updates about "अनमोल वचन" - Page 1

  • अनमोल वचन

    हम शांति पाठ करते हैं, जिसमें पदार्थों, औषधियों, सभी दिशाओं, पृथ्वी, अन्तरिक्ष आदि समेत पूरे विश्व में शांति की कामना करते हैं, क्योंकि शांति अनमोल है, बहुमूल्य हीरा है। जो व्यक्ति बिना किसी उद्देश्य के इधर-उधर घूमकर अपना समय नष्ट करते हैं, उन्हें इस अनमोल हीरे की कभी प्राप्ति नहीं होती। यदि शान्ति...

  • अनमोल वचन

    आदमी को अपने प्रारब्ध, अपनी शक्ति, क्षमता और परिश्रम के कारण जो मिल जाता है, उसको बहुधा अपर्याप्त मानता है। थोडा और, थोडा और के चक्रव्यूह में फंसकर वह अशान्ति और असन्तोष को ही आमंत्रण देता है। सन्तोष के साधन के लिये आपके पास वर्तमान में जो कुछ है, उस पर सन्तोष करें, उसका लाभ उठायें। इसका अर्थ यह...

  • अनमोल वचन

    कई लोगों की बडी-बडी आकांक्षाएं होती हैं। वे जीवन में बडे-बडे सपने देखते हैं। कल्पना क्षेत्र में उडते हुए क्या-क्या बन जाते हैं। कई महापुरूषों की जीवनी पढकर उनके बारे में सुनकर वैसा ही बन जाना चाहते हैं। ये सब ठीक है, आदमी को महत्वाकांक्षी होना भी चाहिए, ऊंचे स्थान पर पहुंचने के सपने भी देखने चाहिए,...

  • अनमोल वचन

    आदमी का मन चंचल होता है और दुर्बल भी। बहुधा बाह्य और आन्तरिक मन में एक रूपता भी नहीं होती। आन्तरिक मन नैतिक मूल्यों पर कायम रहने की प्रेरणा देता है, परन्तु बाह्य मन उससे एकरूपता पैदा नहीं कर पाता। मन की शान्ति के लिये इस प्रकार की दुविधा को मिटाकर इनमें सामंजस्य पैदा करना अति आवश्यक है अर्थात जैसा...

  • अनमोल वचन

    जीवन में असंतोष और अशांति क्यों पैदा होते हैं? इसका कोई उत्तर नहीं दिया जा सकता। मानव जीवन में दृश्य-अदृश्य अनेक कारण हैं, जो अशान्ति और असन्तोष पैदा कर देते हैं, फिर भी मनुष्य की दुविधा मय स्थिति, यथार्थ से आंखें मूंदकर कल्पना लोक में विचरण करना, जीवन जीने का अस्वाभाविक मार्ग अपनाकर अपने आपके...

  • अनमोल वचन

    संसार में जितने भी जलचर, नमचर और मूचर हैं, सब अपने भोजन और प्रजनन क्रियाओं में ही व्यस्त रहते हैं। समस्त प्राणियों में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है। इसके बावजूद अधिकांश मनुष्य इसी प्रकार का जीवन यापन करते दिखाई देते हैं, फिर मनुष्य और पशु में अन्तर ही क्या रह जाता है। ये पशु प्रवृत्तियां केवल...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य जीवन के क्रियाकलाप बडे विचित्र हैं। मनुष्य मन से जो चिंतन करता है, उसे वाणी से कहता है, जो वाणी से कहता है, उसे शरीर से करता है और शरीर द्वारा किये गये कर्मों के फल प्राप्त करता है। यदि मनुष्य अच्छे फलों की कामना करता है तो अपनी वाणी से अच्छे शब्दों का उच्चारण करे। यदि वह चाहता है कि अपनी...

  • अनमोल वचन

    इस सृष्टि के कण-कण का विधान परमात्मा के हाथ में है। उसे चाहे अटल नियम कहें, काल कहें, विधाता या परमेश्वर कहें, बात एक ही है। उसे मानना अवश्य पडता है। इससे बुद्धि को एक स्थिति प्राप्त होती है। उसे माने बिना बुद्धि सदैव भ्रमित रहती है, किन्तु मनुष्य का अपना भी अपने भाग्य विधान से कुछ सम्बन्ध अवश्य...

  • अनमोल वचन

    परमात्मा के दर्शन अन्त:करण की शुद्धि से होते हैं। अन्त:करण की शुद्धि देव पूजा से होती है। देव पूजा का तात्पर्य माता-पिता, गुरूजनों, अतिथि तथा पति-पत्नी की सेवा तथा आदर सत्कार करना, परन्तु ये सब सेवाएं काम रहित हों। कामनाओं से की गई सेवा, अन्त:करण को शुद्ध करने में समर्थ नहीं होती। माता की सेवा से...

  • अनमोल वचन

    चलती चक्की में कीली के निकट जो दाने लगे रह जाते हैं, वे साबुत बचे रहते हैं, परन्तु जो कीली से इधर-उधर होते हैं या हो जाते हैं, वे पिस जाते हैं। ऐसे ही संसार रूपी चक्की के पाटों के मध्य परमात्मा रूपी कीली के निकट रहता है, उससे अपने को जोडे रखता है, वह बच जाता है। स्वयं को प्रकाशित करने के लिये प्रभु...

  • अनमोल वचन

    हम सभी समाज की एक इकाई हैं। हम सभी से मिलकर समाज बनता है। इसलिए हमारा समाज से सामंजस्य बने रहना बहुत जरूरी है, अन्यथा हम समाज में रहते हुए भी उससे अलग-थलग पड जायेंगे। सभी के दुख और खुशी के समय आपकी उपस्थिति बहुत जरूरी है। आप किसी के दुख-सुख में नहीं जायेंगे तो आपके दुख-सुख में कौन आपके यहां आना...

  • अनमोल वचन

    दिन-रात मिलाकर एक दिन में 24 घंटे होते हैं। सबको पता है कि इतना समय एक दिन में सभी को प्राप्त होता है, परन्तु इन 24 घंटों की समय सारिणी आप कैसे बनाते हैं, किस प्रकार से समय प्रबन्धन करते हैं, यह आप पर निर्भर करता है। कुछ लोग सारा दिन व्यस्त रहते हैं, कहते हैं कि आराम का समय नहीं मिलता, किन्तु...

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