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  • अनमोल वचन

    कल होली है। यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस समय तक शीत का प्रकोप क्रमश: कम होता जाता है। मौसम सुहावना होकर प्रकृति में चारों ओर उल्लास छाया रहता है। नई फसल पकने लगती है। भारतीय संस्कृति यज्ञ प्रधान है। वस्तुत: होलिका दहन एक सामुहिक यज्ञ है, जिसमें खेतों में पकने वाला अन्न, जिसे...

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    सतोगुणी व्यक्ति को श्रेष्ठ और सम्माननीय माना जाता है। सत्व गुण निर्मल होने के कारण प्रकाश करने वाला और विकार रहित है। इससे ज्ञान उत्पन्न होता है। इसका फल सुख, ज्ञान और वैराग्य कहा गया है। सत्वगुण में व्यक्ति स्वर्गादि उच्च लोकों को प्राप्त करता है, परन्तु यह ज्ञान से सम्बन्धित होने के कारण अभिमान...

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    रजोगुण क्रियाशील का प्रतीक है। इसके बढने का लोभ, अति महत्वाकांक्षा, विषय भोगों की घोर लालसा, स्वार्थ बुद्धि प्रकट होती है। कुछ अधिक पाने की लालसा में अतिकर्म करने लगता है। इसके करने में पाने की तीव्र इच्छा समाई रहती है। वह करता ही है कुछ पाने के लिये। जितना अधिक करता है, उससे अधिक पाने का सपना...

  • अनमोल वचन

    तमोगुणी व्यक्ति निकृष्ट माना जाता है। तमोगुण के बढने पर अन्त:करण और इन्द्रियों में जडता आ जाती है, कार्य करने की इच्छा समाप्त हो जाती है, विचारों में नकारात्मकता आ जाती है। शरीर आलस्य का घर बन जाता है, निंद्रा उसकी सहचरी बन जाती है। व्यक्ति यों ही निश्चेष्ट, निष्क्रिय और मुर्दे के समान पडा रहता है,...

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    'प्रत्येक जीव ईश्वर का अंश है। जो गुण ईश्वर में हैं, वे गुण जीव में भी मौजूद हैं।' इस सत्य को गुरू गंगा तट पर बैठे समझा रहे थे, तभी उपस्थित शिष्यों में से एक जिज्ञासु शिष्य ने प्रश्न किया कि 'भगवन ईश्वर को सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान है, पर जीव तो अल्पबुद्धि और अल्प सामथ्र्य वाला है, फिर इस भिन्नता के...

  • अनमोल वचन

    यदि मनुष्य अपने कार्य को व्यवस्थित तरीके से कार्य की महत्ता के अनुसार क्रमवार निबटाते रहे तो कार्य का बोझ अधिक प्रतीत नहीं होगा। आपको अपनी टालमटोल वाली आदत को बदलना चाहिए। यह मानसिक दुर्बलता है, इसे बदलिये अपने मन में उत्साह जगाकर दृढता से काम में जुट जाईये और पूरी शक्ति लगाकर टाले हुए कार्य को...

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    जिस व्यक्ति को काम को कल पर टालने का रोग लग जाता है, वह अपने जीवन में अनेक काम नहीं कर पाता, बल्कि उसके सब कार्य अधूरे पडे रह जाते हैं। यद्यपि ऐसे लोग हर समय व्यस्त रहते दिखाई पडते हैं, फिर भी अपना काम पूरा नहीं कर पाते। कामों का बोझ उनके सिर पर लदा रहता है और वें उससे डरते हुए कामों को धकेलने की...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य की एक बुरी आदत है काम को टाल देने की। अपनी इसी आदत के कारण हम कभी-कभी अपने बनते हुए कामों को बिगाड लेते हैं, जिससे हमारी बडी हानि हो जाती है और कभी-कभी तो अपनी मंजिल पर पहुंचते-पहुंचते रह जाते हैं। जो काम हमें आज करने हैं, वह कल भी इतने ही महत्व के रहेंगे, यह नहीं कहा जा सकता। परिस्थितियां...

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    स्वार्थ और परमार्थ में थोडा सा अन्तर है। स्वार्थ उसे कहते हैं जो शरीर को तो सुविधा देता है, परन्तु आत्मा की उपेक्षा करता है। चूंकि हम आत्मा ही हैं, शरीर तो हमारा वाहन या उपकरण मात्र है, इसलिए वाहन या उपकरण को लाभ पहुंचे, किन्तु स्वामी दुख पाये तो ऐसा कार्य मूर्खतापूर्ण कहा जायेगा। इसके विपरीत...

  • अनमोल वचन

    बहुधा हम अपनी कमियों के बारे में नहीं जानते, जबकि अपने चरित्र और व्यवहार की कमियों को आत्मविश्लेषण द्वारा जाना जा सकता है। यदि ऐसा करने की सामथ्र्य नहीं है तो दूसरों से जानें कि वें हमारे बारे में क्या कहते हैं, क्या सोचते हैं। हमारी वें बातें दूसरे ही हमें बता सकते हैं, जिनसे हम स्वयं बेखबर होते...

  • अनमोल वचन

    वर्तमान युग व्यवहार प्रधान होने से धार्मिक, सामाजिक, पारिवारिक और राजनैतिक प्रत्येक स्तर पर व्यवहार की प्रधानता है। आप व्यवहार में जैसे होंगे, वैसा ही फल पायेंगे। मधुर व्यवहार आपको सम्मानित और सबका प्रिय बना देता है। कठोर, रूखा और अमान्य व्यवहार आपके सम्मान को कम करते हुए अप्रिय बना देता है। जितनी...

  • अनमोल वचन

    शुद्ध और पवित्र विचार ही जीवन की सुगन्ध हैं। विचार मूल हैं और आचार विचार का ही प्रतिफल हैं। विचार जैसा होगा, वैसा ही हमारा जीवन हो जायेगा। सीधे ही हम आचार को नहीं संवार करते, क्योंकि मूल आचार नहीं है, मूल विचार है। मूल को भूल गये और फल को संवारते रहे तो हमारा श्रम सफल नहीं हो पायेगा। सम्भव है कि हम...

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