
जीवन में असंतोष और अशांति क्यों पैदा होते हैं? इसका कोई उत्तर नहीं दिया जा सकता। मानव जीवन में दृश्य-अदृश्य अनेक कारण हैं, जो अशान्ति और असन्तोष पैदा...
जीवन में असंतोष और अशांति क्यों पैदा होते हैं? इसका कोई उत्तर नहीं दिया जा सकता। मानव जीवन में दृश्य-अदृश्य अनेक कारण हैं, जो अशान्ति और असन्तोष पैदा कर देते हैं, फिर भी मनुष्य की दुविधा मय स्थिति, यथार्थ से आंखें मूंदकर कल्पना लोक में विचरण करना, जीवन जीने का अस्वाभाविक मार्ग अपनाकर अपने आपके प्रति अनजान रहना, असन्तुलित मन, निरूद्देश्य जीवन ऐसे मुख्य कारण हैं, जिनसे मनुष्य जीवन अशांत और असन्तुष्ट रहता है। अशांति, असंतोष मनुष्य के जीवन में तब पैदा हो जाता है, जब उसके आन्तरिक और बाह्य मन में एकता समता नहीं होती, अन्तर्मन कुछ और चाहे और बाह्य मन कुछ और करे, ऐसे में लोग असन्तुष्ट और अशांत रहेंगे। उनका दुविधापूर्ण स्थिति में पडे रहना स्वाभाविक है। कई लोग अन्तर्मन से बडे आदर्शवादी होते हैं, परन्तु बाह्य मन की प्रेरणा से अपने आदर्श के प्रतिकूल कार्य कर बैठते हैं। कई बार मनुष्य की नैतिक बुद्धि तो प्रबल होती है, परन्तु असंस्कृत मन पूर्व के संस्कारों के कारण अनैतिक कार्य को प्रेरणा देकर मनुष्य को उधर ही प्रवृत्त कर देता है और यही द्वंदात्मक स्थिति उसकी अशान्ति का कारण बन जाती है।

