Read latest updates about "कविता" - Page 1

  • कविता: दुमुंहे नेता

    दुमुंहे सांप ही नहीं इंसान भी होते हैं।, बल्कि सांपों से अधिक इंसान ही होते हैं ऐसे इंसान विषधरों से कहीं अधिक खतरनाक भी होते हैं! मुंह पर ठकुरसुहाती पीठ पीछे बुराई करते हैं ऐसा दोगलापन करते जरा भी नहीं ठिठकते हैं ऐसे दुमुंहे हर जगह हर समय हर समूह में मिल जाते हैं अपनी इस कमीनी हरकत को...

  • कविता पानी

    बरखा-रानी, बरखा-रानी।देखो बरसा कितना पानी।। बादल भैय्या उमड़-घुमड़कर, बरस गये हैं खूब। जिधर देखिये कीचड़-कीचड़, नहीं खिली है धूप।। धरती हो गई धानी। देखो बरसा कितना पानी।।1।। जल से देखो भर गये, सारे ताल तलैया।। नदी-नहरें-नाले सारे, भूखी-सूखी गैया।। भीगे राजा-रानी। देखो बरसा कितना...

  • बाल कविता: बचपन की गुल्लक

    छोटे छोटे सिक्के जोड़े लम्हों के, कुछ यादों के बचपन की गुल्लक में जोड़े किस्से कच्चे वादों के स्कूल की घंटी मास्टर की सँटी पुकम पुकाई दूध मलाई दोस्त की पेंसिल टूटी साइकिल घिसे पिटे से झूठ बहाने पिटठू, पाली, आँख मिचोली चूरन, चटनी, खट्टी गोली सुनी-सुनाई भूत कहानी लाड़ लुटाती...

  • कविता: एक कप कॉफी

    आईये पियेंगे एक कप कॉफी कभी भी जब कोई ऑफर करे कॉफी कर देना हां और रख लेना उसका मान क्योंकि सिर्फ कॉफी पिलाना ही मकसद नहीं उसका वो बैठना चाहता है तुम्हारे साथ बिताना चाहता है प्यार के दो पल तुमसे बाते करते हुए कुछ अपनी कहते हुए कुछ तुम्हारी सुनते हुए वो खोलना चाहता है दिल की कोई गिरह...

  • कविताः सहनशीलता

    घर परिवार बगीचा जानो हम हैं बागवान यह मानो माना खरपतवार बहुत है पिफर भी पफूल खिलाना जानो पफूल संग शूलों के रहते उनसे सहनशीलता जानो टेढ़ी मेढ़ी पगडंडी पर कैसे पड़े संभलना जानो टूटे फूल फेक मत देना उनका हार बनाना जानो तूफां भी आया करते हैं उसकी चाल बदलना जानो वो भी क्यारी भर देता है जिसको...

  • गणपति प्रतिमाएं

    समय के साथ पुराने रीति रिवाज परम्पराएं बदलती जाती हैं। नई पीढ़ी नए विचारों से नई नई रस्में रीत रिवाज चलाती है। कुछ परिस्थितियों वश होता है कुछ हालात की मजबूरी होती है. न जाने कब से गणेश प्रतिमाएं पुराने ढंग से बनती चली आई हैं विसर्जन के उपरांत जलाशयों में उनकी दुर्दशा हमेशा देखने में आई है...

  • चिट्ठियां

    चिट्ठियां-चिट्ठियां प्यारी सी चिट्ठियां! प्रीत के रंग में ये रंगी चिट्ठियां.... रखती दिल छुपा के ये राज कई! प्रेम की चाशनी में पगी चिट्ठियां।। पोस्ट कार्ड बनकर जब आती हैं ये... भेद सबको, सभी का बताती हैं ये! बंद लिफाफे में आये मुस्कुराती हुई! तीन अक्षरों से ये सजी चिट्ठियां।। लाती मायके की...

  • कविताः मुस्कुराहट

    मुस्कुराहट पे तेरी, वारि-वारि जाऊं मैं ओ मेरे लाल हर बुरी नजर से बचाऊं मैं।। तुझे सिन्चू संस्कार के खाद-पानी से मेरे काजल से टीका काला लगाऊं मैं।। तू बनेगा प्रहरी एक दिन देश का अपने मां भारती के चरणों में आ झुकाऊं मैं।। कभी झुकने न देना तू तिरंगे को सुन आ तुझे देश भक्ति का पाठ पढ़ाऊं...

  • 06 अक्टूबर-भारतीय एवं विश्व इतिहास में 06 अक्टूबर की प्रमुख घटनाएं

    नयी दिल्ली। भारतीय एवं विश्व इतिहास में 06 अक्टूबर की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं- 1499- फ्रांस के राजा लुईस ने मिलान पर कब्जा किया। 1723- अमेरिका के संस्थापक बेंजामिन फ्रेंकलिन 17 साल की उम्र में फिलाडेल्फिया पहुंचे। 1762- ब्रिटिश सैनिकों ने फिलीपींस के मनीला पर कब्जा किया। 1858- क्रांतिकारी...

  • क्रांतिकारी संत

    गुरुदेवश्री! आपने तो बहुत बडी क्रांति की है फिर एक बार, शायद आज तक की सबसे बडी क्रांति।। जन्म के वक्त भी क्रांति की थी आपने, मां समेत बिना किसी को पता चले ही इस दुनिया में पदार्पण किया था आपने। जन्म से लेकर आखिरी सांस तक कितनी क्रांतिया की हैं आपने, यह शायद आप भी नहीं जानते गुरुवर! ...

  • गजल

    मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था खाहिश-ए-खलीक इजहार करना चाहा था धुएं सी उड़ा दी आरजू पल में यार ने मेरे तेरा इस्तिकबाल शानदार करना चाहा था भले लोगों की बातें समझ न आईं वक्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तेरे काम आ सकूं इरादा था बस इतना सा तअल्लुक आपसे आबदार करना...

  • कविता: राखी का अटूट रिश्ता

    भाई और बहन हो जाओ तैयार, लो आ गया राखी का त्यौहार। ठंडी बारिश की बूँदे, सावन की सौंधी महक। भाई के आने की उम्मीद बहना को लगी है कसक। राखी और मिठाई से सजा होगा पूजन थाल, अक्षत रोली सोहेगा प्यारे भाई के भाल। अटूट रेशमी धागे से कलाई पे चमक आ जाएगी, भाई को कभी न भूलने का वचन अमर कर जाएगी। छोटे...

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