छोटे छोटे सिक्के जोड़े लम्हों के, कुछ यादों के बचपन की गुल्लक में जोड़े किस्से कच्चे वादों के स्कूल की घंटी मास्टर की सँटी पुकम पुकाई ...
छोटे छोटे सिक्के जोड़े
लम्हों के, कुछ यादों के
बचपन की गुल्लक में जोड़े
किस्से कच्चे वादों के
स्कूल की घंटी
मास्टर की सँटी
पुकम पुकाई
दूध मलाई
दोस्त की पेंसिल
टूटी साइकिल
घिसे पिटे से झूठ बहाने
पिटठू, पाली, आँख मिचोली
चूरन, चटनी, खट्टी गोली
सुनी-सुनाई भूत कहानी
लाड़ लुटाती दादी नानी
कन्नी, माँझे, छज्जे, आँगन
कीचड़ सने हुए वो सावन
गरमाई सर्दी की धूपें
चंचल गरमी की वो शामें
इंक की बोतल
गली का पीपल
कंपस कुतरी स्कूल की टेबल
पेंसिल की छिल्तर के छल्ले
साबुन-पानी के बुलबुले
जागीरी अल्हड़ सालों की
यही बची है मेरे पल्ले
दिल की अल्मारी के अंदर
सालों इनको है संजोया
हाथ से कितने ख्वाब हैं छूटे
लेकिन इनको न मैं खोया
आज कहीं से ढूँढ ही लाया
एक पुराना सिक्का खोया
जाके अब इस सिक्के को भी
गुल्लक ही में मैं भर दूँगा
जीकर अपने बचपन का पल
गुल्लक फिर से बंद कर दूँगा
- शिवांगी शर्मा
रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

