मुस्कुराहट पे तेरी, वारि-वारि जाऊं मैं ओ मेरे लाल हर बुरी नजर से बचाऊं मैं।। तुझे सिन्चू संस्कार के खाद-पानी से मेरे काजल से टीका काला लगाऊं...
मुस्कुराहट पे तेरी, वारि-वारि जाऊं मैं
ओ मेरे लाल हर बुरी नजर से बचाऊं मैं।।
तुझे सिन्चू संस्कार के खाद-पानी से
मेरे काजल से टीका काला लगाऊं मैं।।
तू बनेगा प्रहरी एक दिन देश का अपने
मां भारती के चरणों में आ झुकाऊं मैं।।
कभी झुकने न देना तू तिरंगे को सुन
आ तुझे देश भक्ति का पाठ पढ़ाऊं मैं।।
माता-पिता की तू तारा है आंखों का प्यारा
आ तुझे हर बला से मेरे लाल बचाऊं मैं।।
होके बड़ा तू सबका करेगा सम्मान
ऐसी पाठशाला में बेटे तुझे पढ़ाऊं मैं।।
दूर दुनिया के हर रंज-ओ-गम रहे तुझसे
सीख मेहनत की तुझको दे जाऊं मैं।।
मां की ममता कभी कमजोर न करे तुझको
सुदृढ़ चट्टान से भी ज्यादा बनाऊं मैं।।
कोई उंगली कभी न उठने पाये तुझ पर
सीख ऐसी जीवन में तुझको दे जाऊं मैं।।
मां के जैसा न होगा गुरु कोई जग में
राम-कृष्ण सा आदर्श तुझको सिखाऊं मैं।।
- सविता वर्मा

