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  • जानकारी: क्या आप जानते हैं?

    लाजवंती का पौधा स्पर्श के साथ ही क्यों मुरझा जाता है? लाजवंती के पौधे के डंठल में पत्तियों के जोड़ों के नीचे छोटे-छोटे दाने होते हैं जिनमें अनेक पतली कोशिकाएं होती हैं। पौधे द्वारा जल ग्रहण किए जाने के कारण ये दाने जल से भर जाते हैं। जब लाजवंती के पौधे को स्पर्श किया जाता है तो इनका जल बहकर डंठल...

  • बाल कथा: प्यासा गांव

    रामनिधि बंगाल के प्रख्यात पंडित थे। आसपास के जिलों में उनके बहुत से शिष्य थे। एक दिन रामनिधि अपने एक शिष्य के घर गए। लौटते-लौटते दोपहर ढलने लगी। वह जंगल के पास ही एक सुनसान मैदान के रास्ते से आ रहे थे। शिष्य द्वारा दी हुई चीजों से भरी पोटली ले, एक आदमी उनके साथ चल रहा था। पांच-सात लुटेरों ने...

  • बाल कथा: फैली जग में रोशनी

    बात उन दिनों की है, जब पृथ्वी का निर्माण हुए ज्यादा समय नहीं बीता था। तब न तो सूर्य का प्रकाश ही इतना तेज था और न चांद-तारे ही प्रकाश देते थे। धरती के सारे प्राणी बहुत दुखी थे और अंधेरे तथा ठंड से तंग आ चुके थे। उस समय पृथ्वी पर एक कौआ भी रहता था। वह अंधेरे के कारण बहुत दुखी रहता था और कहीं भी...

  • बाल कथा: किशन की चतुराई

    चंबल नदी के किनारे एक गांव था। गांव में किशन नाम का एक किसान रहता था। वह बड़ा मेहनती, ईमानदार और होशियार था। वह हमेशा दूसरों की मदद करता था। इसी कारण गांव वाले किशन को बहुत चाहते थे। नदी के आसपास के इलाके में डाकुओं का डेरा था। वे आए दिन गांव वालों को लूट लेते थे। पुलिस भी इनको पकडऩे में नाकामयाब...

  • बाल कहानी: छिपकली और हाथी

    एक जंगल में बरगद का विशाल पेड़ था। उस की शाखाएं दूर-दूर तक फैली हुई थी। बरगद पर सैंकड़ों पक्षी और छोटे-मोटे जंतु रहते थे। बरगद के पेड़ की छोटी-छोटी दरारों में छिपकलियों का भी एक परिवार रहता था। उस परिवार में सभी सदस्य बड़े झगड़ालू थे। उन के शोरगुल से वहां की शांति भंग हो जाती। यहां तक कि रात को...

  • बाल कथा: लालची बंदर

    एक गांव था। उसमें अनेक बंदर निवास करते थे। कई बार बंदर घरों में चले जाते तो बच्चे व बड़े सभी के मनों में भय-सा व्याप्त हो जाता। लोग अक्सर अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतराते थे। गांव से बन्दरों को भोजन नहीं मिल पाता था। गांव के बाहर की तरफ रेल की पटरी थी। सभी बंदर अधिकांश समय वहीं व्यतीत...

  • बाल कहानी: पंडितजी का अधूरा ज्ञान

    एक विद्वान-सा दिखने वाला यात्री गंगा तट पर आया। कंधे पर झोला लटका था। उसमें रेशमी कपड़े में बंधी कुछ पुस्तकें थीं। माथे पर चंदन का गहरा लेप लगा था। गले में रेशमी दुपट्टा लटक रहा था। यात्री गंगा तट पर इधर-उधर घूमने लगा। बार-बार दूसरे तट की ओर देख रहा था। शायद उसे गंगा पार जाना था। तभी एक नाव तट पर...

  • बाल कथा: मां की समझदारी

    एक जंगल में कंगारुओं के बहुत से परिवार साथ साथ रहते थे। इन परिवारों में काफी प्रेम प्यार था। कंगारु परिवारों में दो कंगारु बच्चे फीता और हसीता काफी अच्छे मित्र थे। उनकी सेहत और कद के कारण सभी बच्चे इन्हें जंगल के 'जायंटस' के नाम से बुलाते थे। पेड़ों पर चढऩा-उतरना, एक दूसरे की नकल करना और अपना पेट...

  • बाल कहानी: टीनएज-एक नाजुक अवस्था

    टीनएज एक ऐसा दौर होता है जो टीनएजर्स के लिए भी कठिन होता है और अभिभावकों के लिए भी। बच्चे समझदार हो रहे होते हैं और अपने निर्णय खुद लेना चाह रहे होते हैं। उधर अभिभावक बच्चों को बड़ा होते तो देख रहे होते हैं पर उन्हें बच्चा ही मान खुद निर्णय लेते हैं। इस अवस्था में बच्चों में बहुत से शारीरिक व...

  • रहस्य रोमांच: ये विचित्र जीव-जन्तु

    भारतीय चिन्तकों के मतानुसार इस मृत्युलोक (धरती) में 84 लाख किस्म के प्राणी हैं और हर प्राणी की अपनी शक्ल-सूरत और विशेषताएं हैं। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार प्राणियों की यह संख्या और ज्यादा हो सकती है। आइए, कुछ विचित्र जीवों के बारे में हम आपको जानकारी दिलाते हैं। - प. कोलंबिया में 'स्मिथिल्स' नाम...

  • बाल कथा: दोस्ती की पहचान

    मुनमुन हिरण का बच्चा था। वह अपने माता-पिता के साथ जंगल में रहता था। थोड़ा बड़ा होने पर वह अकेला ही जंगल में घूमने लगा। एक दिन जब मुनमुन घूम घाम कर वापस आया तो उसके पिता ने उससे कहा, 'बेटा मुनमुन, अब तुम बड़े हो गए हो, अकेले घूम-फिर सकते हो पर बेटा, जंगल में बहुत से खतरे हैं। कई जानवर खतरनाक होते...

  • बाल कहानी: दुष्ट मेंढक

    नदी में एक मेंढक रहता था। उसी नदी के किनारे एक पेड़ पर एक तोता भी रहता था। मेंढक तथा तोता अच्छे दोस्त थे। कभी मेंढक नदी से बाहर आकर नदी के किस्से सुनाता तो कभी तोता बाहर की खबरें मेंढक को सुनाता। एक दिन मेंढक तथा तोते ने खुद खेती करने की सोची। तोते ने सरकंडे का हल बनाया। उसमें दो चूहों को बैलों...

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