Read latest updates about "कहानी" - Page 1

  • बाल कहानी: जिन्न और कुत्ते की पूंछ

    जेरी खरगोश प्रकृति वन में रहता था। एक दिन वह नदी किनारे टहल रहा था। तब वह एक ही बात सोच रहा था, 'मुझे कोई ऐसा आज्ञाकारी सेवक मिल जाए जो मेरे सभी कामों को चुटकी बजाते कर दे।' चलते-चलते जेरी अचानक गड्ढे में आ गिरा। गड्ढे से बाहर आने के लिए उसने हाथ-पैर चलाए। तभी उसके हाथ में कोई चीज घुसी। उसने जानना...

  • बोध कथा: ऐसा हो पश्चाताप

    पश्चाताप भी कई तरह के होते हैं। उनमें से एक पश्चाताप स्वामी विवेकानंद जी ने ऐसे किया। जब स्वामी विवेकानंद जी ने संन्यास लिया तो वो भिन्न भिन्न स्थानों पर अधिकतर पैदल जाया करते थे। ऐसे ही एक बार पैदल यात्र कर रहे थे कि रास्ते में एक आदमी को कुंए से पानी निकालते देखा और दूसरे आदमी को जल पीते देखा।...

  • बाल कथा: तालाब रूठ गया

    एक पेड़ में एक गिलहरी का परिवार रहता था। उनकी एक बच्ची थी, नाम था नीनी। कुछ ही दूरी पर एक बिल में चूहा परिवार रहता था। उनके दो बच्चे थे, चिर और कुट। तीनों बच्चे शाम को साथ-साथ खेलते थे। पिछले दिन शाम को कई घंटे काफी तेज बारिश हुई थी जिससे मौसम कुछ ठंडा हो गया था। चिर और कुट दोपहर को सोकर शाम को उठे...

  • जानकारी: सीमेंट कैसे बनता है

    आज सीमेंट के बिना ऊंची-ऊंची अट्टालिकाओं, लम्बे-लम्बे पुलों, विशाल फैक्ट्रियों आदि की कल्पना क्या संभव है? शायद नहीं। इस आधुनिक युग में सीमेंट एक महत्त्वपूर्ण वस्तु बन गया है जिसके बिना विश्व में विकास संभव ही नहीं है। क्या आपने कभी सोचा है कि सीमेंट कैसे बनता है? आइये, हम आपको बतलाते हैं। ईसा से...

  • तीन मूर्ख भाई

    बात बहुत पुरानी है। किसी गांव में एक किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे। तीनों मूर्ख, निकम्मे और आलसी। किसान उनके बारे में सदा चिंतित रहता था। एक दिन गांव में एक महात्मा जी पधारे। किसान ने तीनों बेटों को महात्मा जी की सेवा में लगा दिया। तीनों ने खूब मन लगाकर महात्मा जी की सेवा की। महात्मा जी पहुंचे...

  • बाल कथा: दिखावे का फल

    एक बार एक गरीब औरत ने बहुत मेहनत करके कुछ रूपये इकटठे किये और उनसे एक सोने की अंगूठी बनवाई। अंगूठी को पहनकर वह गांव भर में घूम आई पर किसी ने भी उसके बारे में यह नहीं पूछा कि तुमने यह अंगूठी कब बनवा ली? कितने रूपये की है? वह लोगों के इस व्यवहार से जल उठी। एक दिन उसने अपने मकान में आग लगा दी और वह...

  • बोध कथा: संपत्ति का घमंड

    लाहौर में एक सेठ रहता था। नाम था उसका दुनीचंद। वह काफी अमीर था। उसे इस बात का घमंड था कि मेरे पास अकूत धन-संपत्ति है। उसने अपने धन-संपत्ति की प्रदर्शनी के लिए अपने घर के ऊपर अनेक झंडे लगा रखे थे। ये इस बात के प्रतीक थे कि सेठ दुनीचंद के खजाने में उतने करोड़ रूपये जमा हैं। लेकिन सेठ दुनीचंद इन...

  • बाल कथा: मेंढक अंकल की तरकीब

    मोटा मेंढक तालाब के किनारे एक चट्टान के नीचे सो रहा था। अचानक एक चीख से उसकी नींद खुल गई। पलटकर देखा तो सहम गया। दृश्य बड़ा भयानक था। एक बहुत बड़ा सांप एक मेंढक को निगलने की कोशिश कर रहा था और मेंढक उसके चंगुल से निकलने के लिए जोर-जोर से चिल्ला रहा था। देखते ही देखते सांप ने मेंढक को निगल लिया।...

  • बाल कथा: चबाने की आदत

    श्रेयांश अपनी मम्मी के साथ उछलता-कूदता स्कूल जा रहा था। रास्ते में उसका मित्र वासु मिल गया। 'कैसे हो श्रेयांश? तुम्हें याद है, आज दीपांशु का जन्मदिन है?Ó वासु ने श्रेयांश को याद दिलाया। 'हां, याद है। श्रेयांश ने खुश हो कर कहा। उसे पार्टियां अच्छी लगती थीं। दीपांशु की मम्मी तो बेटे के जन्मदिन पर...

  • बाल कथा: आतुर स्वभाव

    बहुत समय पहले विजय नगर में सोमनाथ नाम का एक युवा गडरिया था। वह बुद्धिमान, दूरदर्शी और निष्कपट व्यक्ति था। उसने किसी विद्यालय में शिक्षा नहीं पाई थी लेकिन लिखना पढऩा उसे अच्छी तरह आता था। उसकी बुद्धिमत्ता को देखकर अच्छे-अच्छे दांतों तले अंगुली दबाते थे। सोमनाथ अपने गड़रिया समाज की पंचायत का मुखिया...

  • बाल कथा: तरकीब

    चंपक वन का वाइटी खरगोश बहुत होशियार और तेज दिमाग का था, लेकिन कभी कोई उसके तेज दिमाग की तारीफ नहीं रकता था। एक बार की बात है। चंपकवन के कुछ जानवरों के उनके बैंक अकाउंट से पैसे गायब हो गए थे। किसी किसी का तो पूरा अकाउंट ही निल हो गया था। बैंक मैनेजर टोनी भालू को लगातार इस बात की शिकायत मिल रही थी...

  • बाल कहानी: अनपढ़ रैबी

    भैपी खरगोश का बच्चा रैबी स्कूल जाने से जी चुराता था। वह रोज देर तक सोता और अपने से कम उमर के बच्चों के बीच जा कर खेलता। एक दिन उसे हिरन के बच्चे ने पूछा, 'रैबी, तुम स्कूल क्यों नहीं जाते?' 'पढऩे की क्या जरूरत है। मैं तो खेलूंगा,' रैबी बोला। एक दिन रैबी अपने घर पर अकेला बैठा था। उसके मम्मी पापा...

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