Read latest updates about "धर्म -अध्यात्म" - Page 1

  • अपनी राशि से रखेंगे अपने व्यापार का नाम तो चलेगा जरूर

    सुचारु रुप से जीवन चलाने के लिए व्यक्ति को कर्म की भूमि पर मेहनत का बीज रोपित करना ही होता है। कर्म करने के उद्देश्य से ही मनुष्यमात्र का जन्म होता है। यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति बिना कर्म किए नहीं रह सकता है। कर्म के बिना जीवन उद्देश्यहीन हो जाएगा। कर्म का सिद्धांत केवल मनुष्य पर ही लागू...

  • गजकेसरी योग में मनायी जा रही शरद पूर्णिमा, रात में बरेसगा अमृत

    भोपाल। मध्यप्रदेश में आश्विन मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से शुभ संयोग में मनाया जा रहा है। सुबह से ही लोग अपने मंदिरों में पूजन-अर्चन कर अपने गुरुओं से भेंट कर उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। इस यह पर्व गजकेसरी योग में मनाया जा रहा है। मान्यता है कि...

  • पर्यटन: तिरूपति में बालाजी

    दक्षिण भारत का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तिरूपति अब पूरे भारत में लोकप्रिय है। यहां श्री वेंकटेश्वर स्वामीजी का भव्य मंदिर है। तिरूपति नगर में स्थित यह मंदिर बालाजी के नाम से मशहूर है। आंध्रप्रदेश में यह शहर राजधानी हैदराबाद से करीब सात सौ किलोमीटर दूर है। रेल या सड़क मार्ग से तिरूपति पहुंचने के...

  • अचानक से किस्मत खुलने के योग कौन से है - क्या कहता है ज्योतिष विद्या

    वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को भाग्य का कारक ग्रह माना गया है और नवम भाव भाग्य का भाव है। भाग्य को प्रबल करने में कुंडली के त्रिकोण भाव जिन्हें लग्न, पंचम और नवम के नाम से जाना जाता है। इन तीनों भावों के मध्य 120 अंश का अंतर होता है। इन तीनों त्रिकोणों का संबंध भाग्य को मजबूत करता है। तथा...

  • जानिए कब है शरद पूर्णिमा ? कैसे रखें व्रत

    (शरद पूर्णिमा व्रत 13 अक्टूबर 2019 ) (मनोकामना सिद्धि के लिए) माहात्म्य शरद पूर्णिमा के विषय में विख्यात है, कि इस दिन कोई व्यक्ति यदि कोई अनुष्ठान करता है तो उसका अनुष्ठान अवश्य सफल होता है। तीसरे पहर इस दिन व्रत कर हाथियों की आरती करने पर उत्तम फल मिलते है। इस दिन के संदर्भ में एक मान्यता...

  • धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या दान करें..?

    धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता हैं। धनतेरस दीपावली पर्व से ठीक दो दिन पूर्व, कार्तिक मास की कॄष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन मनाया जाता हैं। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान धंवंतरी का जन्म हुआ था। भगवान धन्वंतरी को आयुर्वेद विद्या के जनक माने जाते हैं। पृथ्वी लोक पर आयुर्वेद का...

  • शिक्षा का चयन - ज्योतिष के चश्में से

    उत्तम शिक्षा ही एक सभ्य, सुसंस्कृत एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने का कार्य करती हैं। आर्थिक प्रतिस्पर्धा के इस युग में शैक्षिक क्षेत्र में उचित विषय चयन कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। कोई व्यक्ति कितनी शिक्षा प्राप्त करेगा या उसका पढाई के प्रति क्या रूझान हैं यह जन्म पत्रिका के माध्यम से...

  • आईये मिलकर ज्योतिष विद्या के वृक्ष को संरक्षण दें

    आईये मिलकर ज्योतिष विद्या के वृक्ष को संरक्षण दें आज शिक्षा के सभी क्षेत्रों में नई पीढ़ी के लाखों व्यक्ति हरेक स्तर पर देश व विदेश में पढ़ व शोध कर रहे हैं। लेकिन ज्योतिष 17वीं शताब्दी में जहां रुका था, आज भी वहीं रुका है, जबकि हमारे देश में ज्योतिष से अच्छी रिसर्च की परम्परा किसी शास्त्र के पास...

  • दशा एवं गोचर का तुलनात्मक अध्ययन

    जन्मपत्री में किसी भी घटना की जानकारी के साथ उसके घटने के समय की भी जानकारी आवश्यक होती है। इसके लिए दशा एवं गोचर की दो पद्धतियां विशेष हैं। दशा से घटना के समय एवं गोचर से उसके शुभाशुभ होने का ज्ञान प्राप्त होता है। दशा और गोचर दोनों ही ज्योतिष में जातक को मिलने वाले शुभाशुभ फल का समय और अवधि जानने...

  • सूर्य, बुध और राहु / केतु की युति - करियर सफल, वैवाहिक जीवन असफल

    सूर्य और बुध जब कुंडली में एक साथ हों तो बुधादित्य योग का निर्माण करते हैं। बुधादित्य योग सूर्य और बुध की युति से बनने वाला एक शुभ योग है। इस योग के फल बहुत ही अच्छे मिलते है। बुध बुद्धि का स्वामी है तो सूर्य प्रतिष्ठा और तेजस्विता का। जब सूर्य-बुध एक साथ हो जाते तब इन दोनों ग्रहो की शक्ति कई...

  • दिग्विजयी बने परशुराम!

    यह बात त्रेता युग के प्रारंभकाल की है। सरस्वती नदी के तट पर महर्षि जमदग्नि अपनी प्रिय पत्नी रेणुका के साथ आश्रम में सुविधापूर्वक निवास करते थे। इसी आश्रम में 'परशुराम' ने जन्म लिया था। उन दिनों विश्वविख्यात राजा सहस्त्रबाहु अपनी शक्ति को अर्जित कर...

  • वक्री ग्रहों की दशा..

    ज्योतिष शास्त्रों में कहा गया हैं कि- वक्रोपगस्य हि दशा भ्रमयति च कुलालचक्रवत्पुरुषम्। व्यसनानि रिपुविरोधं करोति पापस्य न शुभस्य। अर्थात वक्री ग्रह की दशा में नित्य देशाटन, व्यसन तथा शत्रुओं का विरोध होता है। पापग्रहों की दशा में ही पाप फल का भोग होता है किन्तु शुभ ग्रह यदि वक्री हों तो उसका...

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