बाल कथा: जो तेरे पास है उसे बेच दे

बाल कथा: जो तेरे पास है उसे बेच दे

एक मनुष्य शरीर से तो स्वस्थ और बलिष्ठ था किन्तु था कंगाल। धन के अभाव के कारण बड़ी तंगी से दिन काट रहा था। एक बार नगर में एक पहंचे हुए महात्मा पधारे। लोग उनके आशीर्वाद से अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए उनकी शरण में जाने लगे।

कंगाल मनुष्य भी महात्मा के पास गया और उनसे कहा-''महात्मा जी। मैं बहुत गरीब हूं। भगवान जाने क्यों मुझपर कुपित हैं, उसने औरों को तो बहुत सा धन दिया है पर मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं है। आप मुझ पर ऐसी कृपा कर दीजिए जिससे मुझे भी धन मिल जाये और मैं भी जीवन सुखपूर्वक व्यतीत कर सकूं।''

महात्मा ने कंगाल की बात सुनकर उसे परामर्श दिया-'बेटा ऐसा कर, जो कुछ तेरे पास है उसे बेच दे। उसके बदले मेें तुझे ढेर-सा धन मिल जायेगा।'' रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

कंगाल आश्चर्यचकित होकर महात्मा जी की ओर निहारने लगा और उनसे बोला- पर महाराज, मेरे पास तो है ही कुछ नहीं। ईश्वर ने मुझे ऐसा कुछ दिया भी नहीं जिसे बेचकर मैं अपना काम चला लूं।

महात्मा ने कहा- 'दिया क्यों नहीं। तुझे तो परमेश्वर ने अनमोल धन दिया है परन्तु तेरे पास उसे परखने और समझने का ज्ञान ही नहीं है। ...तू ऐसा कर। अपनी एक आंख बेच दे। मैं तुझे बीस हजार रूपया दिला दूंगा।'' इस बात पर कंगाल व्यक्ति बिलकुल भी तैयार नहीं हुआ। इसी तरह महात्मा ने उससे अपनी टांग, हाथ आदि बेचने के लिए कहा परन्तु व्यक्ति बेेचने को तैयार नहीं हुआ। इस पर महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा- बेटा, लाखों रूपये कीमत की सम्पत्ति तो तेरे पास है और तू फिर भी अपने आप को गरीब कहता फिरता है। ईश्वर ने जो प्रचुर सम्पत्ति का भण्डार तुझे स्वास्थ्य और शक्ति के रूप में दिया है, इसे काम में ला। कठिन परिश्रम कर और जो पूंजी ईश्वर ने तुझे नियामत रूप में दी है, उसके द्वारा धन उपार्जन करके अपना काम चला और खुशी से जीवन व्यतीत कर। याद रख, कर्म के बिना कुछ प्राप्त नहीं होता।

कंगाल को सच्चाई का आभास हुआ और वह चुपचाप महात्मा जी की सलाह गांठ में बांधकर चल दिया।

-परशुराम संबल

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