बाल कहानी: आप मंच पर बोलने से घबराते हैं?

बाल कहानी: आप मंच पर बोलने से घबराते हैं?

अक्सर दस में से नौ लोग मंच पर जाते ही लडख़ड़ाने लगते हैं। उनकी सांस फूल जाती है और रटा-रटाया भाषण कंठ से बाहर नहीं निकल पाता। कई बार तो रक्तचाप खतरनाक शक्ल अख्तियार कर लेता है। महिलाओं में यह समस्या इसलिए ज्यादा देखी जाती है क्योंकि वे सामान्यत: सार्वजनिक जन जीवन से दूर रहती है।

लिहाजा यकायक ऐसी किसी परिस्थिति का सामना करते ही उनका आत्म विश्वास डगमगाने लगता है। विशेषज्ञ इसे स्टेज फीयर या मंच भय के नाम से पुकारते हैं। चिकित्साविदों के अनुसार सार्वजनिक वार्तालाप या मंचीय भाषण के दौरान उपजने वाले घबराहट के लक्षण वस्तुत: एड्रिनलीन नामक रसायन के अत्यधिक स्राव की वजह से होते हैं।

चरम तनाव की स्थिति में यह हार्मोन तेजी से स्रावित हो कर हड़बड़ी, भय, कंठ सूखना, पसीना छूटना, हकलाना, स्मृति दोष जैसी समस्याएं पैदा करता हैं। कई बार स्टेज फियर भयानक रूप ले सकता है। संवेदनशील होने के नाते नारी इसके प्रभाव देर तक महसूस करती है। कुछ आसान उपायों से मंच भय को नियंत्रित किया जा सकता है।

श्रोता मंडली के बीच सहृदय समझदार व्यक्ति की पहचान करें। प्राय: कुछ लोग भाषण देते समय वक्ता का उपहास कर उसे घबराने का प्रयास करते है। इससे बचने के लिए उन्हें नजर अंदाज कर मित्रवत् श्रोता की तलाश कीजिए। ऐसा मानें कि आप उसे ही सम्बोधित कर रहे हैं। इन साधारण सावधानियों से आप मंच को खौफ का पर्याय मानने से बच सकते हैं। अपने भाषण को लेकर उत्साह दर्शाइए।

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अपनी किताब इफेक्टिव स्पीकिंग में डेल कारनेगी ने लिखा है 'अपने भाषण को ऐसे अन्जाम दें जैसे आपने इस विषय पर गंभीर शोध और अनुभव से बोलने का अधिकार प्राप्त किया है। अभ्यास से बढ़कर कोई जादुई छड़ी नहीं है। शीशे के समक्ष बार-बार भाषण अथवा अपनी भूमिका यदि नाट्य मंचन है, दोहराएं। आत्म विश्वास का अभिनय भी आपको दृढ़ बना सकता है।

मित्रों या परिवार के आगे भी भाषण का पूर्वाभ्यास किया जा सकता है। वीडियो टेपिंग के जरिये आप अपने भाषण की कमियां दूर कर सकते हैं और अपने को अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं। विचारों के समायोजन हेतु जिस विषय पर भी भाषण देना है, उससे संबधित समस्त विचारों की सिलसिलेवार कागज पर सूची बनाएं। भाषण के बिन्दुओं का क्रम बिगड़ जाने से लोग ज्यादातर हड़बड़ाहट के शिकार हो जाते है। साथ ही श्रोता भी अपनी बात ठीक तरह से समझ नहीं पाते। इसलिये अपने विषय से वाकिफ रहना भी बहुत जरूरी हो।

मंच पर जाने के पूर्व अपनी भूमिका को अच्छी तरह समझ लें। तद्नुसार ही आचरण करें। ऐसा न हो कि घोर गंभीर परिवेश वाले किसी आयोजन में आप हंसी बिखेरते नजर आएं। आत्म विश्वास की सृष्टि के लिए जरूरी है कि अपने पास उपलब्ध सामग्री को अच्छी तरह समझ लें। उसी सीमा में रहकर अपना भाषण दें।

दृश्य अभिकल्पन यानी अपना प्रदर्शन प्रभावी बनाने का सबसे अच्छा तरीका है संभावित स्थिति का दृश्याकंन भाषण अथवा किरदार की पक्तियां दृश्य रूप में याद रखें। इससे विचारों के मानसिक एनीमेशन में मदद मिलेगी। जिस परिवेश अथवा समुदाय के समक्ष भाषण देना है, उसका दृश्य रूप अपने मन मस्तिष्क में बिठा लें। व्यक्तिगत उदाहरण भाषण को प्रभावी बनाते हैं। जोश का मतलब श्रोताओं पर पिल पडऩा नहीं है।

- जे.के. शास्त्री

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