Read latest updates about "बाल जगत" - Page 1

  • बाल जगत/जानकारी: कैसे बने कार्टून कैरेक्टर

    जब भी तुम किसी कार्टून को टीवी पर देखते हो तो तुम्हारे ही क्या, साथ बैठे बड़ों के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है। उसके करतब शुरू होने से पहले ही सब हंसने लगते हैं। तुम्हारे हाथ में एक बार रिमोट लग जाए तो सीधे कार्टून चैनल ही लगाने के लिए मचल जाते हो पर क्या तुम्हें पता है कि हमारे ये पसंदीदा कार्टून...

  • बाल कथा: जहां चाह, वहां राह

    विक्रमगढ़ में राजा विराट राज्य करते थे। वे बहुत ही दयालु एवं न्यायमित्रा राजा थे। प्रजा के हर सुख-दुख का पूरा ख्याल रखते। प्रजा के कष्टों को जानने के लिए वे अपने प्रधानमंत्री हिमांशु के साथ रात्रि में भेष बदलकर घूमने निकला करते थे। एक दिन अपने नियम के अनुसार राजा विराट अपने प्रधानमंत्री के साथ घूम...

  • बाल जगत/जानकारी: जन्म कथा डाक टिकट की

    आज रंग-बिरंगे डाक टिकट प्रचलन में हैं। हर देश डाक टिकट छापता है। ब्रिटेन के डाक टिकट पर उसके देश का नाम अंकित नहीं होता जबकि डाक टिकट का जन्मदाता ब्रिटेन ही है। डाक टिकट कैसे अस्तित्व में आया, आइए इस बारे में जानें। बात 1835 की है। इंग्लैंड के एक अध्यापक और समाज सुधारक रोलेंड हिल को लगा कि डाक...

  • बाल जगत: हमारे पर्व-त्योहार किसी विशिष्ट तिथि को ही क्यों होते हैं

    हमारे पर्व-त्योहार हिन्दी तिथियों के अनुसार ही होते हैं जिसका निर्णय हम पंचांग से करते हैं किंतु कोई पर्व-त्योहार किसी विशेष तिथि को ही क्यों होता है, इसके पीछे एक विशेष कारण है। पर्व-त्योहारों में किसी विशेष देवता की पूजा की जाती है, अत: स्वाभाविक है कि वे जिस तिथि के अधिपति हों, उसी तिथि में उनकी...

  • आवश्यक है बच्चों में चंचलता

    अक्सर बच्चे एक काम को करते-करते ऊब जाते हैं और वे पहला काम छोड़कर दूसरे काम में लग जाते हैं लेकिन उनकी यही छटपटाहट दूसरे काम में लगते ही फिर शुरू हो जाती है जिससे वे कोई भी काम पूरा नहीं कर सकते। नतीजन उन्हें डाँट खानी पड़ती है। बच्चे का किसी काम में मन नहीं लगने का कारण यह माना जाता है कि बच्चा...

  • बच्चों को दें किताबों का शौक

    आज अधिकतर अभिभावक इस बात से परेशान हैं कि उनका बच्चा या तो मोबाइल से चिपका रहता है या टी. वी. से। इस बात के जिम्मेदार बच्चे कम, अभिभावक अधिक हैं। आज अधिकतर अभिभावक बच्चे को प्रारंभ से ही टी. वी. पर कार्टून फिल्में, मोबाइल पर गेम्स आदि खेलने देने की पहल करते हैं। प्रारम्भिक वर्षों में रहा शौक...

  • बाल जगत: टैडी बियर की रोचक कहानी

    टैडी बियर की कहानी बड़ी रोचक है। डेढ़ साल की उम्र में मार्गरेट स्टीफ नामक लड़की को पोलियो हो गया था जिसके कारण वह चलने फिरने में असमर्थ थी। वह व्हील चेयर के सहारे ही इधर-उधर जाती थी। अपंग होने के बावजूद उसमें आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं थी। उसने एक खिलौना बनाया जो बाद में टैडी बियर के नाम से...

  • बाल कथा: बुद्धिमान चोर और चोर राजा

    एक बार चार चोर चोरी करते रंगे हाथ पकड़े गये। चारों को राजा के समक्ष पेश किया गया। राजा ने चारों चोरों को मौत की सजा सुना दी। अगले दिन एक-एक कर चोरों को फांसी पर लटकाया जाने लगा। जब तीन को फांसी लग गयी तो चौथे चोर को अपने बचने की उम्मीद न रही। वह पहली बार में ही चोरी करते पकड़ा गया था। वह कल से ही...

  • बाल कथा: जीरो से बना हीरो

    बहुत समय पहले की बात है। चंपावत जनपद के पाटी ब्लॉक में गर्गचूला मंदिर के चरणों में बसे गांव गागर में चिंतामणि नामक एक व्यक्ति रहता था। उन दिनों शिक्षा का प्रचार-प्रसार आज की भांति नहीं था, अत: एक परिवार में ही कई लोग निरक्षर हुआ करते थे। चिंतामणि नामक वह व्यक्ति भी निरक्षर था। चिंतामणि नाम का वह...

  • क्यों होते जा रहे हैं बच्चे जिद्दी और उग्र?

    आज संयुक्त परिवारों का दौर नहीं है। प्राय: एकल परिवार ही हैं। एकल परिवार भी ऐसे जहां पति-पत्नी नौकरी पेशा हैं। उनके पास अपने लिए ही समय का अभाव है तो वे बच्चों को क्या समय दे पाएंगे। बच्चे को आया के सहारे छोड़ वे देर रात तक घर लौटते हैं। बच्चे के साथ चंद पल गुजारने का समय उनके पास नहीं है तो अच्छे...

  • बाल कथा: अपना काम स्वयं करो

    पीलू बंदर को चित्रकारी का बहुत शौक था। वह बहुत बड़ा चित्रकार बनना चाहता था लेकिन इसके लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी की जरूरत थी जो पीलू के लिए संभव नहीं था। वह एक नंबर का आलसी था। कोई भी काम मन लगा कर नहीं करता था। शार्टकट तलाशता था। उसकी मां उसके शौक के बारे में जानती थी और यह भी जानती थी कि वह किसी...

  • बाल जगत: तूफान की वापसी

    बहुत पुरानी बात है। गोलू, राजू, समीर और दीपक के घर रेलवे कॉलोनी में थे। इसलिए चारों दोस्तों को घर से स्कूल और स्कूल से घर आने-जाने के लिए रेलवे लाइनों को पार करना पड़ता था। रेलवे लाइनों को पार करने के लिए एक पुल बना था लेकिन वह उनकी कॉलोनी से लगभग दो फर्लांग दूर था। फिर भी वे अक्सर उस पुल का प्रयोग...

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