Read latest updates about "बाल जगत"

  • बाल कथा: पाखंडी साधु

    बहुत समय पहले किसी जंगल में एक मंदिर था। उस मंदिर में एक पाखंडी आदमी साधु के वेश में रहता था। आसपास के भोले भोले श्रद्धालु लोग उसे सचमुच महात्मा जानकर उसकी पूजा करते थे। वे तरह तरह के कीमती उपहार, भोजन, कपड़े और रूपये आदि लेकर उसके दर्शन करने जाते थे।उस कपटी साधु के कई मुस्टंडे चेले थे। वे भी उसी...

  • बच्चों का मनोबल न गिराएं

    हर बच्चे का स्वभाव प्राकृतिक रूप से भिन्न होता है कोई बच्चा भावुक, अति भावुक, मस्त, बात को सुनने और मानने वाला और कोई सुनकर अनसुना करने वाला होता है पर कभी कभी बच्चे ऐसे हालत बना देते हैं कि माता-पिता को उन्हें डांटना पड़ता है या कठोर शब्दों का प्रयोग करना पड़ता है जिसका प्रभाव बच्चे के कोमल ह्नदय...

  • बाल कथा: मूर्ख की परेशानी

    एक गांव में एक बहुत मूर्ख व्यक्ति रहता था। एक बार वह बीमार पड़ा तो अपना इलाज कराने एक दूर के कस्बे में पहुंचा। वैद्यराज ने उसे उचित औषधि देकर केवल Óखिचड़ी ही खाने की सलाह दी।वह पक्का भुलक्कड़ भी था। जब वह अपने गांव वापस जा रहा था, इस डर के मारे कि कहीं वह खिचड़ी का नाम न भूल जाये अत:...

  • बाल जगत: यह भी जानो

    - अयोध्या प्रसाद 'भारती'- इंग्लैण्ड के एक प्रधानमंत्री विलियम पिट (1759-1806) की आयु मात्र 24 वर्ष थी तब वह इस पद पर पहुंचे। इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री विलियम ही हुए हैं। - उस्ताद निसार हुसैन (1844-1916) के गायन से प्रसन्न होकर बंगाल के गवर्नर ने उन्हें जीवन भर के लिए रेलवे का फस्र्ट...

  • बाल जगत: परीक्षा शिक्षा की कसौटी है

    - अनूप मिश्रा आज के बदलते दौर में कदम-दर-कदम परीक्षाओं का कड़ा सामना करना ही पड़ता है। जिस प्रकार सोने की कसौटी पर परखने हेतु तथा शुद्ध करने के लिए आग में तपाया जाता है कि उसी तरह छात्रों की योग्यता की कसौटी को जांचने के लिए परीक्षा का आयोजन भली-भांति किया जाता है। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इसी...

  • बाल जगत/जानकारी: हमारी नदी गंगा

    - नीतू गुप्ताअब भी समय है। भारतवासियो! जागो। अगर इस ओर ध्यान न दिया तो यह श्वेत सुर सरिता काली नदी का रूप जल्द ही धारण कर लेगी। इसका अमृत तुल्य जल विषमय बनते देर नहीं लगेगी। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए इसकी सहायक नदियों और नालों को पहले प्रदूषण रहित करना होगा। तभी हम गंगा को निर्मल बना सकते...

  • बाल कथा: पकड़ा गया महाआलसी

    - परशुराम संबलबैठे हुए व्यक्ति ने बड़ी लापरवाही से ऊंघते हुए कहा- 'बेकार में ही कौन उठकर खड़ा होगा। हम तो बस ऐसे ही ठीक हैं।' बस, महाआलसी का पता लग चुका था। महा आलसी को नौकरी से हटाकर उसी दिन से सेठ ने कामगारों पर काम के समय निगरानी बढ़ा दी। सच है आलस उन्नति के पथ का बाधक है। फिर क्या था, विशेषज्ञ...

  • बाल कथा : स्वामीभक्त शक्तिशाली पक्षी-बाज

    स्वाभिमानी, शक्तिशाली एवं स्वामीभक्त पक्षी बाज के संबंध में जीव वैज्ञानिकों का मत है कि यदि हमारे नेत्रों में भी वही विशेषताएं होती जो कि साधारणत: बाज की आंखों में रहती है तो हम एक किलोमीटर की दूरी तक रखी हुई किसी भी वस्तु को देख सकते। तीव्र वेग एवं दृष्टि के कारण ही वृक्ष अथवा ऊंचे से...

  • बाल कथा: हरियल पक्षी

    बहुत पुराने समय की बात है, एक किसान के खेत के पास एक बटेर रहती थी। उसका नाम था बिटूली। बिटूली बटेर बहुत सुंदर थी और गाती भी खूब सुरीला थी पर वह इतनी ही नकचढ़ी भी थी। उसे अपनी सुंदरता और गायन कला का बड़ा घमंड था। गुस्सा उसकी नाक पर धरा रहता था। बात-बात पर वह दूसरों का अपमान करती थी।...

  • कहीं आपका बच्चा बिगड़ तो नहीं रहा है?

    प्राय: सभी माएं अपने बच्चों को प्रसन्न देखना चाहती हैं। हर तरह के साधन जुटाकर समय-समय पर अपने बच्चों की इच्छाओं की पूर्ति करती रहती हैं। साथ ही वे अपने बच्चों की गलतियों को छिपा लेती हैं ताकि वे पिता की डांट से बच सके। यही आदत आगे चलकर बच्चों को निडर बना देती है जिसका परिणाम घातक होता...

  • बाल कथा: बांधो मत पानी

    मछुआरों का एक गांव था। सभी मछुआरे सूरज निकलने से पहले ही मछलियां पकडऩे निकल पड़ते। दोपहर तक उन्हें हाट में बेचकर घर लौट आते। रात को नाचते-गाते और सो जाते। यही उनका जीवन क्रम था। उसी गांव में बालू नाम का एक मछुआरा रहता था। उसकी तीन लड़कियां थीं। पत्नी माया और बच्चे काम में बालू की...

  • बाल जगत/जानकारी: एक अनोखा संग्रहालय, मानव मस्तिष्कों का

    मस्तिष्क ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अनुपम उपहार है जिसे मानव ने प्राप्त किया है। मस्तिष्क मानव के शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण एवं रहस्यमय अंग भी है। बुद्धि एवं अनन्त जानकारियों को समेटे मस्तिष्क की कार्य प्रणाली आज भी वैज्ञानिकों की समझ से परे है हालांकि इनके रहस्य को जानने के लिए वैज्ञानिक निरंतर...

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