Read latest updates about "बाल जगत" - Page 1

  • बाल जगत/जानकारी: गंगा प्रदूषण की कहानी-गंगा की जुबानी

    मैं आपकी पतित पावनी 'गंगा' बहुत दुखी हूूं। मेरा अमृतमय पानी प्रदूषित होकर विषाक्त हो गया है। वह पीने लायक भी नहीं रह गया है। उसमें जो औषधिकारक गुण था, वह धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। मैं बीमारियों का घर बन गयी हूं। मेरे पानी के सेवन से अनेक लोगों को हानि पहुंच सकती है। इन सब कारण से मैं बहुत...

  • बाल कथा: सच्चा बहादुर

    कुश्ती पुराने ज़माने से ही भारतीयों का प्रमुख शौक रहा है। कुश्ती एक सम्मानित कला भी समझी जाती थी क्योंकि इसका संबंध बहादुरी, ताक़त और फुर्ती से रहा है। पौराणिक आख्यानों से पता चलता है कि उस समय मल्ल युद्ध का प्रचलन था जो कि कुश्ती का ही एक रूप है। पुराने राजा-महाराजाओं ने भी कुश्ती को एक कला के रूप...

  • बाल कथा: सत्कर्म का सुख

    विषादग्रस्त समुद्र को देख कर भगवान भुवन-भास्कर ने प्रश्न किया 'हे रत्नाकर! आपकी यह दशा क्यों हुई? कृपया इसका कारण स्पष्ट करने की कृपा करें। यदि मैं आपके दुख निवारण में किंचित सहायक हो सका तो अपने आपको सौभाग्यशाली समझूंगा।' प्रभाकर की सहानुभूति पाकर समुद्र ने अपनी व्यथा प्रकट करते हुए कहा- Óहे...

  • बाल जगत/जानकारी :बालों की कहानी

    बाल केवल मानव शरीर पर ही नहीं, दूसरे स्तन-धारियों पर भी होते हैं। मानव शरीर पर बंदर से ज्यादा बाल हैं लेकिन बहुत छोटे और बारीक। इनका पैदा होना हारमोन की मात्रा पर निर्भर करता है। नर के शरीर पर मादा से ज्यादा बाल होते हैं। अलग-अलग भागों के बालों की लंबाई अलग-अलग होती है। सिर के बाल 150 सेंटीमीटर तक...

  • बाल कथा: कंजूस सेठ, चालाक नौकर

    एक सेठ जी थे। हलवाई का काम करते थे। कस्बे में मिठाइयों की दुकान थी। सेठ बड़ा कंजूस था। इतनी बड़ी दुकान में कारीगरों के अलावा काम करने के लिये एक ही नौकर था। उसे भी वेतन और खाना पूरा नहीं देता था। परेशान अलग करता था इसलिये कोई भी नौकर उसके यहां महीने दो महीने से अधिक नहीं टिकता था। उसने एक बार एक...

  • बाल कथा: बालक की ईमानदारी का फल

    बारह वर्ष का छोटा-सा कालू एक लकड़हारे का पुत्र था। उसका पिता बूढ़ा व बीमार था। इस कारण वह चलने-फिरने और शारीरिक परिश्रम करने में असमर्थ था। कालू पर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी। इसलिये कालू सवेरे खा-पीकर, कुल्हाड़ी कंधे पर रख अपनी धुन में गाते हुए लकड़ी काटने के लिये चल पड़ता। वह लकड़ी काट कर...

  • बाल कथा: शराब की कहानी

    पुराने जमाने की बात है। एक नदी के किनारे एक विशाल पीपल का पेड़ था। उस पर एक मैना रहती थी। वह सवेरे जाग जाती थी और खूब गाती थी। इसके बाद वह उड़ जाती थी और फिर शाम को वापस आती थी। थोड़ी देर तक चहक कर सो जाती थी। कुछ दिनों के बाद एक तोता आया और उसी पेड़ पर रहने लगा। दोनों में परिचय हुआ...

  • बाल कथा: जिद्दी चूहा

    बहुत पहले की बात है। एक जंगल में एक कौआ और एक चूहा रहते थे। दोनों बहुत पक्के दोस्त थे। जंगल से दूर एक नदी थी। एक दिन चूहे ने कौए से कहा, भाई, मेरी इच्छा है, नदी नहाने को चला जाए। कौए ने पहले तो मना किया, लेकिन चूहे की जिद्द के आगे उसकी एक न चली। कौए को हां करनी ही पड़ी। चूहे ने...

  • बच्चों की समस्याओं को समझिए

    संसार में बच्चे अमूल्य निधि हैं। बच्चों का अपना संसार होता है जिसमें घुस कर ही हम उनकी भावनाओं व संवेदनाओं को पहचान पाते हैं। बच्चों की छोटी-छोटी बातें जिनकी हम उपेक्षा करते हैं उनके लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती हैं वह क्या चाह रहा है, क्या सोच रहा है क्या कर रहा है, यदि आप इसे देखेंगे तो पाएंगे...

  • बाल जगत / जानकारी: कीड़े खाने वाले पेड़-पौधे

    जब हम छोटे थे तो हममें से अधिकतर लोग सोचते होंगे कि सब पौधों को जीवित बताते हैं पर ये खाना तो खाते नहीं हैं लेकिन अब हम सब जानते हैं कि पौधे जड़ों द्वारा भोज्य पदार्थ लेते हैं। इसके बावजूद अब भी बहुत से लोगों को नहीं पता कि कुछ पौधे कीटों को खाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि उनका मुंह होता है और वे...

  • याद क्यों नहीं होता?

    आज के भौतिक व कम्प्यूटर युग में व्यक्ति भी कम्प्यूटर बनकर हर काम को अति शीघ्र करना चाहता है। यही कारण है कि मस्तिष्क पर दबाव तनाव जैसी स्थितियां बढ़ रही हैं और स्मरण शक्ति क्षीण होती जा रही है। लोग परेशान हैं कि याददाश्त कैसे बढ़े? व्यापारी भी बाजार में चलती माँग को देखते हुए दिन पर दिन नयी-नयी...

  • बच्चे को टॉफी, चॉकलेट से बचाएं

    माता-पिता को मालूम होना चाहिए कि टॉफी, चॉकलेट बच्चों के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनमें कोई पोषक तत्व नहीं है। बच्चों में कई छोटी-छोटी बीमारियां टॉफी, चॉकलेट खाने से होती हैं जैसे मुंह से बदबू आना, जीभ पर मैल जमा होना, पेट में कीड़े होना, खांसी, गले में घरघराहट इत्यादि। बराबर मीठी चीजें खाते रहना...

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