Read latest updates about "बाल जगत" - Page 1

  • बाल कथा: टीनू की बातें

    टीनू चार साल की आयु पूरी कर चुका है। पांचवें में चल रहा है। छोटी उम्र में ही उसकी बातें ऐसी हैं कि बड़ों बड़ों के कान कतर देता है। ऐसे ऊटपटांग सवाल कर बैठता है कि जल्दी से जवाब ही नहीं बन पाता। यों कहिये कि कहने को वह बच्चा है पर उसके पेट में दाढ़ी है। आइये उसके कुछ कारनामे बतायें- एक दिन टीनू की...

  • बाल कथा: अक्ल खरीदी

    एक गांव में किशन नाम का गरीब ब्राह्मण रहता था। उसके पास आय का कोई साधन नहीं था। उसकी पत्नी राधा उसे रोज कहती कि जाओ कुछ कमा कर लाओ वरना खाएंगे क्या। लेकिन किशन ऐसे ही हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता था। एक दिन राधा के बहुत कहने पर वह कमाने जाने राजी हुआ लेकिन उसने कहा, रास्ते में मुझे भूख लगेगी तो मैं...

  • बाल जगत/जानकारी: भारतीय डाक प्रणाली इतिहास के आइने में

    भारतीय डाक प्रणाली बहुत प्राचीन है। यह विश्व की सबसे बड़ी डाक प्रणाली है। 1947 में जब भारत आजाद हुआ था, तब देश में 22116 डाकघर थे। अब इसकी संख्या बढ़कर 1 लाख 55 हजार 618 हो गई है। भारत 1876 से विश्व डाक संघ का सदस्य है। विश्व के लगभग 170 देशों से हमारे संचार संबंध हैं। 37 देशों के साथ मनीआर्डर...

  • मक्खियां - कुछ रोचक जानकारी

    मानव जीवन में मक्खियां ही ऐसी जीव हैं जो हमेशा हमारे आस-पास रहती हैं। मानव जगत की कुछ बीमारियों का कारण भी ये मक्खियां ही हैं। मक्खियों की प्रजातियां बहुत तीव्र गति से बढ़ती हैं। अन्य कुछ जीवों की भांति मक्खियां भी अंडे देती हैं जो इनके प्रजनन की प्रथम अवस्था है। इसके बाद अंडे लार्वा में परिवर्तित...

  • बाल जगत: चींटियां विचित्र जीव होती हैं

    आपने अनेकों प्रकार की चींटियां देखी होंगी मगर सब चींटियों के क्रियाकलाप एक जैसे नहीं होते लेकिन सभी चींटियां मेहनतशील होती हैं। चींटियों के डंक मारने का तरीका अलग-अलग होता है। कुछ चींटियां मुंह से काटती हैं तो कुछ चींटियां अपने शरीर के पिछले हिस्से से डंक मारती हैं। अपने शरीर के पिछले हिस्से से...

  • बच्चों को रखें अनुशासन में

    हर माता पिता को अनुशासित बच्चे ही अच्छे लगते हैं। बच्चों को अनुशासित बनाना हो तो बचपन से ही उन्हें ट्रेनिंग देनी पड़ती है। स्वयं को भी वैसा बनाना पड़ता है, जैसा हम बच्चों को चाहते हैं, तभी बच्चे हमारा अनुकरण कर सकते हैं। बेटा हो या बेटी, दोनों का अनुशासन में रहना जरूरी है। पहले तो कहा जाता था कि...

  • बाल जगत: कद्र कीजिए वक्त की

    समय बड़ा महत्त्वपूर्ण एवं बलवान होता है। दुनियां की सारी दौलत खर्च करके भी बीते समय को वापस नहीं खरीदा जा सकता। समय को हीरे, मोती, चांदी व सोने से भी कहीं अधिक मूल्यवान आंका गया है मगर फिर भी समय को महत्त्वपूर्ण न मानते हुए लोग इसकी बर्बादी करते हैं। प्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा ने इसी समय से...

  • बाल कहानी: मेहनत के पैसे का मूल्य

    बहुत पुरानी बात है। एक गांव में एक मजदूर अपनी पत्नी और जवान लड़के के साथ साथ रहता था। लड़का कुछ करता-धरता नहीं था। मां-बाप बूढ़े और कमजोर हो रहे थे। एक दिन दोस्तों के कहने में आकर लड़के ने बाप के समक्ष लंबी भूमिका बांधते हुए कहा, 'बापू, अब आप और मां काफी कमजोर हो चुके हैं। घर के कामकाज अब मां से...

  • बच्चों में आत्म-विश्वास पैदा करें

    जब स्कूल में कोई बच्चा होशियार होने के बावजूद अपने अन्य कमजोर साथियों से पीछे रह जाता है तो उसमें आत्म-विश्वास की कमी होने लगती है। ऐसे में बच्चे के माता-पिता उसको डांटते हैं और उसकी तुलना अन्य बच्चों से करते हैं। बच्चे की बुनियादी आवश्यकताओं को न समझ पाने के कारण, माता-पिता बच्चे से उपेक्षापूर्ण...

  • बाल जगत: रोटी तेरे रूप अनेक

    रोटी शब्द से भला कौन परिचित नहीं होगा। हमारे जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताओं में प्रथम रोटी ही है। रोटियां तो हमारे भोजन का अभिन्न अंग हैं। रोटी के बिना भोजन अधूरा ही रहता है चाहे फिर भोजन में 56 भोग ही क्यों न हों। रोटी के बिना हमारा पेट तो भरता है परन्तु तृप्ति नहीं होती, संतुष्टि नहीं मिलती। सच...

  • अभिभावक कैसे प्रभावित कर सकते हैं अपने बच्चों को

    आधुनिक पीढ़ी के बच्चों का सही रूप से पालन पोषण करना और उन्हें प्रभावित करना बहुत कठिन होता जा रहा है। शायद इन्हीें कठिनाइयों के कारण आज की पीढ़ी कुछ गलत रास्तों पर चलने के लिए बाध्य होती जा रही है। यह सब देखते हुए माता-पिता को बहुत ध्यान से और नर्मी से बच्चों के साथ अपने संबंधों को संवारकर रखना...

  • बाल कथा: जब विद्वान कहलाया मूर्ख

    पांचाल देश में सैंकड़ों साल पहले राजा अग्नि वर्मा शासन किया करते थे। उनके राज्य मे विद्यानंद नामक एक विद्वान पंडित थे। उनके बारे में प्रसिद्ध था कि वे सभी शास्त्रों के ज्ञाता हैं। राजा अग्निवर्मा सहित राज्य के लगभग सभी लोग उनका बड़ा आदर-सम्मान करते थे। उनकी विद्वता के कारण ही राज्य ने उन्हे...

Share it
Top