Read latest updates about "बाल जगत" - Page 1

  • बाल कथा: परीक्षा के आखिरी दिनों में अच्छे अंक हासिल करने का मूल-मंत्र

    परीक्षा से पहले का अंतिम एक महीना किसी भी परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि यह महीना सेलेबस को पुन: आरंभ करने का नहीं अपितु उसको बांधने और यह सुनिश्चित करने का है कि आप की तैयारी सटीक दिशा में है या नहीं। यह वह समय है जो तय करता है कि आप परीक्षा में कितना बेहतर प्रदर्शन...

  • बाल जगत: गिरगिट रंग क्यों बदलता है

    गिरगिट की तरह रंग बदलना मुहावरा आपने अवश्य ही सुना होगा परन्तु आपको यह पता नहीं होगा कि गिरगिट रंग क्यों बदलता है? गिरगिट से तो आप परिचित हैं ही, इसलिए इस विषय में अधिक कुछ बताने की जरूरत नहीं है। गिरगिट कई तरह के होते हैं। यहां हम 'पमेलियन' और 'कैलोटिस' नामक गिरगिटों की बात करेंगे। गिरगिट एक...

  • जानकारी/बाल जगत: विचित्रताओं से भरे पेड़-पौधे

    यह सृष्टि कितनी विचित्र है, यह समझ पाना मुश्किल है। सृष्टि की इन विचित्रताओं से पेड़-पौधे भी अछूते नहीं लेकिन आज मनुष्य इन पेड़-पौधों को इस कदर नष्ट करने पर तुला है कि इनके अस्तित्व समाप्त होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। इन पेड़-पौधों की विचित्रताओं एवं उपयोगिता को देखते...

  • बाल जगत/जानकारी: इतिहास के दर्पण हैं सिक्के

    सिक्का किसी भी देश की संस्कृति, सभ्यता, कला, इतिहास, शासन व्यवस्था व अर्थव्यवस्था का आईना होता है। इन सिक्कों की बदौलत ही हमें अपनी प्राचीन गौरवपूर्ण संस्कृति की झलक देखने को मिलती है और साथ ही साथ विभिन्न सभ्यताओं, राजवंशों और इतिहास की उथल-पुथल की जानकारी भी मिलती है। विश्व में लगभग सभी देश...

  • बाल कथा: बच्चे पसंद करते हैं आहार में विविधता

    आजकल अधिकतर अभिभावकों को अपने बच्चे से एक परेशानी है कि वह खाने में बहुत चूज़ी है। घर का खाना तो बच्चा खाना ही नहीं चाहता। मुश्किल से दो-तीन चीजें ही उसकी पसंद की हैं। कुछ खाता ही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर बच्चा स्वस्थ है, एक्टिव है, उसका वजन सामान्य है तो अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत...

  • जानकारी: सुनो कहानी स्टेथस्कोप की

    बच्चों, तुमने देखा ही होगा कि डॉक्टर अक्सर अपने गले में एक रबर की ट्यूब जैसा उपकरण लटकाये रहते हैं। क्या तुम जानते हो कि यह क्या होता है? इसे आला या स्टेथस्कोप कहते हैं। डॉक्टर रोगी की नाड़ी देखने और बुखार नापने के बाद स्टेथस्कोप के घण्टीनुमा भाग को छाती से लगाते हैं और रबर की नलियों से जुड़े दोनों...

  • एग्जाम-नो टेंशन

    एग्जाम फीवर न केवल बच्चों बल्कि उनके माता-पिता को भी सताता है। माता-पिता को तो इतनी टेंशन देता है कि शायद उन्होंने उतनी टेंशन अपने एग्जाम्स में भी नहीं ली होगी। यदि मां बाप और बच्चे इतनी टेंशन लेंगे तो परिणाम खराब हो सकता है। ऐसे में माता पिता को जरूरत होती है कि वे स्वयं थोड़ा कूल रहें और बच्चों...

  • बोध कथा: अपना अपना उसूल

    महात्मा जीलानी एक विद्वान, कर्तव्यनिष्ठ और दीन-दुखियों के सहायक थे, वे नियमों के भी बड़े पक्के थे। एक बार वहां के राजा ने उन्हें एक पुस्तक लिखने का काम सौंपा। क्योंकि महात्मा जीलानी एक संत थे इसलिये वे दिन भर दीन दुखियों और असहायों की सेवा में लगे रहते थे, इसी कारण दिन में उन्हें पुस्तक लिखने का...

  • मत घबराइये परीक्षाओं से

    परीक्षा के दिन भी क्या दिन होते हैं। विद्यार्थी के लिए यह कठिन समय होता है। न खाने की चिन्ता रहती है, न शरीर का ध्यान। बस मन में एक ही भय समाया रहता है-परीक्षा का। चाहे गरीब विद्यार्थी हो या अमीर, कमजोर हो अथवा कक्षा में सदैव प्रथम आने वाला, सभी अपने आस पास रंग बिरंगी किताबें फैलाए उन्हीं में खोए...

  • बाल कथा: बालक की ईमानदारी का फल

    बारह वर्ष का छोटा-सा कालू एक लकड़हारे का पुत्र था। उसका पिता बूढ़ा व बीमार था। इस कारण वह चलने-फिरने और शरीरिक परिश्रम करने में असमर्थ था। कालू पर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी। इसलिये कालू सवेरे खा-पीकर, कुल्हाड़ी कंधे पर रख अपनी धुन में गाते हुए लकड़ी काटने के लिये चल पड़ता। वह लकड़ी काट कर लाता और...

  • बाल कथा: नन्हें का बलिदान

    भारतीय इतिहास अमर बलिदानियों की अनेक गाथाओं से परिपूर्ण है किन्तु कुछ ऐसे भी बलिदानी हुए हैं जिनकी गाथा इतिहास के पृष्ठों तक पहुंच नहीं सकी। इतिहास पुरूषों की ध्येय साधना में उस निष्काम साधक की कहानी भी प्रकाश में नहीं आ पाई। घटना महाराणा प्रताप के जीवनकाल की है जब वह मुगल सेनाओं से अपने देश की...

  • बाल जगत/ जानकारी: भारतीय परंपरा का वृक्ष-बरगद

    एक अनुश्रुति है कि इलाहाबाद के दुर्ग में स्थित अक्षयवट कई कल्पों से जीवित है। सुप्रसिद्ध इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार ने अपने ग्रन्थ 'शिवाजी' में जहांगीर के समय की एक घटना का उल्लेख किया है। सम्राट जहांगीर ने इलाहाबाद के अक्षयवट को जड़ से कटवा दिया। इसके बाद उसने जड़ की ठूंठ में लाल गरम लोहे की सलाख...

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