Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • व्यंग्य: आचार संहिता लग गई, अब सब आदर्श ही होगा

    लो फिर लग गई आचार संहिता। अब महीने दो महीने सारे सरकारी काम काज नियम कायदे से ही होंगे। पूरी छान बीन के बाद। नेताओं की सिफारिश नहीं चलेगी। वही होगा जो कानून बोलता है, जो होना चाहिये। अब प्रशासन की तूती बोलेगी। जब तक आचार संहिता लगी रहेगी, सरकारी तंत्र, लोकतंत्र पर भारी पड़ेगा। बाबू साहबों के पास...

  • बहस: उपेक्षित गंगापुत्र और राजनीति की बिसात पर गंगा

    2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब नरेन्द्र मोदी पहली बार चुनाव प्रचार हेतु बनारस पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं गंगा का बेटा हूँ, माँ गंगा ने मुझे बुलाया है तो मानों ऐसा महसूस हुआ मानो किसी दृढ निश्चयी संत ने काशी की पावन भूमि पर कदम रखा हो और वर्षों से उपेक्षित गंगा का कायाकल्प होना अब ज्यादा दूर...

  • विश्लेषण: गुजरात से क्यों भगाए गए उत्तर भारतीय

    देश का संविधान जाति, धर्म, भाषा, राज्य या फिर समुदाय के आधार पर किसी के साथ भेदभाव की इजाजत नहीं देता। संविधान हमें पूरा हक देता है कि हम अपने मूल अधिकार के साथ पूरे भारत में किसी भी स्थान पर बस सकते हैं (जम्मू- कश्मीर को छोड़ कर) और अपनी रोजी रोटी कमा सकते हैं। चाहे वह मुम्बई हो, गुजरात या फिर...

  • राष्ट्ररंग: विवाद नहीं, विकास के ध्वजवाहक हैं प्रवासी

    महर्षि वेदव्यास महाभारत के स्वर्गारोहण पर्व में कहते हैं- ऊर्ध्वबाहुर्विरौम्येष न च कश्चिच्छृणोति मे। धर्मादर्थश्च कामश्च स किमर्थ न सेव्यते। अर्थात् मैं अपने दोनों हाथ उठाकर कह रहा हूं लेकिन मेरी बात कोई नहीं सुनता। धर्म से ही अर्थ और काम हैं तो धर्म का पालन क्यों नहीं करते? आज भी स्थिति लगभग वही...

  • मुद्दा: देश में खुले सफाई प्रशिक्षण केन्द्र

    गत दिनों दिल्ली के कैपिटल ग्रीन डीएलएफ अपार्टमेंट में सीवर की सफाई करते हुए पांच लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह दिल्ली के घिटोरनी इलाके के सीवर में काम करते हुए चार लोगों की मौत हुई थी। 6 अगस्त 2017 को लाजपत नगर में दो जनों की दम घुटने से जान चली गई थी। वहीं 21 अगस्त 2017 को दिल्ली में ऋषिपाल की भी...

  • आर्थिक चर्चा: गन्ना ही बोएंगे चाहे जलाना ही क्यों न पड़े?

    अर्थशास्त्र का सामान्य नियम है कि जब किसी वस्तु की पूर्ति मांग की तुलना में बढ़ जाती है तो बाजार में वह वस्तु न केवल सस्ती हो जाती है अपितु उसका उपयोग न होने के कारण उस उत्पाद को जलाना पड़ता है अथवा समुन्द्र में डुबो देना पड़ता है। कुछ देशों में अधिक उत्पादित हुए गेहूं को भी समुन्द्र में डुबो दिया...

  • राजनीति: परिणाम साफ कर देंगे 2019 की तस्वीर

    चुनाव आयोग द्वारा मुकर्रर ग्यारह दिसंबर की तारीख 2019 के आम चुनाव की तस्वीर साफ करेगी। इस दिन पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट घोषित होंगे। आगामी लोकसभा चुनाव के चंद महीने पहले होने वाले इन सियासी अखाड़े को सेमीफाइनल के तौर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की...

  • राजनीति: देख तुम्हारी उछल-कूद....

    म०प्र० के चुनावी दौरे पर आये राहुल गांधी गत दिनों चित्रकूट धाम भी पहुंचे । वहां उन्होंने एक श्रद्धालु हिन्दू जैसे कामतानाथ के दर्शन किये और मंदिर के पुजारियों तक से भी भेंट की। इसके चलते कांग्रेसियों ने उन्हें बतौर रामभक्त प्रचारित किया। इसके पहले राहुल कैलाश मानसरोवर यात्र पर गये थे, तब कांग्रेस...

  • पास पड़ोस: संयुक्त राष्ट्र में बेनकाब हुआ पाक का नापाक चेहरा

    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर जम कर हमला बोला। उन्होंने अपने भाषण में ओसामा बिन लादेन से लेकर हाफिज सईद तक के पाकिस्तान के साथ संबंधों का जिक्र किया। भारत ने एक बार फिर विश्व बिरादरी के सामने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर बेनकाब किया है।...

  • मुद्दा: जनता के धन को नेताओं पर उड़ा रही है सरकार

    हाल ही में मध्य प्रदेश में नीमच के रहने वाले एक आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार के तहत लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय से अलग-अलग जानकारी प्राप्त की है। पिछले चार वर्षों में लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के वेतन और भत्तों पर सरकारी खजाने के 19.97 अरब रुपये की भारी-भरकम रकम खर्च की गई।...

  • बहस: पुलिस को सभ्य नागरिक बनने का प्रशिक्षण मिले

    खबर है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अपने सिपाहियों को शिष्टाचार की ट्रेनिंग देगी, खास कर लखनऊ में। विवेक तिवारी की हत्या और उस के बाद हत्यारे सिपाही के पक्ष में गोलबंद हो रही पुलिस की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की गरज से यह सब हो रहा है कि पुलिस बगावती हो कर आंदोलन पर न आमादा हो जाए। फिर भी यह कोई नई कवायद...

  • बहस :सामाजिक और संवैधानिक नैतिकता में छिड़ा द्वंद्व

    रूढ़ हो चुकी सामाजिक धारणाओं व नैतिकता के खिलाफ जाकर समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला कई स्तरों पर झकझोरने वाला है। पहला तो यह कि देश बहुसंख्यक धारणाओं से नहीं, संविधान से संचालित होगा। दूसरा यह कि नैतिकता के आधार पर किसी के मौलिक अधिकारों (निजता के...

Share it
Top