Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • सत्यमेव जयते

    मुझे कभी कभी अपनी प्रथम कक्षा की वह घटना याद आती है जब मेरी माताजी ने मुझे कुछ पैसे एक कापी खरीदने के लिए दिये थे। मैं उन पैसों से एक लॉलीपाप खरीद लाई और मां से झूठ बोल दिया कि पैसे खो गए लेकिन उसी समय घर में हास्यपूर्ण वार्तालाप चल रही थी और जैसे ही मैं जोर से हंसी तो मेरी मां को मेरी लालीपाप जैसी...

  • मुद्दा: बाल अपराध रोकने में नजीर साबित होगा मृृत्युदंड कानून

    चाइल्ड क्राइम के बढ़ते मामले चिंतित हैरान कर रहे हैं। रोकने के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर तमाम तरह के प्रयास भी हो रहे हैं लेकिन समस्या घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। बाल अपराधों पर अंकुश लगाने के मकसद से संसद में पॉस्को संशोधन विधेयक पारित हो गया। पूर्व में बने कानून को और धार देने के लिए...

  • विश्लेषण: मुंबई हादसे के दोषियों को मिले सजा

    मुंबई के डोंगरी इलाके में 100 साल पुरानी इमारत गिरने से जहां 12 लोगों की मौत हो गई, वहीं 30 से अधिक लोग मलबे में दब गए। राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने तक मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी। मुंबई में इस तरह का हादसा कोई पहली बार नहीं हुआ। बारिश के दौरान सिस्टम के नकारापन की वजह से सैंकड़ों लोगों की...

  • आओ लौट चलें : अब न ही अखाड़े रहे, न ही नाग पंचमी पर तेल लगाने के लिए बची हैं लाठियां

    लखनऊ। सावन माह के शुरू होते ही गांवों के अखाड़ों में मिट्टी डालकर सुबह से ही युवा तैयारी शुरू कर देते। बरगत्ता, कबड्डी खेलने के लिए सब लोग तैयार हो जाते। इसका कारण था, नाग पंचमी पर होने वाली कुश्ती प्रतियोगिता की तैयारी के लिए हर परिवार कमर कस लेता था। हर परिवार में एक पहलवान होता था, जिसे...

  • देव-मूर्तियों पर दान का अंबार?

    पिछले कुछ वर्षों में प्रसिद्ध मंदिरों और आश्रमों में करोड़ों-अरबों रुपयों के सालाना चढ़ावे के समाचार प्रकाशित होते आ रहे हैं। दानदाताओं द्वारा बहुमूल्य धातुओं के छत्र, द्वार, घंट और आभूषण भी आस्थालयों में अर्पित किए जाते रहे हैं। यह निश्चय ही ईश-आस्था का प्रमाण है। मंदिरों-आश्रमों को ज्ञात और...

  • विश्लेषण: भयंकर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है भारत

    नरम घरेलू उपभोग, स्थायी निवेश में धीमी वृद्धि तथा सुस्त निर्यात के कारण 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सुस्त पडऩे के संकेत मिल रहे हैं। यह बात वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताई गई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने फरवरी महीने में 2018-19 की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7.20...

  • कागज की नाव पर सवार कर्नाटक की सरकार

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का हालिया बयान कि वे कांग्रेस की कृपा से मुख्यमंत्री हैं, कई मायनों में खास है। इस बयान से कर्नाटक की राजनीतिक उथल-पुथल, सांठ-गांठ और बेमेल गठजोड़ को भली भांति समझा जा सकता है। कुमारस्वामी ने यह बयान देने के बाद सफाई भी पेश की लेकिन जाने-अनजाने ही सही, कुमारस्वामी...

  • जरदारी की गिरफ्तारी के निहितार्थ

    पाकिस्तान की अंदरूनी घटनाएं अब चौंकाती नहीं, बल्कि वहां कुछ नाटकीय न हो, तो यह जरूर चकित करता है। पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मनी लॉन्ड्रिंग के केस में नेशनल अकाउंंटिबिलिटी ब्यूरो (नैब) द्वारा गिरफ्तारी कानूनी कवायद से ज्यादा पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत से प्रेरित है। जरदारी को जिस मामले...

  • आर्थिक गतिशीलता से लक्ष्य संभव

    नरेन्द्र मोदी द्वारा दोबारा प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद आर्थिक मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था में गतिशीलता की संभावनाएं बढ़ी हैं। अर्थ विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत में नयी सरकार मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर, बैंकिंग सेक्टर, कार्पोरेट सेक्टर, निर्यात, ई-कॉमर्स, ग्रामीण विकास, भूमि एवं श्रम...

  • विश्लेषण: जीत प्रत्याशी की नहीं, देश में लोकतंत्र की ही होगी

    इस बार देश लोकतंत्र का (17) सत्तरहवां महापर्व मना रहा है। देश में लोकसभा का चुनाव हो रहा है। इस महापर्व का प्रथम चरण समाप्त हो चुका है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसके चुनाव और चुनाव प्रक्रि याओं पर विश्व की नजर लगी रहती है। जिस तरह बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के सामान्यत: इतने बड़े देश...

  • राजनीति: बेनीवाल को अपने पाले में लाकर भाजपा ने बड़े नुकसान से बचा लिया?

    भाजपा ने राजस्थान में कांग्रेस को पछाड़ कर हनुमान बेनीवाल का साथ हासिल कर लिया है। अंत तक सूचनाएं हवा में तैर रही थीं कि बेनीवाल की आरएलपी और कांग्रेस में बातचीत चल रही है। दोनों में गठबंधन की खबर किसी भी क्षण आ सकती है लेकिन हुआ एकदम उलटा। आरएलपी अब राजस्थान से एनडीए का हिस्सा बन गई है। इसी गठबंधन...

  • क्या सुमित्रा खुद ही जिम्मेदार: राजनीति से यूं तकलीफदेह रवानगी के लिए

    सत्ता का सुख बड़ा ही बेहूदा होता है। इसका लालच भी हद दर्जे का होता है। जब सत्ता का सुख अपने हाथ से जाते दिखे तो तमाम ढोंग रचने पड़ते हैं यानी इसको बचाने के लिए साम-दाम-दंड भेद के साथ ही प्रेशर पोलिटिक्स भी करना पड़े तो हया किस बात की। वैसे भी अब राजनीति में सुचिता, आत्म सम्मान का क्या काम। गर...

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