Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • राजनीति: ओवर कान्फिडेंस के रथ पर अखिलेश-मायावती

    हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों ने जहां विपक्ष को ऊर्जा दी है वहीं कुछ विपक्षी पार्टियां ऐसी भी हैं, जिनके माथे पर इससे शिकन भी आई है। हिंदी हार्टलैंड के 3 राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव परिणामों में कांग्रेस के सरकार गठन के बाद यूपी की विपक्षी-राजनीति कुछ इसी कारण से उलझ...

  • विश्लेषण: मोदी जी जरा संभलना.......

    राजनीति में समय कभी भी एक समान नहीं होता है। आज से चार बरस पहले मोदी की जो लहर दिखाई दे रही थी अब वह हवा वैसी नहीं रही है। 2019 आते -आते मोदी को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, वह भी इससे अनभिज्ञ हैं। हाल के दिनों में मोदी सरकार को लेकर सहयोगी दलों में गठबंधन को लेकर जो स्थिति निर्मित हुई...

  • बहस: मराठों को आरक्षण की पहल

    आखिरकार एक लंबे संघर्ष के बाद महाराष्ट्र में मराठाओं ने आरक्षण पाने का रास्ता बना ही लिया। राज्य की फडणवीस सरकार ने मराठों के आरक्षण को लेकर बीते दिनों विधानसभा के पटल पर प्रस्ताव रखा और कुछ ही देर में यह बिल पास भी कर दिया गया। इस फैसले के जरिए बीजेपी सरकार ने साबित कर दिया है कि किसी खास समुदाय...

  • राजनीति: बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की सुगबुगाहट

    इन दिनों बिहार की राजनीति में जबरदस्त गहमा-गहमी है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के तीन घटक दल आपस में भी उलझे हुए हैं। मसलन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता एवं नरेन्द्र मोदी सरकार के केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा लगातार हमलावर रूख अपनाए हुए हैं हालांकि वे भारतीय जनता पार्टी...

  • विश्लेषण: गंभीर होती नक्सलवाद की चुनौती

    नक्सली हिंसा किसी भी स्तर पर आतंकवाद से कम नहीं है। साठ के दशक में आदिवासियों और भूमिहीन किसानों के लिए यह आंदोलन शुरू किया गया होगा लेकिन वे खाली हाथ जमातें आज भी भूमि और जंगलात के अधिकारों के लिए दिल्ली की ओर देखती हैं। नक्सलवाद ने आदिवासियों को हथियारबंद हमलावर तो बना दिया लेकिन गरीब आदमी...

  • विश्लेषण: आधी आबादी के साथ अन्याय

    दुनिया की जनसंख्या में आधी आबादी महिलाओं की है। दुनिया के प्रत्येक देश में इन की दशा व दिशा में भिन्नता है। परिस्थितियां व परिवेश सहित परंपरागत मान्यताओं से यह प्रभावित होती है। इन सब के बावजूद भारतीय समाज में नारी की दुर्दशा चिंतनीय है। चिंतनीय इस अर्थ में क्योंकि हम जगत गुरु हैं। चिंता इस अर्थ...

  • राष्ट्ररंग: कुपोषण और मोटापे की दोहरी मार झेल रहा भारत

    किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन होता है। जिस देश के पास जितनी अधिक कार्यकारी मानव शक्ति होती है, उसकी अर्थव्यवस्था उतनी ही तेज गति से कुलांचे भरती है। भारत को उसकी इसी खूबी का लाभ मिलता रहा है। अब सोचिए, अगर देश से कुपोषण को खत्म कर दिया गया होता तो उसके मानव संसाधन से मिल रहा...

  • क्या यू.पी. की कायाकल्प कर पायेगें योगी जी?

    यूपी पिछले कई साल बाद भाजपा के योगी राज के सानिध्य में आया। आरम्भ से ही भ्रष्टाचार व अपराध के दमन के लिए भाजपा को माना जाता है। अब यूपी में भाजपा की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में है। जब उन्होंने यूपी की कमान संभाली तो चीख-चीख कर खुलेआम कहा कि अपराधी व भ्रष्टाचारी यूपी को छोड दे नहीं तो परिणाम...

  • राजनीति: राहुल गांधी कांग्रेस के बहादुरशाह जफर

    भाजपा के प्रवक्ता अक्सर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर से करते हैं। यह उनकी प्रवंचना या टीवी डिबेट जीतने की शैली हो सकती है परंतु जफर केवल मुगलिया सल्तनत के पतन के ही नहीं बल्कि कमजोर नेतृत्व के भी ऐतिहासिक प्रतीक कहे जा सकते हैं। तख्त पर वे अवश्य बैठे थे...

  • विश्लेषण: रक्षा व सैन्य प्रतिष्ठानों में फैलता पाक जासूसों का जाल

    देश के रक्षा और सैन्य प्रतिष्ठानों में पाकिस्तानी जासूसों का जाल जिस कदर फैलता जा रहा है, वह बेहद चिंता का विषय है। सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि न केवल सेना के जवान बल्कि अब तो सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों के बड़े-बड़े अधिकारी, वैज्ञानिक और यहां तक कि राजनयिक भी देश के साथ गद्दारी करते पकड़े जा...

  • व्यंग्य: आचार संहिता लग गई, अब सब आदर्श ही होगा

    लो फिर लग गई आचार संहिता। अब महीने दो महीने सारे सरकारी काम काज नियम कायदे से ही होंगे। पूरी छान बीन के बाद। नेताओं की सिफारिश नहीं चलेगी। वही होगा जो कानून बोलता है, जो होना चाहिये। अब प्रशासन की तूती बोलेगी। जब तक आचार संहिता लगी रहेगी, सरकारी तंत्र, लोकतंत्र पर भारी पड़ेगा। बाबू साहबों के पास...

  • बहस: उपेक्षित गंगापुत्र और राजनीति की बिसात पर गंगा

    2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब नरेन्द्र मोदी पहली बार चुनाव प्रचार हेतु बनारस पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं गंगा का बेटा हूँ, माँ गंगा ने मुझे बुलाया है तो मानों ऐसा महसूस हुआ मानो किसी दृढ निश्चयी संत ने काशी की पावन भूमि पर कदम रखा हो और वर्षों से उपेक्षित गंगा का कायाकल्प होना अब ज्यादा दूर...

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