Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • समाधान: बाढ़ से बचाव के लिये नदियां गहरी की जाएं

    पानी जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। सारी सभ्यताएं नैसर्गिक जल स्रोतों के तटों पर ही विकसित हुई हैं। बढ़ती आबादी के दबाव में तथा औद्योगिकीकरण से पानी की मांग बढ़ती ही जा रही है। इसलिये भूजल का अंधाधुंध दोहन हो रहा है और परिणाम स्वरूप जमीन के अंदर पानी के स्तर में लगातार गिरावट होती जा रही है। नदियों...

  • राष्ट्ररंग: पंजाब, हवन करें पर हाथ बचा कर

    विगत सप्ताह अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित 'हाओडी मोदी' कार्यक्रम से पहले सिख संगठनों से मिलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास दिलवाया कि वे जल्द ही उन्हें सरप्राइज देंगे। इस घोषणा के कुछ दिन बाद ही केंद्र सरकार ने 312 सिख अलगाववादियों व आतंकियों के नाम काली सूची से हटा दिए और पूर्व...

  • मुद्दा: परमाणु हथियारों से भी बड़ा खतरा है प्लास्टिक से

    कभी जीवन को सरल बनाने के लिए ईजाद किया गया प्लास्टिक आज इंसानों की मुसीबत बन गया है। हवा में, पानी में, जमीन में मौजूद यह प्लास्टिक हमारी रगों तक पहुंच रहा है। इसके विषैले और कैंसरकारक तत्व जीवन को सभी जगह प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे हैं। धरती पर विचर रहे इंसानों और जानवरों के शरीर में...

  • विश्लेषण: सौर ऊर्जा...विकास की अनंत संभावनाएं

    सौर ऊर्जा वह ऊर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है। सौर ऊर्जा ही मौसम एवं जलवायु का परिवर्तन करती है। यही धरती पर सभी प्रकार के जीवन (पेड़-पौधे और जीव-जन्तु) का सहारा है। वैसे तो सौर ऊर्जा को विविध प्रकार से प्रयोग किया जाता है किन्तु सूर्य की ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने को ही मुख्य...

  • इन तकनीकी क्षेत्रों में हैं अच्छे अवसर

    आज के उच्च तकनीकी युग में इन क्षेत्रों में योग्य उम्मीदवारों के लिए कई अवसर हैं। नैनो-टेक्नोलॉजी: 12वीं के बाद नैनो टेक्नोलॉजी में बीएससी या बीटेक और उसके बाद इसी विषय में एमएससी या एमटेक करके इस क्षेत्र में शानदार करियर बनाया जा सकता है। इसके अलावा कॉस्मोलॉजी, स्टेलर साइंस, प्लैनेटरी साइंस,...

  • सत्यमेव जयते

    मुझे कभी कभी अपनी प्रथम कक्षा की वह घटना याद आती है जब मेरी माताजी ने मुझे कुछ पैसे एक कापी खरीदने के लिए दिये थे। मैं उन पैसों से एक लॉलीपाप खरीद लाई और मां से झूठ बोल दिया कि पैसे खो गए लेकिन उसी समय घर में हास्यपूर्ण वार्तालाप चल रही थी और जैसे ही मैं जोर से हंसी तो मेरी मां को मेरी लालीपाप जैसी...

  • मुद्दा: बाल अपराध रोकने में नजीर साबित होगा मृृत्युदंड कानून

    चाइल्ड क्राइम के बढ़ते मामले चिंतित हैरान कर रहे हैं। रोकने के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर तमाम तरह के प्रयास भी हो रहे हैं लेकिन समस्या घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। बाल अपराधों पर अंकुश लगाने के मकसद से संसद में पॉस्को संशोधन विधेयक पारित हो गया। पूर्व में बने कानून को और धार देने के लिए...

  • विश्लेषण: मुंबई हादसे के दोषियों को मिले सजा

    मुंबई के डोंगरी इलाके में 100 साल पुरानी इमारत गिरने से जहां 12 लोगों की मौत हो गई, वहीं 30 से अधिक लोग मलबे में दब गए। राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने तक मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी। मुंबई में इस तरह का हादसा कोई पहली बार नहीं हुआ। बारिश के दौरान सिस्टम के नकारापन की वजह से सैंकड़ों लोगों की...

  • आओ लौट चलें : अब न ही अखाड़े रहे, न ही नाग पंचमी पर तेल लगाने के लिए बची हैं लाठियां

    लखनऊ। सावन माह के शुरू होते ही गांवों के अखाड़ों में मिट्टी डालकर सुबह से ही युवा तैयारी शुरू कर देते। बरगत्ता, कबड्डी खेलने के लिए सब लोग तैयार हो जाते। इसका कारण था, नाग पंचमी पर होने वाली कुश्ती प्रतियोगिता की तैयारी के लिए हर परिवार कमर कस लेता था। हर परिवार में एक पहलवान होता था, जिसे...

  • देव-मूर्तियों पर दान का अंबार?

    पिछले कुछ वर्षों में प्रसिद्ध मंदिरों और आश्रमों में करोड़ों-अरबों रुपयों के सालाना चढ़ावे के समाचार प्रकाशित होते आ रहे हैं। दानदाताओं द्वारा बहुमूल्य धातुओं के छत्र, द्वार, घंट और आभूषण भी आस्थालयों में अर्पित किए जाते रहे हैं। यह निश्चय ही ईश-आस्था का प्रमाण है। मंदिरों-आश्रमों को ज्ञात और...

  • विश्लेषण: भयंकर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है भारत

    नरम घरेलू उपभोग, स्थायी निवेश में धीमी वृद्धि तथा सुस्त निर्यात के कारण 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सुस्त पडऩे के संकेत मिल रहे हैं। यह बात वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताई गई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने फरवरी महीने में 2018-19 की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7.20...

  • कागज की नाव पर सवार कर्नाटक की सरकार

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का हालिया बयान कि वे कांग्रेस की कृपा से मुख्यमंत्री हैं, कई मायनों में खास है। इस बयान से कर्नाटक की राजनीतिक उथल-पुथल, सांठ-गांठ और बेमेल गठजोड़ को भली भांति समझा जा सकता है। कुमारस्वामी ने यह बयान देने के बाद सफाई भी पेश की लेकिन जाने-अनजाने ही सही, कुमारस्वामी...

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