Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • राजनीति: बंगाल की दुर्दशा के लिए दोषी कौन?

    26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया पश्चिम बंगाल राज्य स्वतंत्रता के 71 वर्ष पश्चात आज भी अपनी दुर्दशा के लिए रो रहा है जबकि उस समय एवं उसके वर्षों पश्चात तक देश में अस्तित्व में आने वाले समस्त राज्य विकास, उन्नति एवं प्रगति के मामले में नित नई ऊंचाइयां तय कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या, क्यों एवं कैसे...

  • विश्लेषण: देश ने बढ़ाई विदेश में अपनी साख

    वर्ष 2014 के आम चुनाव प्रचार में नरेन्द्र मोदी ने कभी-कभार पाकिस्तान का जिक्र जरूर किया लेकिन देश की विदेश नीति को लेकर उन्होंने कोई खास टीका-टिप्पणी नहीं की। सत्ता संभालने के साथ ही मोदी के तेवर दूसरे थे। अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशिया के सभी देशों के प्रमुखों को आमंत्रित कर उन्होंने इस...

  • फारूख अब्दुल्ला द्वारा भारत माता की जय

    फारुख अब्दुल्ला द्वारा भारत माता की जय बोलने पर उन के साथ हुई अभद्रता और धक्का-मुक्की पर पढ़े-लिखे लेकिन बंद दिमाग वाले मुस्लिम समाज और वामपंथी समाज की गहरी खामोशी पर मुझे कुछ नहीं कहना। इसलिए भी कि हमारे देश में वामपंथी समाज और मुस्लिम समाज दोनों ही एक बंद समाज हैं। इन से भला क्या कहना , क्या...

  • राजनीति: बूढ़ी कांग्रेस...राहुल का मुकुट बचाने की कवायद!

    अपनी 133 जयंतियां मना चुके और स्वतंत्रता संग्राम के नेतृत्व का दावा करने वाले देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में नया बदलाव किया गया है। वैसे तो यह बदलाव केवल समाचार पत्रों के कालमों तक ही सीमित रहने के योग्य है परंतु इसके पीछे नेहरु-गांधी परिवार में राजनीतिक असुरक्षा की बढ़ती भावना और...

  • राष्ट्ररंग: विधेयक बन जाने भर से घूसखोरी से मुक्ति नहीं मिलेगी

    कोई घूस देकर काम करा लेता है तो कोई नियम-कानून की दुहाई देता फिरता है और बेचारा परेशान रहता है। आलम यह है कि घूस देना और लेना स्थायी भाव सरीखा हो गया है। हम सबको बिलकुल भी गैर जायज-असहज नहीं लगती यह बुराई। इसी मानसिकता से उबरना है। बुरा लगना चाहिए। हाल ही में भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक-2018...

  • मुद्दा: माब लिंचिंग - कौन है जिम्मेदार, क्या है समाधान

    आज के समय में हत्यारी भीड़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। न यह प्राकृतिक आपदा है और न दैवीय विधान बल्कि विशुद्ध रूप से मानव जनित सोची - समझी चाल के तहत अपने लिए भीड़ जुटाना और इस्तेमाल करना है जिसमें एक या एकाधिक निर्दोष लोग अकारण हताहत हो जाते हैं। माब लिंचिंग जिसको हिन्दी में भीड़ हत्या या...

  • तोडऩा होगा गरीबी का मकडज़ाल

    भारत गांव में रहता है। जो अनपढ़ है, आधुनिकता रहित है, साधनहीन है, महत्त्वाकांक्षी नहीं है, आज केवल वही गांवों में रहता है। जो उन्नति करना चाहता है, कुछ कर दिखाना चाहता है, उसे गांव छोड़कर शहर की तरफ भागना पड़ता है। सफलता उसे तभी मिलती है जब गांव छोड़ देता है। प्रत्येक परिवार के जो सदस्य गांव के...

  • विश्लेषण: सर्जिकल स्ट्राइक भाजपा की एक अनुपम रणनीति

    सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पचास तरह के अनुमान और व्याख्याएं हो सकती हैं। लोग अपने अपने हित के गणित के अनुसार कर भी रहे हैं, की जानी भी चाहिए क्योंकि राजनैतिक गुणावगुणों के अनुसार सारे राजनैतिक दल अपने अपने हितों के अनुसार इसकी व्याख्या करेंगे। एक स्वस्थ प्रजातंत्र के लिए यह आवश्यक भी...

Share it
Share it
Share it
Top