Read latest updates about "कविता" - Page 1

  • कविता

    वीर बांकुरों बढ़कर तोड़ो दुश्मन का भरम वन्दे मातरम, वन्दे मातरम... बुरी नजर दुश्मन की सीमा पर न कभी पडने देना नहीं दूब आतंकी पावन माटी में जमने देना रौंद-रौंद कर पैरों से तुम करते रहो खत्म वन्दे मातरम, वन्दे मातरम... दुश्मन की तोपों का रूख फौलादी सीनों से मोड़ो बुरे इरादों वाले चक्रव्यूह को...

  • शान मेरी तुम कहां हो

    घर का हर हिस्सा धड़कता है, तुम्हारी निरुपम मुस्कान में दिल की बाती जल गई दिये के तेल में, आग मेरी तुम कहां हो सांस क्षण-क्षण दहकती है तुम्हारी याद में, विरह की आग में तेरी अंधेरे भी उजाला मांगते हैं तुम से, अरमान मेरी तुम कहां हो यह घर के दीप हैं, दीवार और खिड़की, रंगोली है , मन के पुष्प भी...

  • कविताः छटा हिन्द की

    बदल गई है छटा हिन्द की, खुद को लज्जित पायेगा। सामाजिक पिंजरे में पीड़ित, हंस ना मोती पायेगा।। मन दर्पण तेरा धूमिल लगता, करता है ताक झांक यहां, घर शीशे के बावजूद भी, पत्थर फेंक रहा है यहां। टुकड़ा एक दिन पत्थर का, जब तेरे घर पर आयेगा, कंचन कोमल सी कलिया की, नींद उड़ा ले जायेगा। कलियों का आसन छूटेगा,...

  • कविता: भारत

    हैं एक अरब इंसान। अपना भारत देश महान।। हैं मन्दिर-मस्जिद-गुरूद्वारा, प्यारा-प्यारा गिरिजाघर। है प्यारी-न्यारी भाषाएं, हर पांच कोस पर बदले स्वर।। पढ़ते बाइबिल, वेद-कुरान, हैं एक अरब इंसान। अपना भारत देश महान।।1।। हैं गंगा जी और जमुना जी, है ताजमहल बड़ा अजूबा। बस प्रीति की रीति यहां फैली, ...

  • कविता: दुमुंहे नेता

    दुमुंहे सांप ही नहीं इंसान भी होते हैं।, बल्कि सांपों से अधिक इंसान ही होते हैं ऐसे इंसान विषधरों से कहीं अधिक खतरनाक भी होते हैं! मुंह पर ठकुरसुहाती पीठ पीछे बुराई करते हैं ऐसा दोगलापन करते जरा भी नहीं ठिठकते हैं ऐसे दुमुंहे हर जगह हर समय हर समूह में मिल जाते हैं अपनी इस कमीनी हरकत को...

  • कविता पानी

    बरखा-रानी, बरखा-रानी।देखो बरसा कितना पानी।। बादल भैय्या उमड़-घुमड़कर, बरस गये हैं खूब। जिधर देखिये कीचड़-कीचड़, नहीं खिली है धूप।। धरती हो गई धानी। देखो बरसा कितना पानी।।1।। जल से देखो भर गये, सारे ताल तलैया।। नदी-नहरें-नाले सारे, भूखी-सूखी गैया।। भीगे राजा-रानी। देखो बरसा कितना...

  • बाल कविता: बचपन की गुल्लक

    छोटे छोटे सिक्के जोड़े लम्हों के, कुछ यादों के बचपन की गुल्लक में जोड़े किस्से कच्चे वादों के स्कूल की घंटी मास्टर की सँटी पुकम पुकाई दूध मलाई दोस्त की पेंसिल टूटी साइकिल घिसे पिटे से झूठ बहाने पिटठू, पाली, आँख मिचोली चूरन, चटनी, खट्टी गोली सुनी-सुनाई भूत कहानी लाड़ लुटाती...

  • कविता: एक कप कॉफी

    आईये पियेंगे एक कप कॉफी कभी भी जब कोई ऑफर करे कॉफी कर देना हां और रख लेना उसका मान क्योंकि सिर्फ कॉफी पिलाना ही मकसद नहीं उसका वो बैठना चाहता है तुम्हारे साथ बिताना चाहता है प्यार के दो पल तुमसे बाते करते हुए कुछ अपनी कहते हुए कुछ तुम्हारी सुनते हुए वो खोलना चाहता है दिल की कोई गिरह...

  • कविताः सहनशीलता

    घर परिवार बगीचा जानो हम हैं बागवान यह मानो माना खरपतवार बहुत है पिफर भी पफूल खिलाना जानो पफूल संग शूलों के रहते उनसे सहनशीलता जानो टेढ़ी मेढ़ी पगडंडी पर कैसे पड़े संभलना जानो टूटे फूल फेक मत देना उनका हार बनाना जानो तूफां भी आया करते हैं उसकी चाल बदलना जानो वो भी क्यारी भर देता है जिसको...

  • गणपति प्रतिमाएं

    समय के साथ पुराने रीति रिवाज परम्पराएं बदलती जाती हैं। नई पीढ़ी नए विचारों से नई नई रस्में रीत रिवाज चलाती है। कुछ परिस्थितियों वश होता है कुछ हालात की मजबूरी होती है. न जाने कब से गणेश प्रतिमाएं पुराने ढंग से बनती चली आई हैं विसर्जन के उपरांत जलाशयों में उनकी दुर्दशा हमेशा देखने में आई है...

  • चिट्ठियां

    चिट्ठियां-चिट्ठियां प्यारी सी चिट्ठियां! प्रीत के रंग में ये रंगी चिट्ठियां.... रखती दिल छुपा के ये राज कई! प्रेम की चाशनी में पगी चिट्ठियां।। पोस्ट कार्ड बनकर जब आती हैं ये... भेद सबको, सभी का बताती हैं ये! बंद लिफाफे में आये मुस्कुराती हुई! तीन अक्षरों से ये सजी चिट्ठियां।। लाती मायके की...

  • कविताः मुस्कुराहट

    मुस्कुराहट पे तेरी, वारि-वारि जाऊं मैं ओ मेरे लाल हर बुरी नजर से बचाऊं मैं।। तुझे सिन्चू संस्कार के खाद-पानी से मेरे काजल से टीका काला लगाऊं मैं।। तू बनेगा प्रहरी एक दिन देश का अपने मां भारती के चरणों में आ झुकाऊं मैं।। कभी झुकने न देना तू तिरंगे को सुन आ तुझे देश भक्ति का पाठ पढ़ाऊं...

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