Read latest updates about "कविता"

  • बाल कविता: खाना-खाना

    सोच कर देखें कि आप खाना खाते हैं या निगलते हैं ?कई लोग जल्दी जल्दी खाते हैंवे खाना खाते नहीं, भकोसते हैं.खाना खाने का भी एक सलीका हैहर कौर को 32 बार चबाना है.जल्दी जल्दी खाने से वजऩ बढ़ता है।शरीर कई रोगों का शिकार होता है।मनुष्य भोजन का स्वाद नहीं ले पाता।न ही वह खाने का आनन्द उठाता है।वह तो...

  • मैं एक नारी हुँ प्रेम चाहती हूँ और कुछ नही…..

    मैं एक नारी हुँ प्रेम चाहती हूँ और कुछ नही….. मैं एक नारी हूँ,मैं सब संभाल लेती हूँहर मुश्किल से खुद को उबार लेती हूँनहीं मिलता वक्त घर गृहस्थी मेंफिर भी अपने लिए वक्त निकाल लेती हूँटूटी होती हूँ अन्दर से कई बार मैंपर सबकी खुशी के लिए मुस्कुरा लेती हूँगलत ना होके भी ठहराई जाती हूँ गलतघर की श...

  • कलम, आज उनकी जय बोल..

    कलम, आज उनकी जय बोल | जो अगणित लघु दीप हमारे,तूफ़ानों में एक किनारे,जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन,मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल।कलम, आज उनकी जय बोल।पीकर जिनकी लाल शिखाएं,उगल रही सौ लपट दिशाएं,जिनके सिंहनाद से सहमी,धरती रही अभी तक डोल।कलम, आज उनकी जय बोल।अंधा चकाचौंध का मारा,क्या जाने इतिहास बेचारा,साखी ...

  • कविताः पिता :- कन्यादान नहीं करूंगा जाओ

    पिता :- कन्यादान नहीं करूंगा जाओ , मैं नहीं मानता इसे , क्योंकि मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं ,जिसको दान में दे दूँ ; मैं बांधता हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में , पति के साथ मिलकर निभाना तुम , मैं तुम्हें अलविदा...

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