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  • बाल कथा: बुद्धिमान मैना

    दिसंबर का महीना था। सांझ घिर आई थी। आकाश में घने काले बादल छाये हुए थे। शरीर को कंपा देने वाली ठंडी ठंडी तेज़ हवा चल रही थी। बिजली रह रहकर कड़कती और आसमान गरजने लगता था। ऐसे आसार बन रहे थे कि जोर से बारिश आयेगी और ओले पडंगे। उसी समय एक मैना अपने दो छोटे छोटे बच्चों को साथ लेकर, दाने-पानी की खोज...

  • बाल कहानी: मेरी बला से

    जंगल में एक हरा-भरा पेड़ था। उसकी आंखों से आंसू टपक रहे थे। पेड़ के आंसुओं को देखकर उड़ते हुए गरूड़ पक्षी ने पेड़ से पूछा, 'अरे मित्र, तुम रो क्यों रहे हो ? क्या मैं तुम्हारी कुछ सहायता करूं ? पेड़ बोला, 'भाई गरूड़, जंगल में सभी वृक्षों पर घोंसले हैं जिनमें छोटे-छोटे बच्चों की चहचहाहट है पर मेरी...

  • बाल कहानी: जूते के आविष्कार की कहानी

    आजकल हम अपने पैर की सुरक्षा के लिये कवच के रूप में जूते का प्रयोग करते हैं लेकिन क्या कभी हमने इसके निर्माण या आविष्कार पर ध्यान दिया है। उत्तर आयेगा नहीं लेकिन जूते की खोज भी आश्चर्यनक है। जूतों का निर्माण सबसे पहले मिश्र में हुआ था। इन जूतों का तला किसी चमड़े का या पानी में पाये जानेवाले एक खास...

  • बाल कहानी: प्यासा पपीहा

    'पिऊ-पिऊ' की विशेष आवाज निकालने वाले पक्षी पपीहे से प्राय: सभी सुपरिचित हैं। इसी पक्षी के बारे में यह मान्यता प्रचलित है कि वह अपनी प्यास पृथ्वी पर विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जल से नहीं बल्कि स्वाति नक्षत्र की बूंदों को सीधे अपनी चोंच में लेकर बुझाता है और इसी कारण बारिश होने से पूर्व इसे अपनी चोंच...

  • बाल कहानी: आप मंच पर बोलने से घबराते हैं?

    अक्सर दस में से नौ लोग मंच पर जाते ही लडख़ड़ाने लगते हैं। उनकी सांस फूल जाती है और रटा-रटाया भाषण कंठ से बाहर नहीं निकल पाता। कई बार तो रक्तचाप खतरनाक शक्ल अख्तियार कर लेता है। महिलाओं में यह समस्या इसलिए ज्यादा देखी जाती है क्योंकि वे सामान्यत: सार्वजनिक जन जीवन से दूर रहती है। लिहाजा यकायक ऐसी...

  • बाल कहानी: सात घड़े

    एक नाई था। राजा का नाई। राजा उसे अच्छा वेतन देता था। फिर भी नाई के मन को चैन न था। वह हमेशा सोचता कि काश, मेरे पास खूब धन होता। अपनी पत्नी को अच्छे-अच्छे गहने बनवाकर देता। वह हर महीने पैसे बचाने लगा। धीरे-धीरे काफी धन इकटठा हो गया। एक दिन वह बाजार जाकर पत्नी के लिए सोने का हार खरीद लाया। पत्नी...

  • बाल कहानी: धन से बढ़कर नाम

    प्राचीन काल में भारत के एक नगर में शिवरतन नामक एक पंडित रहते थे। वह बहुत विद्वान थे। लेखन उनका व्यवसाय था। उन्होंने अपनी रचनाओं के द्वारा धन ही नहीं, यश भी कमाया था। उनकी रचनाएं देश प्रेम, चरित्र निर्माण और मानवता आदि गुणों से ओतप्रोत थीं। उस समय वीरसिंह नामक एक भयंकर डाकू का आतंक चारों तरफ छाया...

  • बाल जगत/जानकारी: बहुत उपयोगी है बांस

    कहने के लिए तो बांस एक रूखा-सूखा और फल से विहीन, पतला और लम्बा वृक्ष भर है। इसकी पत्तियां 5 से.मी. से लेकर 30 से.मी. तक लंबी होती हैं, जो आरम्भ में चौड़ी एवं आखिर में पतली व नुकीली होती हैं। बांस में प्राय: 30 से.मी. के अन्तर पर गांठें होती हैं जिनमें से पतली टहनियां निकली होती हैं। बांस के...

  • बाल कहानी: टूट गईं जंजीरें

    राजगढ़ नामक राज्य में राजा वीर सिंह राज्य करते थे। राजा जनता का भला चाहने वाले थे। राजा कलाकारों, लेखकों, कवियों व वीरों की कद्र करते थे। उनके दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता था। राजा को कुश्ती देखने का बड़ा शौक था। इसके लिए वह अपने राज्य में कुश्ती प्रतियोगिता भी करवाते थे। दूर-दूर से पहलवान...

  • बाल कहानी - दीवाली विशेष: अधजला बम फूट गया

    सोनबरसा जंगल में एक खरगोश रहता था। उसके पिता नहीं थे। एक सड़क दुर्घटना में उन की मृत्यु हो गई। खरगोश की मां दूसरे जानवरों के घरों में बर्तन वगैरह साफ कर उसे पाल रही थी। खरगोश होशियार था। वह सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ता था। कक्षा में वह हमेशा प्रथम आता। उस की किताब कापियों का इंतजाम मुश्किल से हो...

  • बोध कथा: बुद्धिमान की मूर्खता

    समारोह या सामाजिक गतिविधियों में प्राय: बुद्धिमान व्यक्ति भी भ्रमवश भूल कर देता है जो मूर्खता की कोटि में आता है, अतएव अपने व्यवहार में सदैव सतर्क रहना चाहिए जिससे मूर्ख बनने की स्थिति नहीं आये। ऐसे संदर्भ में यह विचार करना आवश्यक है कि कौन सा व्यवहार किसी व्यक्ति को मूर्ख कहला देता है। इस प्रसंग...

  • बोध कथा: मन की अपवित्रता

    कबीरदास जांति-पाति, छुआछूत और समाज की दूसरी कुरीतियों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने दोहों में हिन्दू-मुसलमान दोनों पर कटाक्ष करके उन्हें आड़े हाथों लिया है। रोज की तरह एक दिन कबीरदास सुबह सवेरे गंगा के किनारे स्नान कर रहे थे। उसी समय तीन ब्राह्मण जो तीर्थयात्र पर आये थे, गंगा में स्नान करने के लिये...

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