Read latest updates about "वे कहते हैं" - Page 1

  • भविष्यवाणी: किसी बड़े राष्ट्र अध्यक्ष की हत्या के बन रहे हैं आसार!

    शनि ग्रह ज्योतिष में अधिकार, अनुशासन, कड़ी मेहनत, श्रम और प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। यह अपराधबोध, प्रतिरोध और देरी का भी कारक ग्रह है। जन्म पत्री में शनि जिस भाव में स्थित होता है, उस भाव के कारकतत्वों की प्राप्ति सहज नहीं होती है। इसके विपरीत जिन भावों को शनि देखता है उन भावों के फल...

  • चीन से प्रवासी पक्षी छत्तीसगढ़ में

    दुलर्भ प्रजाति के प्रवासी पक्षी ग्रे हैडिड लेप्विंग सेंट्रल एशियन फ्लाईवे में हर साल इसी मार्ग से गुजर कर जाती है दक्षिण भारत। इस बार वह कुछ दिन गुजारने रूकी छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गाँव बेलौदी में। लंबे सफर में विश्राम करने और पोषण करने माइग्रेट पैसेज के रूप में कुछ दिन बीच में रूकती है, फिर...

  • मुद्दा: भावनाओं से नहीं, विवेक से निर्णय की जरूरत

    समय, काल व परिस्थिति ने हमारे जीवन में अनेक सहज परिवर्तन किये हैं, विवाह भी उन्हीं में से एक है। आज पुरानी मान्यताओं में परिवर्तन को काफी हद तक स्वीकार कर लिया गया है लेकिन यौन शुचिता को लेकर हमारे समाज के दृष्टिकोण में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है। स्पष्ट है कि नैतिक मूल्यों से समझौता करने की...

  • मॉब लिंचिंग: दोहरे आचरण भी अस्वीकार्य

    माब लिंचिंग एक नया लेकिन बहुचर्चित शब्द है। हालांकि माब लिंचिंग अर्थात् भीड़ द्वारा कानून को अपने हाथ में लेते हुए हत्या करना कोई नया व्यवहार नहीं है। केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में माब लिंचिंग का प्रचलन रहा है। अमेरिका, जर्मनी, रूस सहित अधिकांश देश इसके साक्षी रह चुके हैं। पचास या अधिक आयु के...

  • विश्लेषण: जड़ों की खोज में युवा पाकिस्तानी

    लहू को लहू पुकार रहा है। हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने गौरी, गजनी, खिलजी, बाबर, औरंगजेब जैसे बर्बर नायक अपनी नस्लों को खूब घोंट-घोंट कर पिलाए परंतु वहां की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुडऩे को बेताब दिख रही है। अभी-अभी लाहौर में महान शासक महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा लगाने और उन्हें 'शेर-ए-पंजाब' की...

  • स्वतंत्रता दिवस विशेष: अजेय क्रांतिकारी सरदार अजीत सिंह

    वतन की आजादी के लिए मर मिटने वाले अनगिनत क्रांति के मतवालों में से एक थे महान क्रांतिकारी सरदार अजीत सिंह जिनके महान बलिदान को कृतज्ञ राष्ट्र विस्मृत कर चुका है परंतु हर वर्ष जब 15 अगस्त को भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अतीत की वीणा के तार झंकृत होते हैं तो स्मृति के दृश्य पटल पर धुंधली होती भूले...

  • राष्ट्रवादी विचार से अस्पृश्यता का औचित्य

    लोकतंत्र एक विचार, एक दल, एक वंश के अतिरिक्त कुछ और सुनने, मानने, जानने को अस्वीकार करने का नाम नहीं है। जिस समाज में मत भिन्नता को स्वीकार ही न किया जाए, उसे लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता। मत भिन्नता वस्तुत: वैचारिक विमर्श का आधार होती है और उसके लिए एक मंच पर मिल बैठना और मत विवेचन करना एक उत्तम...

  • कायम है आतंकी ढांचा

    जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सीआरपीएफ के गश्ती दल पर हुए आतंकी हमले ने चिंता बढ़ी दी है। हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हुए हैं। इस साल फरवरी में पुलवामा हमले के बाद चलाए गए बड़े अभियान में कई आतंकी मारे गए लेकिन कुछ दिनों की शांति के बाद स्थितियां फिर गड़बड़ाती दिख रही हैं। कई जगहों पर छिटपुट...

  • विकास के नजरिये से देखें वित्तीय घाटा

    निवर्तमान एनडीए सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा वित्तीय घाटे पर नियंत्रण करने की नीति को लागू किया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान वित्तीय घाटे में कमी भी आई है लेकिन इस सार्थक कदम के बावजूद देश की आर्थिक विकास दर 7 फीसदी के करीब सपाट रही है। नये वित्त मंत्री के सामने चुनौती है कि जेटली की इस...

  • क्या जगन मोहन से सीख लेंगे राहुल गांधी?

    पिछले दो आम चुनावों के बाद कांग्रेस की शाख जिस तरह कमजोर हुई है, उससे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी काफी निराश हैं। असल में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी अब भी सीख लेंगे? मेरा मानना है कि उन्हें कुछ छोटे और नए स्तर पर उभर तेजी से रहे नेताओं से भी सीखना चाहिए। क्योंकि, 2014 में बड़ी हार के...

  • राष्ट्ररंग: एमपी में कांग्रेस का बड़ा दांव-ओबीसी आरक्षण

    अबकी बार कैसे भी दिल्ली में चौकीदार की चौकीदारी पर अंकुश लगे, इसके लिए हर कोई अपने स्तर पर जुट गया है। यूपी में बुआ-भतीजे ने बागडोर संभाल रखी है तो बिहार में कन्हैया कुमार ही सब पर भारी दिखाई दे रहे हैं। बंगाल में ममता दीदी ने मोदी एंड कंपनी की नींद हराम कर रखी है। उधर आंध्र में ओवैसी ने मोर्चा...

  • विश्लेषण: चिंताजनक है सत्ता के लिए गिरता राजनीतिक स्तर

    आजादी के पहले भारत में फिरंगियों को देश से हटाने के लिए भारत के तत्कालीन नेताओं और देशभक्तों ने कई संगठन और दल बनाए जिनका केवल एकमात्र उद्देश्य अंग्रेजों के शासन से मुक्ति पाना था। काफी संघर्ष और बलिदान के बाद 15 अगस्त 1947 की सुबह आजादी की पहली किरण पूरे भारतवर्ष में फैली और देश को अंग्रेजों के...

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