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  • राष्ट्ररंग: एमपी में कांग्रेस का बड़ा दांव-ओबीसी आरक्षण

    अबकी बार कैसे भी दिल्ली में चौकीदार की चौकीदारी पर अंकुश लगे, इसके लिए हर कोई अपने स्तर पर जुट गया है। यूपी में बुआ-भतीजे ने बागडोर संभाल रखी है तो बिहार में कन्हैया कुमार ही सब पर भारी दिखाई दे रहे हैं। बंगाल में ममता दीदी ने मोदी एंड कंपनी की नींद हराम कर रखी है। उधर आंध्र में ओवैसी ने मोर्चा...

  • विश्लेषण: चिंताजनक है सत्ता के लिए गिरता राजनीतिक स्तर

    आजादी के पहले भारत में फिरंगियों को देश से हटाने के लिए भारत के तत्कालीन नेताओं और देशभक्तों ने कई संगठन और दल बनाए जिनका केवल एकमात्र उद्देश्य अंग्रेजों के शासन से मुक्ति पाना था। काफी संघर्ष और बलिदान के बाद 15 अगस्त 1947 की सुबह आजादी की पहली किरण पूरे भारतवर्ष में फैली और देश को अंग्रेजों के...

  • राष्ट्ररंग: सामाजिक न्याय और अधिकार के क्षेत्र में बढ़े कदम

    सामाजिक न्याय और अधिकार दशकों से ऐसा मुद्दा रहा है जिसका शासन-प्रशासन से बढ़कर राजनीति में ज्यादा महत्त्व रहा है। लिहाजा काम की गति जो भी रही हो, इस बाबत चर्चा जरूर होती है। पिछड़े तबकों को अगली पंक्ति में खड़ा करने की कवायद का शोर होता रहा। ऐसे में पिछले चार साल एक मायने में थोड़ा अलग है। कुछ नई...

  • राजनीति: सियासत की अग्नि परीक्षा

    भारत की राजनीति में 2019 का लोकसभा चुनाव बहुत ही अहम स्थिति में है क्योंकि देश की बदलती हुई राजनीति के साथ उभरती हुई राजनीति के बीच एक बड़ी लड़ाई होने वाली है। देश के बदलते हुए राजनीतिक समीकरण में 2019 का लोकसभा चुनाव महत्त्वपूर्ण चुनावी वर्ष बन गया है। आज देश की राजनीति में छोटी पार्टियां जहाँ...

  • राजनीति: तो खुद के साथ 2019 का चुनाव लड़ रही है भाजपा?

    इस लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करने वाले विभिन्न मुद्दों पर पार्टी की आलोचना तो करते हैं लेकिन इस बात की चर्चा कम हो रही है कि आखिर भाजपा की लड़ाई किसके साथ है? क्या सचमुच भाजपा अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ लड़ाई लड़ रही है या फिर वह खुद के साथ लड़ रही है, इसपर गंभीर बहस की...

  • राष्ट्ररंग: झूठे वादों पर अंकुश क्यों नहीं

    देश एक बार फिर अगले पांच वर्ष के भाग्य विधाताओं का फैसला करने जा रहा है। इन दिनों हर तरफ वादे-दावे, आसमान से तारे तोड़ कर लाने जैसी बड़ी-बड़ी बातें, देश के कुल बजट से भी ज्यादा बांटने की योजनाएं, लच्छेदार भाषण, खूबसूरत चुनाव घोषणा पत्र, टीवी चैनलों पर बेसिर पैर की बहस की बहार है। सोशल मीडिया पर...

  • राष्ट्ररंग: देशहित में स्वच्छ छवि के नेताओं का चुनाव

    भारत में अधिकतर नेताओं की मानसिकता इतनी गंदी हो गई है कि उन्हें केवल कुर्सी के अलावा कुछ नहीं दिखता है चाहे वे किसी भी पार्टी के हों। कुछ नेताओं की बयानबाजी तो उनके भारतीय होने पर शक पैदा कर देती है लेकिन कानून, जानकार व उनके पक्षकार इसे अभिव्यक्ति की आजादी से तौल देते हैं और उनकी मनमानी बयानबाजी...

  • राजनीति: मैं भी चौकीदार के मायने

    वर्ष 2014 में लोकसभा का चुनाव जीतने और प्रधानमंत्री बनने के बाद 15 अगस्त को लाल किले से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं वरन प्रधान सेवक हैं। आगे चलकर उन्होंने अपने को देश का चौकीदार कहना शुरू कर दिया। इसका मतलब सिर्फ इतना ही था कि प्रधानमंत्री की कुर्सी...

  • विश्लेषण: छद्म युद्ध झेलते भारत में युद्ध को 'न' की डफली

    भारत सदैव से एक शांतिप्रिय देश रहा है। हमने कभी भी आगे बढ़कर युद्ध नहीं किया लेकिन जब भी किसी दुश्मन ने हमें चुनौती दी है हमने डटकर उस चुनौती को स्वीकारा है और दुश्मन को धूल चटाई है। आज जो पाकिस्तान हमारे साथ सीधे युद्ध न कर छद्म युद्ध कर रहा है। उसका कारण भी यही है कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति...

  • राष्ट्ररंग: अधिकतर नेता जनता के सगे नहीं हैं

    देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने वाले शहीद, महापुरूष,वीर व देशभक्त जिनके खून से सींचा गया हिन्दुस्तान की आजादी का बगीचा लेकिन आज देश को बर्बाद करने की कसम खाए कुछ नेता व दल जो केवल अपनी स्वार्थपरता के लिए लोग क्या देश को दांव लगाने पर तैयार हैं और देश की जनता भी इन जांति व धर्म के...

  • नेताओं की गंदी राजनीति ही देश के विकास में बाधक

    जब 1947 में भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो इस बंटवारे के बाद अनगिनत लोग दंगे में मारे गये जो भारत और पाकिस्तान के आम जनता के लिये बहुत ही बुरा साबित हुआ। आज जब हम उस त्रसदी पर नजर डालते हैं तो लगता है कि वास्तव में कुछ स्वार्थी किस्म के नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने या हीरो बनने के चक्कर में भारत...

  • विश्लेषण: अद्वितीय होगा आगामी चुनाव

    आयोग ने देश में लोकसभा आम चुनाव के लिए रणभेरी बजा दी एवं चुनाव महासंग्राम का शंखनाद कर दिया और 17वीं लोकसभा के लिए चुनाव कार्यक्र म की विधिवत घोषणा कर दी। इसके साथ ही समूचे देश में आचार संहिता प्रभावी हो गई है। अब नेताओं से लेकर जनमानस सबके मन में यह महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठ रहा है कि अबकी बार किसकी...

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