बाल कथा: गधे का अनोखा सौदा

बाल कथा: गधे का अनोखा सौदा

करोड़पति सेठ हाथीराम खुशी खुशी घर आए और पत्नी से बोले, 'अजी सुनती हो, आज एक बड़े बेवकूफ से पाला पड़ा।'

'अरे, क्या हुआ?' सेठानी ने पूछा।

'बस, अपनी तो चांदी हो गई मजा आ गया। तुम बहुत चिल्लाती रहती हो कि मैं तुम्हें कुछ नहीं देता। अब तुम रोज नए-नए गहने गढ़वाना समझीं, सेठ हाथीराम ने खुशी से झूमते हुए कहा।'

सेठानी बोलीे, बड़े प्रसन्न नजर आ रहे हो, क्या लाटरी निकल आई है?

'अरी भागवान, आज एक गधा मिला और बोला, सेठ हाथीराम जी, मैं आप को 30 दिन तक रोज 10 हजार रूपए दूंगा और आप से बदले में, एक पैसे से शुरू कर के उस के दोगुने 30 दिन तक लूंगा।'

'क्या मतलब? सेठानी भौंचक्की रह गई। वह गधा कल 10 हजार रूपए लाएगा और तुम उसे एक पैसा दोगे?'

'हां, और दूसरे दिन वह फिर 10 हजार रूपए लाएगा और मैं उसे 2 पैसे दूंगा,' सेठ हाथीराम ने नाचते हुए कहा।

'अच्छा, वह गधा पागल तो नहीं हो गया है, 'सेठानी खुश हो गई।

गधों के पास अक्ल नहीं होती, इसीलिए वह गधा वह अनोखा सौदा कर बैठा, Óसेठ हाथीराम ने कहा।

दूसरे दिन शाम 4 बजे का समय निश्चित था।

सेठ हाथीराम जी बड़ी बेचैनी से 4 बजने का इंतजार कर रहे थे।

वह सोच सोच कर डर भी रहे थे, 'कहीं कोई उस गधे को भड़का न दे या कहीं बेवकूफ समझ न जाए और पटापटाया सौदा खराब हो जाए।' रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

लेकिन ठीक 4 बजे वह गधा गद्दी पर सेठ हाथीराम के सामने हाजिर हो गया।

उस ने सेठ हाथीराम को 10 हजार रूपए पकड़ाए और एक पैसा ले कर सलाम कर के चला गया।

सेठ हाथीराम बड़ी देर तक रूपयों को उलटते पुलटते रहे, कहीं नकली तो नहीं हैं, चोरी के तो नहीं हैं, कहीं वह फंस जाएं।

फिर रात को सेठ हाथीराम गद्दी बंद कर के घर आ गए।

दूसरे दिन वह गधा फिर आ पहुंचा, सेठ हाथीराम जी, वायदे के अनुसार 10 हजार रूपए लाया हूं।

'हां हां' और सेठ हाथीराम ने 2 पैसे निकाल कर उसे दे दिए।

शुरू के 7 दिन में सेठ हाथीराम को 70 हजार रूपए मिल चुके थे, जबकि उस ने केवल 64 पैसे गधे को दिए थे।

सेठ हाथीराम जी सोचने लगे, 'कितना अच्छा है कि ऐसा सौदा जिंदगी भर चलता रहे।

फिर 8वें दिन वह गधा 10 हजार रूपए दे कर एक रूपया 28 पैसे ले गया।

9वें दिन 2 रूपए 56 पैसे, 14 वें दिन 81 रूपए 92 पैसे ले गया और सेठ हाथीराम को अब तक 1 लाख 40 हजार रूपए मिल चुके थे।

15 वें दिन सेठ हाथीराम ने गधे को 163 रूपए 84 पैसे दिए लेकिन 18 वें दिन सेठ हाथीराम की आंखें सिकुड़ गईं क्योंकि अब नौबत हजारों पर आ गई थी।

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फिर भी सेठ जी प्रसन्न थे क्योंकि वे लाखों के फायदे में थे।

25 वें दिन सेठ हाथीराम का दिल बैठ गया क्योंकि उस दिन गधे को।

लाख 67 हजार, 772 रूपए, 16 पैसे देने पड़े थे और हाथीराम को मिले थे ढाई लाख रूपए।

26 वें दिन सेठ हाथीराम घाटे में आ गए। उस का किया हुआ सौदा यहीं रूक जाए लेकिन वायदा तो वायदा था। सौदा तोड़ा भी नहीं जा सकता था।

अंतिम 3 किश्तों में सेठ हाथीराम जी का दिवाला निकल गया था। सेठानी के सब जेवर बिक चुके थे और वह उस गधे को जार जार कोस रही थी।

आखिरी दिन जब वह गधा सेठ हाथीराम की गद्दी से उठा तो उसको सब मिला कर 1 करोड़ 7 लाख, 37 हजार 418 रूपए 23 पैसे मिले थे, जबकि सेठ हाथीराम जी को केवल 3 लाख रूपए।

- नरेन्द्र देवांगन

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