Read latest updates about "लेडीज स्पेशल" - Page 1

  • रूटीन में तब्दीली बनाए जिंदगी रसीली

    सुबह होती है शाम होती है, जिंदगी यंही तमाम होती है। हर व्यक्ति कोल्हू के बैल की भांति अपने खूंटे से बंधे घर से दुकान, दुकान से घर, घर से ऑफिस, ऑफिस से घर चलता रहता है। कहते हैं एक साइड पर तवे पर रोटी भी पड़ी पड़ी सड़ जाती है। उसे भी कभी उलट, कभी पलट करना पड़ता है। तालाब में रूका पानी बदलाव सड़ांध...

  • संस्कृति का संरक्षण कर सकती है नारी

    वर्तमान में जबकि विश्व के सभी देशों में विश्व संस्कृति अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे समय में अपनी मूल संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखना आज की स्थिति में और भी आवश्यक है। किसी भी राष्ट्र की मौलिक पहचान और गरिमा उस राष्ट्र की संस्कृति से जानी जाती है। इस तथ्य में कोई संदेह नहीं कि नारी...

  • पति का पाएं प्यार भरपूर

    आज हर विवाहिता चाहती है कि उसे पति का भरपूर प्यार व पति के तरफ से पूरा सम्मान मिले। कहना गलत भी न होगा कि कुछ पत्नियों को ही पति का प्यार व सम्मान मिल पाता है। हर शादी शुदा औरत को पति का प्यार और सम्मान मिले, उसके लिए आवश्यक है कि निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें। - अगर आपके पति आफिस में कार्यरत हैं...

  • बिंदास होते टीनएजर

    आज की ज्वलंत समस्या है हमारे टीनएजर्स का इंटरनेट और मोबाइल एडिक्ट होना। यहां जानकारियां तो बहुत मिल जाती हैं लेकिन वो ज्ञान नहीं जो उन्हें एक अच्छा मानव बनाएं। जब वे अपने बुजुर्गों के संपर्क में ही नहीं आते तो कहां से अपनी संस्कृति अपनी पृष्ठभूमि के बारे में कुछ जान पायेंगे। सोशल नेटवर्किंग का...

  • आत्मीय क्षणों में दूर करें पारिवारिक कलह

    सच पूछा जाए तो पति-पत्नी के संबंध कभी सुनहरे सपनों का दिलकश संसार होते हैं तो शिकवे-शिकायतों के महल भी और ऐसे समय पति-पत्नी संयुक्त रूप से निर्णय भी नहीं ले पाते और जरा-जरा सी बात पर गृह-कलह के पाश में बंध जाते हैं। वैसे यह आजीवन चलने वाली सहज प्रक्रि या है जिसमें उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं। बस!...

  • दांपत्य से क्रोध को दूर ही रखें

    गुस्सा या क्रोध मानव मन की स्वाभाविक भावना है। जिस तरह मनुष्य मन की गहराई में प्रेम, घृणा, राग-द्वेष, हर्ष-विषाद, सुख-दुख आदि मनोवृत्तियां विराजमान रहती हैं, ठीक उसी तरह क्रोध का अस्तित्व है। एक सीमा तक किया गया क्रोध उचित भी है और आवश्यक भी किन्तु बेकाबू और असीमित क्रोध अनुचित व अनावश्यक है।...

  • नौकरीपेशा महिलाएं बनें शक्तिशाली

    कुछ नौकरीपेशा महिलाएं अत्यंत घमंडी किस्म की होती हैं। वे अपने समक्ष किसी को कुछ समझती ही नहीं। घर व ऑफिस, जहां भी वे हों, माहौल सदैव तनावपूर्ण बना रहता है। इससे जहां वे अपनी प्रतिभा का अपमान करती हैं, वहीं किसी के सम्मान की पात्र नहीं बन पातीं। नौकरीपेशा महिलाओं को इतना शक्तिशाली होना चाहिए कि कोई...

  • चेहरे का सौंदर्य और कील

    चेहरे पर कील शब्द जुबान पर आते ही दिल में एक कुरूप और भद्दे चेहरे की तस्वीर सामने आ जाती है जो सदियों से नौजवान वर्ग के लिये एक गम्भीर समस्या बनी हुई है। आज भी करोड़ों युवक युवतियां, इस गम्भीर समस्या से ग्रस्त हैं। वे सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक निराशा और उदासी जैसे रोगों में जकड़े हुए हैं। ...

  • क्यों बहकती है नारी?

    विवाह से पूर्व हर नवयौवना अपने हृदय में अपने प्रियतम के प्रति ढेर सारे सपने संजोये रहती है। उसकी चाह होती है कि उसका पति भी एक फिल्मी हीरो की तरह देखने में सुंदर, सजीला, गठीला और स्मार्ट या जवान हो जो उसे हीरो की तरह बांहों में भरकर उस पर भरपूर प्यार लुटाये। उसकी भावनाओं का आदर करे। उसे शारीरिक,...

  • आधुनिकतावाद और नारी शोषण

    विश्व की आधी जनसंख्या अर्थात् नारी के सम्मान, उसके अधिकारों पर बहुत बातें होती रहती हैं लेकिन इस बात को अनदेखा किया जाता है कि पिछले कुछ दशकों में नारी स्वतंत्रता के नाम पर वास्तव में नारी को गुमराह ही किया गया है। अनेक मामलों में यह भी देखा गया है कि जहां छोटी- छोटी घरेलू समस्याओं का दोनों पक्षों...

  • विज्ञापनों के जरिए उजड़ता स्वास्थ्य-सौंदर्य

    स्वास्थ्य, सौंदर्य और व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के लिए बाजार आजकल विविध उत्पादों से भरे पड़े हैं। आज से 25-30 वर्ष पूर्व जितने प्रकार के श्रृंगार प्रसाधन, साबुन, क्रीम, आदि मिलते थे, उनसे सौ गुना अधिक चीजें इन दिनों बाजार में भरी पड़ी हैं परंतु स्वास्थ्य, सौंदर्य और सुगढ़ता की दृष्टि से औसत स्थिति...

  • माता-पिता बच्चों के पहले गाइड

    बच्चे का आने वाला कल उसके सुंदर, संतुलित आज पर ही निर्भर करता है, जिसके लिए जरूरी है माता-पिता द्वारा बच्चे के शारीरिक, मानसिक विकास के साथ- साथ कुछ खास बातों का भी ख्याल रखा जाए। बच्चे के प्रयासों की तारीफ करें, उसके जन्मजात गुणों की नहीं। सकारात्मक योगदान: 2011 में कनाडा की कॉनकोर्डिया...

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