सात कदमों में सात जन्मों का बंधन

सात कदमों में सात जन्मों का बंधन

सावित्री एवं सत्यवान की पौराणिक कथा में सावित्री यमराज से कहती है कि मैं आपके साथ सात कदम चल चुकी हूं। इस तरह आप और हम मित्र हुए। मित्र होने के नाते आप मेरे पति (सत्यवान) के प्राण अपने साथ ले जाकर मुझे विधवा कैसे बना सकते हैं? यमराज ने सावित्री के कथन को सिद्धान्तों के अनुसार सही पाया और उसने सत्यवान के प्राण को अपने पाश-बंधन से मुक्त कर दिया। संख्या 'सात' के अन्दर अनेक आध्यात्मिक एवं पारलौकिक गूढ़ रहस्य छिपे हुए हैं। संगीत के सात स्वर होते हैं, सूर्य की किरणों में सात रंग होते हैं, अग्नि की सात लौ होती हैं, शरीर के सात तत्व होते हैं। कहने का अर्थ है कि सात का अंक चिरायु प्रदान करने वाला तथा अनेक आध्यात्मिक गुणों से सम्पन्न है अतएव विवाह जैसे पवित्र बंधन के लिए भी वर-वधू को पवित्र अग्नि के सात फेरे लगाने होते हैं जिसे 'सप्तपदी कहा जाता है। वेदों की मान्यता है कि जब तक सप्तपदी नहीं होती, तब तक कन्या अविवाहित ही मानी जाती है। इस सप्तपदी में वर एवं वधू आपस में एक-दूसरे के लिए क्या वचन देते हैं, इस बारे में सभी विवाहित जोडिय़ों को जानना आवश्यक है:-

प्रथम पद:- अग्नि के प्रथम फेरे (पद) के समय वर, वधू से कहता है कि 'मैं तुम्हारे साथ कदम से कदम मिलाकर जीवन भर चलूंगा। तुम मुझे भोजन दोगी, साथ ही हर तरह से मेरा सहयोग करोगी। मैं तुमसे प्रेम करता हुआ भविष्य की खुशी के लिए साधन जुटाऊंगा।' रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

प्रथम पद के समय वधू वर से कहती है कि 'मैं विनम्रता के साथ तुम्हारे समक्ष तन-मन से समर्पित होकर सौंपे गये दायित्व को निभाऊंगी और संतति वृद्धि के साथ ही बच्चों का पालन भी करूंगी।

द्वितीय पद:- द्वितीय पद के समय वर, वधू से अपने हृदय में शक्ति एवं सामथ्र्य को भर देने की कामना करता है ताकि दांपत्य जीवन में साथ-साथ चलते हुए घर एवं बच्चों की रक्षा कर सकें। इस पद में वधू, वर से प्रतिज्ञा करती है कि मैं आपके हृदय में साहस एवं आत्मबल भर दूंगी तथा मैं प्रेम सहित परिवार एवं बच्चों का ख्याल रखूंगी। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

तृतीय कदम:- सप्तपदी के तीसरे कदम में वर, वधू से कहता है कि अब तुम मेरे साथ तीन कदम चल चुकी हो। इससे हमारे धन-धान्य एवं सम्पदा में वृद्धि होगी। मैं तुम्हारे अतिरिक्त अन्य किसी भी स्त्री को तुम्हारा दर्जा नहीं दूंगा। वधू, वर से इस कदम में प्रतिज्ञा करती है कि मैं आपके अतिरिक्त किसी अन्य पुरूष को आपका दर्जा नहीं दंूगी। मैं पवित्रता के साथ आपके आंगन की तुलसी बनकर रहूंगी।

चतुर्थ कदम:- शादी के मंडप में अग्नि का चौथा फेरा लगाते हुए वर, वधू से कहता है कि तुम मेरे जीवन में पवित्रता एवं शुभ लक्षणों को लेकर आयी हो। हम आज्ञाकारी एवं योग्य संतानों से युक्त हों। वधू, वर से कहती है कि मैं हर प्रकार से अपने बदन को सजाऊंगी और हर तरह से आपको खुश रखने का प्रयास करूंगी।

पंचम कदम:- सप्तपदी के पांचवें कदम में वर, वधू से कहता है कि तुमने पांच कदम चलकर मेरे जीवन को धन्य बनाया है। हमारे प्रियजन चिरायु हों और हम सभी का साथ निभायें। वधू, वर से कहती है कि मैं आपके सुख, दु:ख में साथ रहते हुए आपके मन में विश्वास बनाये रखूंगी तथा आपकी सभी इच्छाओं का पालन करूंगी। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

छठा कदम:- इस कदम में वर, वधू के कहता है कि मैं तुम्हारा साथ पाकर जीवन में आनन्द का अनुभव करूंगा तथा तुम्हें हर प्रकार से सुखी एवं खुश रखने का भरपूर प्रयास करूंगा। वधू वर से कहती है कि मैं आपके सभी कार्यों, भौतिक समृद्धि, सभी आनंददायक क्रियाओं एवं आध्यात्मिक कार्यों में सदैव आपके साथ रहकर साथ दूंगी।

सातवां कदम:- अग्नि के सातवें फेरे लेते समय वर, वधू से कहता है कि अब हमारा प्रेम और प्रवित्र शाश्वत हो गया। हमने ईश्वर के समक्ष आध्यात्मिक एकता का अनुबन्ध किया है। मैं अपना पूरा जीवन तुम्हारे ऊपर अर्पित करता हूं।

वधू, वर से कहती है कि हम-आप पवित्र बंधन में बंध चुके हैं और मैं आपकी अर्द्धांगिनी बन चुकी हूं। मैंने सभी वचन शुद्ध चित्त से दिये हैं। हम हमेशा एक-दूसरे से सच बोलेंगे एवं सदैव एक-दूसरे से प्रेम करेंगे।

- आनंद कुमार अनंत

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