कोई क्या कहेगा?

कोई क्या कहेगा?

बहुत-सी महिलाएं 'कोई क्या कहेगा' की सोच के तहत अपना बहुत-कुछ गंवा बैठती हैं। वे चाहती हैं कि वे वही काम करें जो दूसरों को अच्छा लगे और दूसरों को खुश करते-करते वे पूरा जीवन अथक परिश्रम के बावजूद कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाती।

इतना ध्यान रखें कि अगर आप लोगों की परवाह करती रहेंगी तो वे आपको और भी ज्यादा दबाने का प्रयास करेंगे। आप उनकी बात मान लेंगी तो वे आपके समक्ष आपकी झूठी प्रशंसा करेंगे और आपकी पीठ पीछे आपकी खिल्ली उड़ायेंगे। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

दृष्टिकोण में परिवर्तन लाएं

अपने जीवन को लोगों के दृष्टिकोण के अनुसार न ढालें। याद रखें कि हर व्यक्ति की अपनी सोच व अपनी पसंद-नापसंद होती है और वह उसी के अनुसार दूसरों से व्यवहार करता है। यह जरूरी नहीं कि जैसा वह सोचे, आप भी वैसा ही सोचें।

समाज में रहते हुए सामाजिकता का निर्वाह करना आवश्यक है। आप समाज से कटकर नहीं रह सकती परंतु इसका मतलब यह नहीं कि आप सदैव सहती ही रहें।

किसी की सोच व जीने के तौर-तरीकों को स्वयं पर हावी न होने दें। दूसरों के लिए उतना ही त्याग करें, जितना आवश्यक हो या जितना आप कर सकती हैं। यह नहीं कि आप किसी की सोच को ओढ़े हुए व दूसरों को खुश रखने के लिए अपना पूरा जीवन ही दांव पर लगा दें।

कोई भी कार्य करते समय इस सोच को मन से निकाल दें कि 'कोई क्या कहेगा'। यह जीवन आपका है और आपको पूरा अधिकार है कि आप इसे अपने ढंग से जिएं। जो आपकी सेहत के लिए अच्छा हो, वही खाएं व जिसमें आपको सुविधा महसूस हो, वही पहनें।

अगर आपके परिवारजनों को आपके पश्चिमी परिधान पहनने में कोई ऐतराज नहीं है तो आप दूसरों की परवाह क्यों करती हैं? हां, आपका पहनावा शालीन होना चाहिए, इसका ध्यान अवश्य रखें। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

बेवजह ही किसी से दबकर न रहें

यदि कुछ लोग आपको पसंद नहीं करते तो आप इसे लेकर अपने मन में हीन भावना न पालें। हो सकता है, वे आपकी खुशियां देखकर आपसे ईष्र्या करते हों, इसलिए इन बातों पर ध्यान न दें।

कई महिलाएं बेवजह ही दूसरों के ताने सुनती रहती हैं। कोई उन्हें कुछ भी कहता रहे, उसे खरी-खोटी सुनाने की बजाय घर में छिपकर आंसू बहाती हैं, जिससे लोगों की हिम्मत और भी बढ़ जाती है।

आखिर इस तरह दूसरों से क्यों दबकर रहती हैं आप? याद रखें, सहना आपकी नियति नहीं है इसलिए दबना व सहना छोड़कर खुलकर जीना सीखें।

बस, दूसरों के प्रति अपने व्यवहार को सही रखें व फिर इस ख्याल को छोड़ दें कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं। यह सोचें कि आप स्वयं को क्या समझती हैं व कैसी दिखना चाहती हैं, दबी सहमी या फिर सुपर-डुपर।

- भाषणा बांसल

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