महिलाएं दिमाग की खिड़कियां खुली रखें

महिलाएं दिमाग की खिड़कियां खुली रखें

दिमाग की खिड़कियां खुली रखें ताकि ताजी हवा के झोंके अंदर आते रहें। जीवंतता के लिए प्राणदायिनी हवा जरूरी है, यह सभी जानते हैं। फिर भी ऐसा क्यों है कि खासकर घरेलू अधेड़ उम्र की औरतें सोचना बिलकुल बंद कर देती हैं। उनके दिमाग में जो अनवरत उथल पुथल चलती है, उसे हम सोचना नहीं कहेंगे।

दुख, मुसीबत व परिस्थितियां अच्छे अच्छों को सीधा कर देती हैं लेकिन ऐसी नौबत किसी पर आये ही क्यों और क्यों न पहले से ही जीवन पथ पर सही ढंग से चला जाए ताकि स्वयं भी खुश रह सकें और दूसरों को भी खुशी दे सकें। जब दूसरों को खुशी देना सीख जाएंगे, तब अपने आप ही स्वयं भी खुश रहा करेंगी बशर्ते कि खुशी उसको ही दी जाए जो पात्र बनने की योग्यता रखता हो वर्ना ऐसी नेगेटिव औरतों को खुशी देना आपको बहुत महंगा पड़ सकता है क्योंकि वे स्वयं तो खुश होगी नहीं, उल्टा अपनी सभी नकारात्मक बातों, ईष्र्या, झगड़ालू प्रवृत्ति, क्षोभ, हीनता बोध के कारण वे आपकी हंसी भी गायब कर देंगी। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

क्यों हो जाती हैं औरतें इतना नेगेटिव, यह तो मनोविश्लेषक उनका बचपन उनकी परवरिश जानकर बेहतर बता सकते हैं लेकिन इसमें दो राय नहीं कि एनलाइटनमेंट होने पर व्यक्ति की सोच पॉजिटिव हो जाती है। इसके लिये एकेडेमिक शिक्षा से इतना फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है दिमाग रोशन रखने से।

हमेशा कुछ भी नया सीखने सोचने समझने को तत्पर रहें। बात सब की सुनें। ईष्र्या और नफरत जैसी दुर्भावनाओं को मन में न पलने दें। बड़ों का आदर करना और छोटो को प्यार देना सीखें तथा मन में संवेदना जगाएं रखे।

पाजिटिव सोच और सद्व्यवहार ऐसे गुण हैं जिनके होते आप तनावमुक्त रहेंगे। दिमाग की खिड़कियां खुली रखने पर ही भीतर उजाला रहेगा।

- उषा जैन 'शीरीं'

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