
माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है, इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख - समृद्धि के लिए व्रत...
माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है, इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख - समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और शाम को चांद देखने के बाद व्रत खोलती हैं। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती हैं। कुछ लोग इस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए भी व्रत रखते हैं।
गणेश चतुर्थी के अलावा प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन संकष्टी चतुर्थी के दिन करने से व्यक्ति को गणेश चतुर्थी पर की गई पूजा और व्रत के बराबर फल मिलता है। इस दिन पूरे विधि विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बार चतुर्थी 23 जनवरी को 11 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ होगी और ये 24 जनवरी को 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगी।
इसी कारण 24 जनवरी को संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाएगा। प्रत्येक मास में दो चतुर्थी आती हैं, पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।

