बहस: मराठों को आरक्षण की पहल

बहस: मराठों को आरक्षण की पहल

आखिरकार एक लंबे संघर्ष के बाद महाराष्ट्र में मराठाओं ने आरक्षण पाने का रास्ता बना ही लिया। राज्य की फडणवीस सरकार ने मराठों के आरक्षण को लेकर बीते दिनों विधानसभा के पटल पर प्रस्ताव रखा और कुछ ही देर में यह बिल पास भी कर दिया गया। इस फैसले के जरिए बीजेपी सरकार ने साबित कर दिया है कि किसी खास समुदाय को उसके आर्थिक पिछड़ेपन के चलते आरक्षण दिया जा सकता है। इसके पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि लोग इंतजार करें, अच्छी खबर मिलेगी। इसके ठीक कुछ समय बाद विधानसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

बता दें कि मराठा आरक्षण को लेकर विधानसभा स्पीकर ने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी। बैठक में सीएम देवेंद्र फडणवीस, कैबिनेट की उप समिति सहित विपक्ष के सभी नेता मौजूद थे। इस सर्वदलीय बैठक को आयोजित करने के पीछे सरकार की मंशा मराठा आरक्षण को लेकर आम सहमति बनाने की थी। इससे पहले विरोधी पार्टी के नेता मराठा आरक्षण पर आई रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने की मांग कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने यह फैसला महाराष्ट्र पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही किया है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

बहरहाल इस मांग को लेकर राज्य में पिछले कुछ समय से अलग-अलग हिस्सों में विशाल यात्रएं और रैलियां आयोजित की गई थी। इसके बाद इस मांग के पक्ष में मौजूद जन-समर्थन को लेकर कोई संदेह नहीं रह गया था। इसे स्वीकार करने में अनावश्यक देरी लोगों के आक्रोश को विस्फोटक रूप दे सकती थी।

अब यह बिल उच्च सदन को भेजा जाएगा। जो बिल प्रस्तुत किया गया है, उसमें कहा गया है कि राज्य सरकार शिक्षा और रोजगार के मामले में मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण देने की पक्षधर है। सनद रहे कि बिल के मुताबिक प्रदेश सरकार यहां की 32 प्रतिशत मराठा आबादी को 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करेगी। काबिले गौर हो कि विधानसभा से मराठा आरक्षण विधेयक मंजूर होने के बाद इसे राज्यपाल के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा और उसके बाद राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर लगते ही राज्य में मराठा आरक्षण लागू हो जाएगा। इस एक्शन टेकिंग रिपोर्ट (एटीआर) में पिछड़ा वर्ग आयोग की प्रमुख सिफारिशों और उस पर सरकार द्वारा की जा रही कार्यवाही की जानकारी भी दी गई है।

मतलब साफ है कि मराठाओं को आरक्षण का झुनझुना दिखाकर भाजपा आने वाले समय में वोट बटोरने की राजनीति कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार ने मराठा आरक्षण की मांग को स्वीकार करके जनभावना को सम्मान देने का काम भी किया है। हालांकि इस बिल के प्रस्तावित होने के बाद से ही अनेक तरह के सवाल उठने लगे हैं। मसलन आरक्षण सिर्फ गरीबी के आधार पर हो। आयकर चुकाने वालों को किसी भी प्रकार का आरक्षण व सब्सिडी नहीं दी जाए। इस बिल के प्रस्ताव के समय ही राज्य सरकार ने विधानसभा में साफ कहा कि इससे ओबीसी आरक्षण में किसी तरह की कमी नहीं की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में कुल 52 प्रतिशत आरक्षण है। आपको बता दें कि राज्य में 79 प्रतिशत ं मराठा खेतिहर हैं। राज्य में मराठा समाज की आबादी कुल जनसंख्या का 32.4 प्रतिशत है। राज्य में मराठाओं की एक बड़ी आबादी होने के बाद भी उनको राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल नहीं हुआ। मराठा समुदाय के ज्यादातर लोग बेहद कठिन आर्थिक स्थितियों में गुजारा करने को मजबूर हैं। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

बहरहाल यह याद रखना जरूरी है कि महाराष्ट्र में 52 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। इस फैसले के लागू होते ही आरक्षण प्रतिशत बढ़कर 68 हो जाएगा जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 5० फीसदी की सीमा से कहीं ज्यादा है। ऐसा अभी तक सिर्फ एक राज्य तमिलनाडु में ही हो सका है जहां की 69 फीसदी आरक्षण व्यवस्था को 1994 में संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर लिया गया। देखना होगा कि क्या महाराष्ट्र इस तरह का दूसरा अपवाद बन पाता है। फिलहाल तो इस फैसले के समर्थकों को दुआ करनी होगी कि प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव को अदालत में चुनौती न मिले। हालांकि सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि उनकी तैयारी पूरी है और अगर मामला अदालत में जाता भी है तो मजबूती से इसका बचाव किया जाएगा।

कुछेक चुनौतियां अन्य स्तरों पर भी आने वाली हैं। महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार इस फैसले के जरिए साबित कर चुकी है कि किसी खास समुदाय को उसके आर्थिक पिछड़ेपन के चलते आरक्षण दिया जा सकता है। ऐसे में ठीक यही दलील पार्टी की अन्य राज्य सरकारों को भी सुनने को मिलेगी। गुजरात में पटेल और हरियाणा में जाट इसे अपने लिए ब्रह्मास्त्र की तरह लेंगे। राजस्थान में गुर्जर समुदाय की ओर से ठीक यही तर्क अपने आरक्षण का दर्जा बदलने के लिए दिया जाता रहा है।

तात्कालिकता से ऊपर उठ कर देखें तो एक समाज और राष्ट्र के रूप में हमें आरक्षण की निरंतर फैलती मांग का कोई ऐसा हल ढूंढना होगा जिसमें सभी समुदायों की आकांक्षाओं के लिए पर्याप्त मौके सुनिश्चित हों। बहरहाल इस प्रस्ताव ने आरक्षण की मांग को नए सिरे से हवा दे दी है। देखना यह है कि मराठाओं को यह आरक्षण मिल पाएगा या फिर कोर्ट कचहरी के फेर में उलझ कर रह जाएगा।

- संजय रोकड़े

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