Read latest updates about "वे कहते हैं" - Page 2

  • राष्ट्ररंग: जिन्ना की तस्वीर और तदबीर दोनों डरावनी हैं

    भारत विभाजन के जिम्मेवार और पाकिस्तान के पैरोकार दिवंगत राजनेता मोहम्मद अली जिन्ना एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, उनकी तस्वीर और तदबीर से जुड़ीं स्मृतियां इतनी भयावह हैं कि भारत के बहुसंख्यक लोग अब भी उनकी बात छिड़ते ही खौफजदा हो जाते हैं। गत दिनों अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ...

  • राजनीति: सधी चाल पर तुरूप चाल

    कांग्रेस के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका शीर्ष नेतृत्व क्षमताविहीन है। इस कारण स्वयं को अति सक्रिय और क्षमतावान समझने वाले कुछ लोगों का एक गुट शीर्ष के चारों ओर कुंडली मारकर बैठा है और अपनी-अपनी ढपली बजा कर, अपनी निजी धारणाओं और अवस्थापनाओं के अनुसार नेतृत्व को नचाने का प्रयास करता रहता है।...

  • राजनीति: सत्ता का मोह कभी नहीं छूटता

    वाकई हमारा देश महान है। 21 से 25 वर्ष की उम्र में जिलाधिकारी बना जा सकता है किन्तु मंत्री नहीं। राजीव गांधी अपवाद रहे हैं अन्यथा 40 के अन्दर का कोई भी नेता कभी भी महत्त्वपूर्ण पद पर आसीन नहीं हो पाया। सत्ता के मोह में अंधे नेताओं से स्वेच्छापूर्वक सेवानिवृत्ति की उम्मीद करना सिवाय बेईमानी के कुछ और...

  • प्रश्न चिन्ह: क्या अदालतें जनभावनाओं के अनुरूप फैसले देंगी

    अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कानून में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्णय के बाद देश में दलित आंदोलन नये सिरे से मुखर हो गया है। कानून में बदलाव देश के उच्चतम न्यायालय ने किया। बावजूद इसके सवालों के घेरे में केंद्र सरकार है। केंद्र सरकार का सवालों के घेरे में होना लाजिमी भी है। आखिरकार देश की जनता...

  • अंतर्राष्ट्रीय: सीरिया पर मित्र राष्ट्रों का आक्रमण और भारत की भूमिका

    तो क्या सचमुच विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया है? लिहाजा सीरिया पर अमेरिकी मित्र राष्ट्रों की सेना ने हवाई हमला कर निस्संदेह रूप से रूस को उकसाया है। रूस की अगली कार्रवाई क्या होगी, यह देखना अभी बाकी है लेकिन इतना तो तय है कि अब रूस भी प्रतिरक्षात्मक रवैय्या अपनाने में अपने आप को असहज महसूस करेगा। कतिपय...

  • राष्ट्ररंग : पेट्रो पदार्थों की कीमतों ने तोड़ी कमर

    पेट्रोल-डीजल की कीमतें अबतक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। बढ़ी कीमतों ने चारों ओर हाहाकार मचा दिया है। पेट्रो की कीमतें रोज नए रिकार्ड बना रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में इस समय पेट्रोल और डीजल का दाम अब तक के इतिहास में इतना महंगा कभी नहीं हुआ। बढ़ी कीमतों ने सबसे ज्यादा असर किसानों पर...

  • राष्ट्ररंग: समाज का हिंसक हो जाना चिंताजनक है

    प्राचीन काल से हम सत्य, अहिंसा और शांति के पुजारी रहे हैं। यह हमारी खामी भी रही है और खूबी भी। खामी इसलिए कि इस रीति-नीति को विदेशी आक्रांताओं ने हमारी कमजोरी समझ आक्रमण किया और हम पर राज किया। खूबी इसलिए कि वैश्विक पटल पर हमारी इस नीति को हमेशा सराहा गया। सम्राट अशोक, गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी...

  • सज गई हैं शिक्षा की दुकानें

    महानगरों में बच्चों का स्कूल में दाखिला किसी भी सूरत में किसी आपातकालीन स्थिति सरीखा, किसी बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा की तरह और उससे भी बढ़ कर अपने स्टेटस में एक विशेष तमगा लगाने जैसा कुछ कुछ हो गया है। इस समय पर स्कूल प्रशासनों की मनमानी अपने चरम पर होती है। स्थिति इतनी विकट होती है कि...

  • मुद्दा : साध्वी बनाने का औचित्य

    एक-डेढ़ दशक पूर्व की बात है। एक टीवी चैनल पर एक समाचार दिखलाया जा रहा था। मध्य प्रदेश के एक शहर (शायद इंदौर) में एक साध्वी ने अपने आत्मबल से आत्मोत्सर्ग कर लिया। रिपोर्टर चीख-चीखकर साध्वी के आत्मोत्सर्ग को महिमामंडित करने में लगा हुआ था। कैमरा उस कमरे पर केंद्रित था जहाँ साध्वी ने तथाकथित...

  • व्यंग्य: पॉलिटिक्स पुराण

    आज सारा देश पॉलिटिक्स में जुटा है। बच्चे-बूढ़े-जवान, कमजोर- बलवान सारे पॉलिटिक्स कर रहे हैं। पॉलिटिक्स से कोई अछूता नहीं बचा है। जहां भी जाओ, पॉलिटिक्स पहले ही पहुंच जाती है। कल राजनीति थी। आज सर्वत्र पॉलिटिक्स है। राजनीति हर कोई नहीं कर सकता। राजनीति के लिए राजा होना जरूरी है और उसके पास राजपाट...

  • राजनीति: राहुल गांधी - कमजोर कंधे, भारी जिम्मेवारी

    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी की बागडोर संभाले 4 महीने का समय बीता है और अभी सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या वे गांधी-नेहरू खानदान के महाराजा दलीप सिंह साबित होंगे ? इतिहास का सिंहावलोकन किया जाए तो सामने आता है कि अतीत में अनेकों ऐसे महान शासक हुए जिनकी संतानें उतनी योग्य नहीं हुईं और उनके...

  • मुद्दा: नल से दूर होता जल और हमारी लापरवाही

    गत मास विश्व जल दिवस मनाया गया। जिस जल के बिना एक दिन भी रहना मुश्किल है, उसके लिए वर्ष में केवल एक दिन होना सवाल खड़े करता है क्योंकि विश्व बहुत तेजी से डे जीरो की ओर बढ़ रहा है। डे जीरो का मतलब है- वह दिन जब नल से जल आना बंद हो जाएगा। 'डे जीरो' कोरी कल्पना नहीं है। इन दिनों विश्व के सबसे खूबसूरत...

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