Read latest updates about "वे कहते हैं" - Page 2

  • विश्लेषण: छद्म युद्ध झेलते भारत में युद्ध को 'न' की डफली

    भारत सदैव से एक शांतिप्रिय देश रहा है। हमने कभी भी आगे बढ़कर युद्ध नहीं किया लेकिन जब भी किसी दुश्मन ने हमें चुनौती दी है हमने डटकर उस चुनौती को स्वीकारा है और दुश्मन को धूल चटाई है। आज जो पाकिस्तान हमारे साथ सीधे युद्ध न कर छद्म युद्ध कर रहा है। उसका कारण भी यही है कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति...

  • राष्ट्ररंग: अधिकतर नेता जनता के सगे नहीं हैं

    देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने वाले शहीद, महापुरूष,वीर व देशभक्त जिनके खून से सींचा गया हिन्दुस्तान की आजादी का बगीचा लेकिन आज देश को बर्बाद करने की कसम खाए कुछ नेता व दल जो केवल अपनी स्वार्थपरता के लिए लोग क्या देश को दांव लगाने पर तैयार हैं और देश की जनता भी इन जांति व धर्म के...

  • नेताओं की गंदी राजनीति ही देश के विकास में बाधक

    जब 1947 में भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो इस बंटवारे के बाद अनगिनत लोग दंगे में मारे गये जो भारत और पाकिस्तान के आम जनता के लिये बहुत ही बुरा साबित हुआ। आज जब हम उस त्रसदी पर नजर डालते हैं तो लगता है कि वास्तव में कुछ स्वार्थी किस्म के नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने या हीरो बनने के चक्कर में भारत...

  • विश्लेषण: अद्वितीय होगा आगामी चुनाव

    आयोग ने देश में लोकसभा आम चुनाव के लिए रणभेरी बजा दी एवं चुनाव महासंग्राम का शंखनाद कर दिया और 17वीं लोकसभा के लिए चुनाव कार्यक्र म की विधिवत घोषणा कर दी। इसके साथ ही समूचे देश में आचार संहिता प्रभावी हो गई है। अब नेताओं से लेकर जनमानस सबके मन में यह महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठ रहा है कि अबकी बार किसकी...

  • मोदी का अंधा विरोध

    मोदी का अन्धा विरोध कुछ भी करवा सकता है। इस चक्कर में अपनी सेना के खिलाफ जाकर पाकिस्तान के साथ लोग खड़े हो गये हैं। हमारा पूरा सुरक्षा तंत्र जिसमें इसरो, थलसेना और वायुसेना ने पूरे दस दिन तक दुश्मन के इलाके की निगरानी की और अन्त में सर्जिकल स्ट्राइक की और दुश्मन के पूरे आतंकवादी कैम्प को उड़ा दिया।...

  • राजनीति: प्रियंका का सियासत में तेजी से बढ़ता हुआ कद

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा फेर बदल जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जनता के बीच प्रियंका का करिश्मा काम आने लगा है। कई पार्टी के नेताओं का झुकाव अब सीधे-सीधे कांग्रेस की ओर दिखाई देने लगा है। कांग्रेस ने भाजपा में भी सेंध लगाने का कार्य किया जिसका रूप बहराइच से सांसद सावित्रीबाई फूले के रूप...

  • विश्लेषण: ओआईसी आमंत्रण-पाकिस्तान पर भारत की एक और कूटनीतिक विजय

    विगत सप्ताह मीडिया ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के स्वार्थ के चलते पूरे दिन विंग कमांडर अभिनन्दन बर्धमान की भारत वापसी को पूरी तरह भुनाया, मगर वह यह भूल गया कि इससे भी बड़ी खबर को उसने अपने निहित स्वार्थों की बलि चढ़ाने का जाने अनजाने अपराध कर दिया है। सच बात तो यह है कि दृृश्य मीडिया ने भारतीय राजनीति को...

  • बहस: एयर स्ट्राइक, वयं पंचाधिकम शतम

    एयर स्ट्राइक, वयं पंचाधिकम् शतम अर्थात् हम सौ और पांच नहीं, एक सौ पांच हैं। अपने मुखिया की कन्या से दुर्व्यवहार के बाद गंधर्वों द्वारा दुर्योधन को बंदी बनाए जाने का समाचार सुनते ही धर्मराज युधिष्ठिर अपने अनुज भीम को उसे मुक्त करवाने का आदेश देते हैं। कौरवों की दुष्टता का संदर्भ देते हुए भीम जब...

  • मुद्दा: सीबीआई का राजनीतिकरण किया जाना लोकतंत्र के हित में कदापि नहीं!

    किसी भी भ्रष्टाचार से जुड़े आर्थिक अपराध संबंधित गलत कार्य पर जांच का पूरा अधिकार सीबीआई विभाग को है। इस तरह के कार्य में सरकार एवं प्रशासन सहित समाज के हर जागरूक वर्ग को सहयोग देना नैतिक कर्तव्य बन जाता है पर अभी पं. बंगाल में सारदा और रोजवैरी चिटफंड घोटाले के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश...

  • विश्लेषण: रेल बजट खत्म के बाद भी हो रहे हैं हादसे

    रेलबजट का आम बजट में विलय करने का मकसद था भारतीय रेल नेटवर्क को मजबूत करना लेकिन रिजल्ट कुछ खास नहीं निकला। रेलवे की स्थिति पहले ही जैसी है। हादसे रूके नहीं बल्कि लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक और बड़ा रेल हादसा हो गया। शनिवार को रात के समय सीमांचल एक्सप्रेस ट्रेन के 11 डिब्बे सहदेई बुजुर्ग रेलवे...

  • राजनीति: अंतरिम बजट 2019 की कसौटी पर कसते सवाल दर सवाल

    केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के विकास सम्बन्धी अपने दावे-प्रतिदावे हैं जबकि उसके चक्कर में उलझी हुई अवाम की अपनी-अपनी आर्थिक त्रासदियां। देखा जाए तो सबकी अलग-अलग और नित्य नई उठती परेशानियां ऐसा रूप अख्तियार कर चुकी हैं कि सबका साथ-सबका विकास का नारा भी अब बेमानी प्रतीत होने लगा है। यह सही है...

  • मुद्दा: चुनाव प्रधान देश है भारत

    भारत एक ऐसा विचित्र देश है जहां हर समय कहीं न कहीं, किसी न किसी अथारिटी के चुनाव चलते रहते हैं। विधानसभा के हुए तो लोकसभा के हाजिर। यह निपटे तो राज्यसभा सामने है। इससे निपटे तो पंचायत आदि में जुटो। इनसे निजात पाई तो विधान परिषद, नगर परिषद आदि के लिए न्यौता तैयार। एक समय कहा जाता था कि भारत एक कृषि...

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