कविताः मुस्कुराहट

कविताः मुस्कुराहट

मुस्कुराहट पे तेरी, वारि-वारि जाऊं मैं

ओ मेरे लाल हर बुरी नजर से बचाऊं मैं।।

तुझे सिन्चू संस्कार के खाद-पानी से

मेरे काजल से टीका काला लगाऊं मैं।।

तू बनेगा प्रहरी एक दिन देश का अपने

मां भारती के चरणों में आ झुकाऊं मैं।।

कभी झुकने न देना तू तिरंगे को सुन

आ तुझे देश भक्ति का पाठ पढ़ाऊं मैं।।

माता-पिता की तू तारा है आंखों का प्यारा

आ तुझे हर बला से मेरे लाल बचाऊं मैं।।

होके बड़ा तू सबका करेगा सम्मान

ऐसी पाठशाला में बेटे तुझे पढ़ाऊं मैं।।

दूर दुनिया के हर रंज-ओ-गम रहे तुझसे

सीख मेहनत की तुझको दे जाऊं मैं।।

मां की ममता कभी कमजोर न करे तुझको

सुदृढ़ चट्टान से भी ज्यादा बनाऊं मैं।।

कोई उंगली कभी न उठने पाये तुझ पर

सीख ऐसी जीवन में तुझको दे जाऊं मैं।।

मां के जैसा न होगा गुरु कोई जग में

राम-कृष्ण सा आदर्श तुझको सिखाऊं मैं।।

- सविता वर्मा

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