कविता: एक कप कॉफी

कविता: एक कप कॉफी

आईये पियेंगे एक कप कॉफी

कभी भी जब कोई

ऑफर करे कॉफी कर देना हां

और रख लेना उसका मान

क्योंकि सिर्फ कॉफी पिलाना

ही मकसद नहीं उसका

वो बैठना चाहता है तुम्हारे साथ

बिताना चाहता है प्यार के दो पल

तुमसे बाते करते हुए

कुछ अपनी कहते हुए

कुछ तुम्हारी सुनते हुए

वो खोलना चाहता है

दिल की कोई गिरह

और पाना चाहता है सुकून

सपनों की डोरी बुन्ते हुए

खोना चाहता है सुनहरी यादों में

तुम्हारी हां में हां सुनते हुए

मत करना इन्कार उस

एक कप कॉफी को

जो दे देगी किसी को कुछ ऐसे लम्हे

जिनमें बिता लेगा वो प्यार के ऐसे पल

जिनको याद करते आयेगी मुस्कराहट

किसी के सूखते होंठो पर

- समाजसेवी लवी अग्रवाल

रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

Share it
Top