बाल जगत / जानकारी: पशु-पक्षियों संबंधी कुछ रोचक एवं आश्चर्यजनक बातें

बाल जगत / जानकारी: पशु-पक्षियों संबंधी कुछ रोचक एवं आश्चर्यजनक बातें

सभी पक्षी गाते हैं या चहचहाते हैं, ऐसी बात नहीं है। जंघील या दोख तथा इसकी जाति के कई पक्षी गूंगे होते हैं, उसी प्रकार पशुओं में जिराफ भी गूंगा होता है। सारस हमारे देश का सबसे बड़ा पक्षी है। सारस की जोड़ी का प्रेम सर्वविदित है। इतना ही नहीं, यह पक्षी मनुष्यों की भांति एक पत्नीव्रत व एक पतिव्रत का पालन करने के अपने विलक्षण गुण के लिए प्रसिद्ध हैं। मादा द्वारा दिए गए एक या दो अंडों को नर व मादा सारस बारी-बारी से सहयोग के आधार पर सेते हैं।

शेर और हाथी की लड़ाई बहुत रोमांचक होती है किन्तु बहुधा दोनों समझदारी से काम लेते हैं और आमने सामने की किसी विकट स्थिति को छोड़कर अधिकांश समय वे अपना अपना रास्ता बदल लेते हैं। ठीक भी है। लड़ाई से समस्याओं का हल नहीं हुआ करता।

सिंह या बब्बर शेर जंगल का राजा माना जाता है पर यह स्वभाव से आलसी होता है। ये भी मनुष्यों पर बिना कारण हमला नहीं करते और कई बार तो बहुधा हमले को टाल ही जाते हैं जब इनका पेट भरा होता है। कई बार सिंह टोली बनाकर अपने साथियों सिंहों और शेरनियों के साथ बाकायदा दल सहित व योजना बना कर शिकार करते हैं। इस समय शेरनियां बहुधा शिकार के भागने के संभावित स्थान में छिप जाती हैं। शिकार के वहां से गुजरने पर एकाएक हमला कर देती हैं। " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

भालू स्वभाव से ही खतरनाक होता है। उसे शहद व महुआ के फूल जैसी मीठी चीजें खाने में बड़ा आनन्द आता है। मधुमक्खियों के छत्तों में मुंह डाल कर भालू बड़े आराम से मधुपान करता है। चूंकि शरीर बालों से ढंका होता है अत: मधुमक्खियां उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाती हैं। जंगल में मनुष्य से लड़ते समय पैरों के बल खड़ा होकर भालू मनुष्य के चेहरे पर सीधा आक्रमण कर उसे निढाल कर देता है।

साही नेवले के समान ही दिखता है पर उसके शरीर पर पांच से नौ इंच लंबे कांटेनुमा बाल होते हैं अत: जंगल का हरेक प्राणी उससे बच कर रहने में अपनी भलाई समझता है। मगरमच्छ की भांति ऊदबिलाव भी पानी व जमीन दोनों जगह रहते हैं। ऊदबिलाव नदी किनारे नरम मिट्टी को खोद कर उसमें अपना बिल बनाते हैं। मादाबिलाव एक बार में दो-तीन बच्चों को जन्म देती है।

मादा मगरमच्छ एक बार में बीस से पचास अंडे देती है। वह इन अंडों को नदी किनारे रेत में घास-फूस आदि से ढक देती है। ये अंडे सूर्य की गर्मी में पकते हैं और लगभग दो माह बाद इनमें से बच्चे निकलते हैं। ये अपना भोजन जैसे छोटी-छोटी मछलियां और कीड़े आदि स्वयं ढूंढते हैं। " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

कहते हैं कुछ माता-पिता अपने बच्चों के शत्रु होते हैं। इनमें मगरमच्छ प्रमुख है। जिस प्रकार अनेक पशु-पक्षी अपने बच्चों या अंडों को खा जाते हैं उसी प्रकार मगरमच्छ भी अपने अंडों को खा जाते हैं। इनके अंडे कौवे, गिद्ध आदि को भी बहुत पसन्द होते हैं। इसलिए इनके बच्चों की संख्या पांच से सात प्रतिशत से अधिक नहीं बचती। मगरमच्छ उभयचर प्राणी होते हैं किन्तु ये पानी में जन्म नहीं लेते वरन् पृथ्वी पर ही अपना अधिक विस्तार करते हैं। मगरमच्छ के समान अजगर भी अपने बच्चों के प्रति लापरवाह होते हैं।

कई बार मगरमच्छ नदी के किनारे आकर अपना मुंह खोल देते हैं। कुछ मांसाहारी पक्षी उसके दांतों में लगे मांस के टुकड़ों को खा जाते हैं। मगरमच्छ अपने दांतों की सफाई करने वाले इन पक्षियों को कोई हानि नहीं पहुंचाते। मगरमच्छों की घटती संख्या व इनके खालों की बढ़ती उपयोगिता के कारण आजकल मछली पालन की भांति मगरमच्छों का भी नियोजित ढंग से पालन किया जा रहा है।

हाथी दांतों को छोड़कर हाथी के चमड़े आदि की कोई उपयोगिता नहीं होती। केवल हाथी दांत के लिए हजारों हाथियों का शिकार प्रतिवर्ष किया जाता है किन्तु ये हाथी दांत इतने कीमती होते हैं कि जिंदा हाथी लाख का, मरने के बाद सवा लाख का यह कहावत चरितार्थ होती है।

यह सत्य है कि कस्तूरी मृग की नाभि में कस्तूरी नामक सुगंधित और दुर्लभ किन्तु एक अत्यन्त उपयोगी औषधि मिलती है। इस औषधि के कारण इन हिरणों का निरंतर शिकार होता रहता है। फलस्वरूप कस्तूरी मृग अब देखने को भी नहीं मिलते।

- राजेन्द्र राजपूत

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