बाल कथा: अंकिता परी

बाल कथा: अंकिता परी

परी लोक में अंकिता नामक एक परी थी। बहुत ही सुंदर। उसके पास सोने की छड़ी थी। छड़ी वह सदा अपने पास रखती थी।

धरती पर किसी गांव में चंदू नाम का ग्वाला रहता था। वह प्रतिदिन नदी किनारे बैठकर बांसुरी बजाया करता था।

एक दिन वह बांसुरी बजा रहा था। तभी देखा, नदी में बड़ी-बड़ी लहरें उठ रही हैं। उसमें से एक विशाल राक्षस बाहर निकला। उसके मुंह से डरावनी आवाज निकल रही थी। वह पानी से बाहर आया तो चंदू उसे देखकर मोटे तने वाले एक पीपल के पीछे छिप गया। वहां से उसने देखा, राक्षस एक बहुत सुंदर लड़की को पकड़कर गुफा की तरफ ले जा रहा था।

एक बड़ी चट्टान से गुफा का द्वार बंद था। राक्षस ने एक हाथ से चट्टान को खिसकाया। फिर वह गुफा के अंदर चला गया। थोड़ी देर बाद ही वह गुफा से निकला। चट्टान से गुफा का द्वार बंद कर, नदी में वापस चला गया।

राक्षस के जाने के काफी देर बाद, चंदू पेड़ के पीछे से बाहर निकला। गुफा के पास पहुंचकर चट्टान को खिसकाने का प्रयत्न करने लगा। चट्टान बहुत भारी थी। बहुत कोशिश के बाद भी नहीं खिसकी। हारकर चंदू वहीं बैठ गया। वह चट्टान को खिसकाने की तरकीब सोचने लगा। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

'चंदू' - अचानक उसे किसी ने आवाज दी।

वह इधर-उधर देखने लगा, पर कोई नजर नहीं आया।

'चंदू, मैं गुफा के द्वार पर रखी चट्टान बोल रही हूं' -

फिर आवाज आई। चंदू ने चट्टान की ओर देखा तो चकित रह गया। उस चट्टान के हाथ-पैर भी थे।

चट्टान बोली - 'चंदू, मुझे तुम्हारी सहायता चाहिए। मैं सामने वाली पहाड़ी की चट्टान हूं। मैं सैंकड़ों साल से अपने परिवार के साथ सुख पूर्वक रह रही थी। इस राक्षस ने मुझे मेरे परिवार से अलग कर, इस गुफा के द्वार पर ला पटका। तुम मेरी सहायता करो तो मैं फिर परिवार से मिल सकती हूं।'

'जब तुम चल-फिर सकती हो तो मेरी सहायता की क्या आवश्यकता? अपने पैरों से चली जाओ।' - चंदू ने कहा।

'हां, मैं चल-फिर सकती हूं, लेकिन राक्षस ने मुझे जादू से जकड़ रखा है। यह जादू सिर्फ तुम तोड़ सकते हो।' चट्टान ने फिर कहा।

'मैं तैयार हूं। बताओ, राक्षस का जादू कैसे टूटेगा?- चंदू ने पूछा।

'सामने जो नदी बह रही है, उसमें चांदी की बनी एक पेटी डूबी पड़ी है। उसमें एक कछुआ बंद है। तुम उस कछुए को आजाद कर दो तो मैं भी राक्षस के जादू से छूट जाऊं।'- चट्टान ने कहा।

चंदू को चट्टान हटानी थी। उसने पेटी को ढूंढने के लिए नदी में डुबकी लगाई। नदी बहुत गहरी थी। उसे पेटी नहीं मिली। वह नदी के किनारे बैठकर रोने लगा। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

तभी एक मछली उससे बोली- 'तुम क्यों रो रहे हो?'

'मुझे नदी में पड़ी चांदी की पेटी चाहिए। क्या तुम मेरी सहायता करोगी?, चंदू ने पूछा।

'मैं अभी तुम्हें वह पेटी लाकर देती हूं।' -कहकर मछली ने नदी में डुबकी लगा दी। कुछ ही देर में उसने पेटी लाकर चंदू को दे दी। चंदू ने पेटी खोली, तो कछुआ बाहर आया। चंदू ने उसे नदी के पानी में डाल दिया। उसके पानी में जाते ही गडग़ड़ाहट की आवाज होने लगी। चंदू ने पीछे मुड़कर देखा। गुफा के मुंह पर रखी चट्टान चलती हुई उसकी तरफ आ रही थी।

'चंदू, तुमने मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है'।- चट्टान ने चंदू के पास आकर कहा।

'यह उपकार मछली ने किया है' फिर उसने चट्टान से पूछा - 'राक्षस गुफा में किसको बंद करके गया है?'

चट्टान ने बताया - 'वह अंकिता परी है। राक्षस उससे शादी करना चाहता है।

'अब तो गुफा का द्वार खुल गया है। परी भाग क्यों नहीं जाती? - चंदू ने पूछा। 'परी को राक्षस ने जादू से बेहोश कर दिया है'। - चट्टान ने बताया।

'चट्टान बहन, राक्षस से परी को कैसे छुड़ाया जा सकता है? चंदू ने पूछा।

'राक्षस सिर्फ अंकिता परी की सोने की छड़ी से मर सकता है। वह छड़ी अंकिता परी के पास रखी है।' चट्टान ने कहा।

चंदू ने चट्टान को धन्यवाद दिया। वह गुफा के अंदर चला गया। गुफा में अंधेरा था। थोड़ा ही अंदर पहुंचने पर उसे प्रकाश दिख पड़ा। एक दीपक टिमटिमा रहा था। चंदू ने देखा, अंकिता परी बेहोश पड़ी है। उसने अंकिता परी की छड़ी उठा ली। गुफा में छिपकर खड़ा हो गया। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

कुछ देर में रात बीत गई। दिन निकला तो चंदू को आवाज सुनाई पड़ी। वह समझ गया, राक्षस अंदर आ रहा है।

राक्षस अंदर आया। उसने अंकिता परी को जगाया। परी से शादी करने को कहा। अंकिता परी गुस्से से बोली - 'मैं तुम से कभी शादी नहीं करूंगी।'

'अच्छा, तुझे अभी बताता हूं' - कहकर राक्षस ने जैसे ही हाथ उठाया, चंदू ने उसके सिर पर सोने की छड़ी से वार किया। छड़ी का वार ऐसा था कि राक्षस के प्राण पखेरू उड़ गए।

अंकिता परी ने चंदू को देखा। वह बोली - 'चंदू, मैं तुम्हारा बहुत आभार मानती हूं। तुमने मुझे राक्षस की कैद से छुटकारा दिलाया है। मैं इस उपकार के बदले में तुम्हें कुछ दूंगी।'

यह कहकर अंकिता परी ने चंदू के हाथ में हीरा से जड़ी सोने की अंगूठी रख दी और कहा - 'इस अंगूठी में विशेष गुण हैं। इसे पहनकर तुम जो काम करोगे, उसी में सफलता मिलेगी' - कहते हुए अंकिता परी आकाश में उड़ गई।

-नरेन्द्र

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