Read latest updates about "धर्म-दर्शन" - Page 1

  • धर्म संस्कृति: तांत्रिक सिद्धियों में काम आने वाली चीजें

    तांत्रिक क्रियाएं हकीकत हैं या ढकोसला, यह विवादित विषय है लेकिन तांत्रिकों और तंत्र में विश्वास करने वालों की संख्या बहुत बड़ी है। भूत-प्रेत अर्थात् दुष्टात्माओं को तांत्रिक काबू में करते हैं और ऐसी अदृश्य शक्तियों से मनचाहा काम करवाते हैं। ऐसा बताया जाता है कि तंत्र विद्या में निपुण होने के लिए...

  • पर्यटन: दरगाह जहां जन्माष्टमी पर मेला लगता है

    राजस्थान में एक दरगाह ऐसी भी हैं जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर मेला लगता है। झुंझुनू जिले के नरहड़ कस्बे में स्थित पवित्र हाजीब शक्करबार शाह की दरगाह कौमी एकता की जीवन्त मिशाल हैं। इस दरगाह की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां सभी धर्मों के लोगों को अपनी-अपनी धार्मिक पद्धति से पूजा अर्चना करने का...

  • संघर्षों से कामयाबी दिलाते हैं नीच भंग राजयोग

    जन्म कुंडली को जीवन का आईना कहा जाता है। जीवन का कौन सा भाग कैसा रहेगा? यह कुंडली विश्लेषण के द्वारा जाना जा सकता है। जन्मकुंड्ली में ग्रह कई अवस्थाओं में स्थित होते हैं, कुछ ग्रह उच्च, कुछ मूलत्रिकोण और कुछ नीचस्थ होते है। कुछ कुंडलियों में दो या दो से अधिक ग्रह नीच राशि में स्थित होते है।...

  • शरीर में भी होता है, सौरमंडल - क्या आप जानते है

    हमारे शरीर में भी एक ब्रह्मांड स्थित है। या यूं कहिए कि हमारा शरीर भी एक सूक्ष्म ब्रह्मांड है। विज्ञान कहता है की ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कार्य कारण सिद्धांत पर आधारित है। इसका सरल अर्थ यह हुआ कि किसी भी कार्य के लिए उससे संबंधित कारण का होना आवश्यक है। जिस प्रकार हम भोजन इसलिए खाते है कि हमें भूख...

  • ईश्वर को पुकारें स्तोत्र, चालीसा, प्रार्थनाओं से - होगा उद्धार

    स्तोत्र स्तोत्र एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है- कसीदा, स्तवन अथवा प्रशंसनात्मक ऋचाएं, स्तोत्र प्रार्थना के रूप में अथवा वर्णनात्मक अथवा बातचीत के रूप में हो सकता है किंतु इसकी संरचना काव्यात्मक ही होती है। यह सामान्य कविता हो सकती है जिसमें किसी देवी अथवा देवता की प्रसंशा की गयी हो अथवा उनके...

  • चौघड़िया और राहुकाल क्या है ? इसमें क्या करें ? क्या न करें ?

    चौघड़िया मुहूर्त शीघ्रता में यात्रा आदि शुभकार्यों का मुहूर्त आदि न बनता हो और अकस्मात कोई कार्य करना पड़े तो उस अवसर पर चौघड़िया मुहूर्त उपयोगी है। आठ चौघड़िया दिन में तथा आठ चौघड़िया रात्रि में होते हैं। दिनमान तथा रात्रिमान को पृथक-पृथक 8 भागों में विभक्त करके चौघड़िया निकाला जाता है। अमृत,...

  • सोलह संस्कार कौन से है ? सोलह संस्कारों का भारतीय संस्कृति में क्या महत्व

    सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का निर्माण किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का अग्रणी...

  • व्यक्ति की आदतों से भविष्यफल जाने ?

    बैठे-बैठे पैर हिलाना कुछ लोगों को बैठे बैठे पैर हिलाने की आदत होती हैं या जैसे ही व्यक्ति बैठता हैं उसके पैर हिलने लगते है। ऐसे में अनायास ही हम कह उठते है कि पैर हिलाना बंद करो। इस विषय में ज्योतिष शास्त्र कहता हैं कि जो व्यक्ति ऐसा करता हैं उस व्यक्ति की कुंडली में बुध और शनि दोनों ही अशुभ...

  • जन्मपत्री से रिश्तों का विवेचन - बालक भविष्य की एक अमूल्य इकाई

    एक बालक की जीवन यात्रा गर्भ में प्रवेश के साथ ही प्रारम्भ हो जाती है। हम गर्भ के रुप में अपना जन्म शुरु करते हैं और इस दौरान कई जन्मों की यात्रा करते हुए हम इस जीवन का आनंद लेते है। हम धरा पर जन्म के साथ एक कहानी लेकर आते है, जिस कहानी में अनेक किरदार होते है, जो हमारे आसपास के लोग, हमारे परिवार के...

  • यात्रा संस्मरण: गंगा नहाने का असली मजा गंगोत्री में है

    चलते चलते पहुंच गए हम गंगोत्री। वैसे तो होटल से जब निकले तो नहा कर ही चले थे मगर फिर भी हमने अपने साथ एक जोड़ी अंत:वस्त्र रख लिए थे कि भागीरथी मैया के मन्दिर में पूजा अर्चना करने से पहले नहाएंगे जरूर। बस घाट पर जाते ही हम तुरंत कपड़े लत्ते निकाल कर मोगली वाले कॉस्ट्यूम में आ गए। नदी की ओर देखा।...

  • विवाह होगा या नहीं होगा ? ज्योतिष से जाने

    किसी ने सच ही कहा है कि 'जोड़ियां स्वर्ग में तय होती हैं'। भविष्य के गर्भ में क्या छुपा हैं, यह जानने में वैदिक ज्योतिष महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. एक विद्वान ज्योतिष ईश्वरीय कृपा से जन्मपत्री के माध्यम से विवाह होगा या नहीं, शीघ्र या देरी से होगा तथा विवाह की सफलता और असफलता का संकेत देने...

  • सोलह संस्कारों के अलावा भी है कुछ प्रचलित संस्कार प्रसूता स्नान एवं कुआं पूजन

    प्रसव के बाद प्रथम स्नान को प्रसूता स्नान कहा जाता है। इस संस्कार में 4, 6, 8, 9, 12, 14 तिथियों का त्याग करें। मिश्र नक्षत्र, मूल, श्रवण, मघा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, भरणी व चित्रा नक्षत्रों का भी त्याग करें। परिवार की परम्परा के अनुसार प्रसूता स्त्री जल या कुआं का पूजन करे। यह...

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