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  • अनमोल वचन

    आत्मा ही सच्चा दीपक है। जब हम देहरूपी मिट्टी के दीये में आत्मा रूपी ज्योति जलाकर परम ज्योति परमात्मा से सम्बन्ध जोडते हैं, तभी हमारी आत्मा पावन बनती है। आज के समय अमावस्या की काली रात्रि की भांति चारों ओर अज्ञान का अन्धकार छाया है, कुछ सूझ नहीं रहा, मानव भ्रमित है। आत्मा की ज्योति बुझ रही है, चारों...

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    दीपावली के शुभ पर्व पर हममें से अधिकांश लोग यज्ञ-हवन के स्थान पर पटाखे, बम आदि छोडकर अपने वैभव का प्रदर्शन करते हैं, जो पाप है। आज के समय वायु प्रदूषण और तापमान बढने की समस्या से सारी दुनिया त्रस्त है और हम पटाखे और आतिशबाजी चलाकर उस समस्या में और वृद्धि कर रहे हैं। आईये विचार करें- क्या हम अपने धन...

  • अनमोल वचन

    दुख को यदि जीवन से अलग कर दिया जाये तो मनुष्य जीवन की चेतनता, गतिशीलता समाप्त हो जायेगी। सृजन रूक जायेगा और विकास की समस्त सम्भावनाएं समाप्त हो जायेंगी। परब्रह्म ने तप किया, कष्ट सहा, तब ही इस सृष्टि का निर्माण किया, तप ही दुख के रूप में जागत में विद्यमान है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ...

  • अनमोल वचन

    किसान तपती धूप में पसीना बहाता, ठिठुरती सर्दी में भी खेतों को सींचता है। उसकी तपस्या अन्न के दानों के रूप में सामने आती है। मजदूर दिन-रात श्रम करता है, तभी समाज को सुख के साधन प्राप्त होते हैं। विद्यार्थी वर्तमान के आराम को तिलांजलि देकर अध्ययन में निरत रहता है, तो अपने उज्जवल भविष्य का निर्माण...

  • अनमोल वचन

    जिस प्रकार ईंटों को मजबूती देने के लिये भट्टे की अग्नि से पकाया जाता है, उसी प्रकार तप रूपी ताप में पककर मानव दृढ एवं साहसी बनता है। दुख अभिशाप नहीं, वरदान है। मनुष्य आत्मा की पूर्णता त्याग से, दान से एवं तपस्या के द्वारा ही प्राप्त करता है। मनुष्य ने जो कुछ निर्माण किया है, तप से ही किया है।...

  • अनमोल वचन

    पौराणिक मान्यता है कि कर्मफल देने वाले देवता के यहां भाग्य पुस्तक में सभी मनुष्यों के कर्म लिखे जाते हैं। इसी से स्वर्ग-नरक का निर्धारण होता है, परन्तु इससे भी अधिक मान्यता ऐसे सिद्धान्त की है, जिसके अनुसार प्रत्येक कर्म का फल संचित संस्कार बनता है और मनुष्य का भावी जीवन उसी संस्कार के अनुरूप होता...

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    आज मानव का समय अधिक से अधिक मूल्यवान हो गया है। उसके पास समाज तो क्या, परिवार के लिये भी समय नहीं है। पर्व हमें परिवार में मेल-जोल बढाने तथा समाज से जोडने का काम करते हैं। ये हमें अधिक से अधिक सामाजिक संस्कारों की ओर प्रवृत्त करते हैं। हमारी संस्कृति में मिठास की भ्रांति घुली हुई पर्व परम्परा केवल...

  • अनमोल वचन

    भारत में पर्वों का विशेष महत्व है। उनके मूल में आनन्द और उल्लास का समावेश होता है। दार्शनिकों की मान्यता रही है कि सृष्टि आनन्द से उद्धभूत है, आनन्द में स्थित है और आनन्द में ही प्रवेश करती है। पर्वों का उद्देश्य प्रत्येक क्षण को आनन्द से परिपूर्ण कर देना और आनन्द की पल-पल अनुभूति का अहसास कराना भी...

  • अनमोल वचन

    भारत पर्वो का देश है। यहां वर्ष भर प्रत्येक माह, प्रत्येक पक्ष, प्रत्येक सप्ताह कोई न कोई पर्व मनाया जाता रहा है। गणगौर व्रत, नवरात्र, रामनवमी, गंगा दशहरा, नागपंचमी, रक्षा बन्धन, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, अनन्त चर्तुदशी, श्राद्ध पक्ष, दशहरा, शरद पूर्णिमा, करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली,...

  • अनमोल

    प्रेम स्वरूप परमात्मा की साधना के लिये मन में उत्कंठा जिस क्षण भी जन्म ले, हमें बिना विलम्ब किसी संत, श्रेष्ठ महापुरूष अथवा किसी आत्मीय को केन्द्र बना लें, किन्तु उसकी उत्कृष्टता, सद्गुण सम्पन्नता, विशेषताओं के प्रति श्रद्धा विश्वास का स्थायी होना आवश्यक है। जीवन में जिन आदर्शों को हम धारण करना...

  • अनमोल वचन

    यह धु्रव सत्य है कि सत्पात्र, महापुरूषों के प्रभाव से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है, क्योंकि सत्पात्र में जिज्ञासा का भाव होता है। वैसे भी महापुरूषों की सहनशीलता, क्षमा उदारता के समक्ष बडों-बडों का अभिमान काफूर हो जाता है। चैतन्य महाप्रभु के सम्पर्क से जघाई-मघाई, महर्षि वशिष्ठ के सम्पर्क से...

  • अनमोल वचन

    पानी का सम्पर्क पाकर गर्म लोहा ठंडा हो जाता है। ग्रीष्म ऋतु में तेज धूप और गरमी से झुलसने वाली लता पानी का संयोग पाकर हरी-भी बनी रहती है। गरम लू में भी लहलहाती रहती है। इसी प्रकार महापुरूषों, संत-महात्माओं का सम्पर्क पाकर संसार की विभिषिकाओं से दग्ध मनुष्य भी शांति, आराम, विश्रांति प्राप्त करता है।...

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