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  • अनमोल वचन

    जीवन के हर कार्य को नियम से, व्यवस्थित तरीके से और समय से करना एक अच्छी आदत है। उन्नति के मार्ग नियमितता की आदत से खुलते हैं। यह बनाई जाती है, भले ही उनका अभ्यास योजना बनाकर किया गया हो अथवा रूझान, वातावरण, परिस्थिति अथवा अच्छे सम्पर्कों आदि के कारणों से अनायास ही बनता चला गया हो। आदतें ही मनुष्य...

  • अनमोल वचन

    विचार व्यक्ति को केवल दिशा देते हैं और आदतें मनुष्य को किसी निर्धारित दिशा में चलने के लिये न केवल प्रेरणा देती है, वरन कई बार तो उसे वे अपने अनुरूप करा लेने को विवश तक कर देती हैं। भले ही परिस्थितियां अनुकूल न हों। नशाखोरी जैसी आदतें इसका उदाहरण हैं। स्वास्थ्य, पैसा, यश आदि की हानियों को समझते हुए...

  • अनमोल वचन

    जो ज्ञान मनुष्य के सुसंस्कारों को जागृत कर चरित्र के सर्वोत्तम तत्वों को विकसित करे, उसकी उत्तम वृत्तियों को उन्नत करे, उसी को विद्या माननी चाहिए। जो ज्ञान मनुष्य को स्वाधीन और साहसी बनाये, विद्या कहलाने का गौरव उसे ही मिलता है। जो ज्ञान मनुष्य को सही दिशा, उन्नति का सही मार्ग और जीवन का सच्ची...

  • अनमोल वचन

    विद्या केवल अक्षर ज्ञान नहीं। वह ज्ञान का पर्यायवाची है, जिसके द्वारा कत्र्तव्य बोध की प्रेरणा प्राप्त हो, स्वतंत्र रूप से विचार करने की बुद्धि विकसित हो, परिस्थितियों से टकराने की सामथ्र्य पैदा हो, अन्यथा वह विद्या निस्तेज है, निष्प्राण है। आज के समय में विद्या का स्वरूप ही बदल गया है। उसमें नैतिक...

  • अनमोल वचन

    सीखने से अधिक कठिन कार्य सिखाना है अर्थात विद्या ग्रहण करने वाले विद्यार्थी से शिक्षक का कार्य कठिन होता है। प्राचीन काल में हर प्रकार से उन्नत चरित्र वाला विद्वान ही शिक्षक बनने का साहस कर सकता था। ऐसे विद्वान को शिक्षण का कार्य सौंपा जाता था, जो अक्षर ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थी की प्रतिभा को...

  • अनमोल वचन

    धनवान वही है, जिसके पास विद्यारूपी धन है। विद्याहीन मनुष्य पशु के समान है। विद्या द्वारा ही मनुष्य जीवन सार्थक होता है, क्योंकि वही मनुष्य के आत्मविश्वास का साधन है। संसार में विद्या से बढकर कोई मित्र नहीं, अविद्या से बढकर कोई शत्रु नहीं। विद्या के कारण ही मनुष्य समाज, परिवार और जीवन के आनन्द,...

  • अनमोल वचन

    मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि मनस्थिति ही परिस्थितियों की जन्मदात्री हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही करता है और वैसा ही बन जाता है। हमारे द्वारा किये गये शुभ, अशुभ कर्म ही दुर्भाग्य अथवा सौभाग्य बनकर सामने आते हैं। उसी के आधार पर रोने-हंसने का संयोग बनता है, इसलिए परिस्थितियों की अनुकूलता और...

  • अनमोल वचन

    ईश्वर जड़ नहीं चेतन है। इसे प्रतिमाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता। चेतन वस्तुत: चेतना के साथ ही दूध पानी की तरह घुल मिल सकती है। मानवीय अन्त:करण ही ईश्वर का सबसे निकटवर्ती और सुनिश्चित स्थान हो सकता है। एक शिक्षाप्रद दृष्टांत के अनुसार मंदिर बनाने के लिये व्याकुल किसी भक्तजन ने सूफी संत से मंदिर की...

  • अनमोल वचन

    हीरा और कुछ नहीं, कोयले का ही परिष्कृत स्वरूप है। भाप से उडाया पानी ही स्रवित जल (डिस्टिल्ड वाटर) है, जिसकी शुद्धता पर विश्वास करते हुए उसे इन्जैक्शन जैसे जोखिम भरे कार्य में प्रयुक्त किया जाता है। मनुष्य और कुछ नहीं, मात्र भटका हुआ देवता है, यदि वह अपने ऊपर चढे मल आवरण और विक्षेप को उतार फेंके तो...

  • अनमोल वचन

    आईये जरा समझदारी से काम लें और बुद्धिमानों की तरह सोचना आरम्भ करें। मनुष्य जीवन ईश्वर की बहूमूल्य धरोहर है, जो स्वयं का कल्याण करने और दूसरों के कल्याण में सहायक की भूमिका निभाने के लिये मिला है। इसके लिये अपनी योजना सभी को अलग बनानी पडती है। मकडी अपना जाल स्वयं बुनती है और जब उसमें उलझ जाती है तो...

  • अनमोल वचन

    एक बडी प्रसिद्ध कहावत है 'जैसा खायें अन्न, वैसा ही हो जाये मन।' इसका अर्थ है कि हम भोजन जैसा करेंगे, हमारा मन भी वैसा ही जो जायेगा। जैसा मन होगा, उसी प्रकार के हमारे विचार होंगे, जैसे विचार होंगे, आचरण भी वैसा ही होगा, जैसा आचरण होगा, वैसा ही हमारा व्यक्तित्व होगा। हमारे व्यक्तित्व के अनुसार ही...

  • अनमोल वचन

    कर्म, ज्ञान, भक्ति तीनों की अजस्र धारा प्रवाहित करने वाले महान ग्रंथ 'गीता' के गात्रक भगवान श्रीकृष्ण जी का आज अवतरण दिवस है अर्थात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी है। अपनी उस गीता में आपने ही वचन दिया था कि जब-जब धर्म की हानि होगी, अधर्म का प्रसार होगा, तब-तब मैं पापियों का संहार करने, धार्मिक जनों की...

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