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  • अनमोल वचन

    धन आपका अच्छा सेवक भी है, अच्छा मित्र भी है और बुरा मालिक भी। धन का सही भोग करेंगे तो वह अच्छा सेवक होगा, पुण्य कार्यों में दान आदि में लगायेंगे तो अच्छा मित्र होगा और यदि धन को व्यसनों में, दुराचार में, दूसरों को नीचा दिखाने तथा अहंकार में पोषित करने में लगायेंगे तो वह जाने कैसे संकट में डाल दे,...

  • अनमोल वचन

    मानव को सगे-सम्बन्धियों पर बहुत विश्वास होता है, वह सोचता है कि कठिनाई के अवसर पर वे उसका साथ निभायेंगे, उसके साथ रहेंगे, परन्तु सगे-सम्बन्धी भी कुछ दूर तक साथ निभाते हैं, जैसे ही अग्नि के सुपुर्द किया जाता है, अथवा जल में प्रवाहित कर दिया जाता है अथवा मिट्टी में दबा दिया जाता है, सभी...

  • अनमोल वचन

    धन मानव के उस मित्र की तरह है, जो अंत समय में साथ छोड देता है, साथ नहीं जाता। धन के अम्बार लगा देने के पश्चात भी श्वासों की डोरी टूट जाती है, इसलिए धन तो कमाओ, परन्तु सम्बन्धों के मोह में पडकर उनके लिये पाप करके धन बिल्कुल न कमाओ, क्योंकि उस पाप का फल कोई दूसरा सम्बन्धी नहीं भोगेगा, केवल आपको ही...

  • अनमोल वचन

    आदर्श मैत्री वह है, जिसमें अटूट प्रेम और विश्वास हो, परस्पर ईमानदारी हो, एक-दूसरे के सहायक बनने की भावना हो। वे संरक्षक बन्धु सहायक की संज्ञा में एक साथ खरे उतरते हों। विपत्ति में भी साथ न छोडे, वही मैत्री सच्ची है। सम्बन्धों में यदि स्वार्थ आ जाये तो वह मैत्री नहीं, मित्रता के नाम पर कलंक...

  • अनमोल वचन

    जन्म के साथ ही कुछ सम्बन्ध स्वाभाविक रूप से स्थापित हो जाते हैं, जैसे माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी। इनकी स्थापना पर मानव का कोई नियंत्रण नहीं, क्योंकि ये सम्बन्ध ईश्वर द्वारा प्रदान किये जाते हैं, कुछ सम्बन्ध प्रेम और मित्रता के मनुष्य स्वयं स्थापित करता है। मनुष्य का कत्र्तव्य बनता है...

  • अनमोल वचन

    जो जन्मा है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है। अत: महत्वपूर्ण न जन्म है, न मृत्यु, क्योंकि उनमें से कुछ भी अनहोनी नहीं। महत्वपूर्ण तो जन्म और मृत्यु के मध्य का समय यह वर्तमान जीवन है। महत्वपूर्ण है जीवन रहते सम्बन्धों की स्थापना और उनके प्रति अपना कत्र्तव्य। जन्म भूत है और मृत्यु भविष्य, जीवन वर्तमान है,...

  • अनमोल वचन

    इस संसार में जितनी भी योनियां हैं, उनमें मनुष्य योनी सर्वश्रेष्ठ है। इस योनि में मनुष्य कर्म भी करता है और अपने पूर्व जन्मों के कर्मों के फल को भाग्य के रूप में भोगता भी है, जबकि अन्य योनियों में जीवन केवल अपने पूर्व जन्मों के संचित कर्मों के फलों को भोगता है। कर्मों के फल नि:संदेह सभी को प्राप्त...

  • अनमोल वचन

    कोई व्यक्ति कितने भी परिश्रम और लगन से अपने लक्ष्यों की पूर्ति में निरन्तरता बनाये रखे, फिर भी परिस्थितिवश कभी-कभी ऐसा भी होता है कि उसे सफलता न मिल पाये, तो इसे आप अपने पूर्वकृत कर्मों का फल मानकर तत्कालिक संतोष कर सकते हैं, किन्तु अपने प्रयासों में ढील किंचित न आने दें। आज जो कर लेंगे, वही तो कल...

  • अनमोल वचन

    कुछ व्यक्ति स्वाभाव से ईष्र्यालु प्रवृत्ति के होते हैं। दूसरों का कुछ भी अच्छा देखकर वे कुढते रहते हैं। अपने पडौसी, निकट के पारिवारिक सम्बन्धी को साधन सम्पन्न देखकर ईर्ष्या से जलते रहते हैं। सोचते है कि यह व्यक्ति कितना भाग्यशाली है, भगवान ने उसे गाडी दी, रहने को शानदार कोठी दी, नौकर...

  • अनमोल वचन

    अपने सुख-दुख, उन्नति-अवनति, कल्याण-अकल्याण और स्वर्ग-नरक का कारण मनुष्य स्वयं है, फिर दुख या आपत्ति के समय भाग्य के नाम पर संतोष कर लेना और भावी सुधार के प्रति अकर्मण्य बन जाना ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति आने पर हमें यह अनुभव कर लेना चाहिए कि अवश्य ही कोई न कोई भूल हुई है, उस पर पश्चाताप कैसे किया...

  • अनमोल वचन

    हमें अपने देश भारत से प्यार करना चाहिए, जैसे हम अपने परिवार से करते हैं। यदि हम वास्तव में मनुष्य हैं तो किसी परिजन को कुछ कष्ट हो जाये तो हम व्याकुल हो जाते हैं, किन्तु क्या वास्तव में हम अपने देश को भी उसी प्रकार प्यार करते हैं? नहीं न? हम देश के कानून का सम्मान नहीं करते, वरन उसकी अवहेलना करना...

  • अनमोल वचन

    आदमी जब किसी कार्य में असफल हो जाता है, काम बिगड जाता है तो भाग्य का रोना रोता है, परन्तु सच्चाई यह है कि हम अपने कार्य के प्रति इतने निष्ठावान नहीं रहे, सचेत नहीं रहे। इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि हमें अपने पूर्व कर्मों के कारण भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पडता है। प्रकृति के विधान के...

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