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  • अनमोल वचन

    व्यक्ति तीन प्रकार के होते हैं। एक वे जो किसी काम के बारे में सुनते ही कह देते हैं कि यह काम मुझसे होगा ही नहीं। दूसरे वे जो करना तो चाहते हैं, उसे शुरू भी करते हैं, परन्तु किसी कठिनाई के आते ही उसे छोडकर पीछे लड्डौट जाते हैं, नहीं सोचते कि अंजाम क्या होगा। तीसरे वे जो काम शुरू करने से पहले दस...

  • अनमोल वचन

    व्यक्ति तीन प्रकार के होते हैं। एक वे जो किसी काम के बारे में सुनते ही कह देते हैं कि यह काम मुझसे होगा ही नहीं। दूसरे वे जो करना तो चाहते हैं, उसे शुरू भी करते हैं, परन्तु किसी कठिनाई के आते ही उसे छोडकर पीछे लौट जाते हैं, नहीं सोचते कि अंजाम क्या होगा। तीसरे वे जो काम शुरू करने से पहले दस बार...

  • अनमोल वचन

    परमात्मा को असीम तथा अनन्त के बारे में उपनिषदों में बहुत कुछ विरोधाभाषी प्रतीत होने लगता है, परन्तु ऐसा है नहीं। इनमें से एक बात है कि अंश हमेशा पूर्ण के बराबर होता है, क्योंकि अनन्त को बांटा नहीं जा सकता। ठीक वैसे ही जैसे कि आकाश का विभाजन सम्भव नहीं। कहने वाले भले ही कहे मेरे घर के ऊपर का आकाश...

  • अनमोल वचन

    मन तो बस दर्पण है। यदि वह स्वच्छ है, शुद्ध है तो असीम (परमेश्वर) प्रतिबिंबित हो सकता है। हां यह प्रतिबिम्ब असीम न होगा पर झलक अवश्य होगी उसकी परन्तु वही झलक बाद में द्वार बन जाती है। प्रतिबिम्ब पीछे छूट जाता है और अनन्त में प्रवेश मिल जाता है। बाहरी तौर पर यह बात अटपटी लग सकती है। भला कैसे इतने...

  • अनमोल वचन

    धन संचय की प्रवृत्ति मनुष्य में सदा से रही है। संत लोग इसे आदमी की दुर्बलता या अविश्वासी प्रवृत्ति भी कहते हैं, क्योंकि संचय करने के पीछे एक प्रकार का अविश्वास ही होता है कि क्या भरोसा कि कल परमात्मा देगा कि नहीं देगा। इसलिए कल के लिए आज ही बचाकर रख लें। वास्तव में संचय का अर्थ अपनी आवश्यकताओं से...

  • अनमोल वचन

    विश्वास मन को स्थिर और दृढ करने और रखने की श्रेष्ठ विधि है। विश्वास के विपरीत जितने भी तत्व हैं वे सभी मन को अस्थिर और कमजोर करते हैं। संशय, संदेह, भय, भ्रम मन में जितने बढेंगे, मन उतना ही चंचल और दुर्बल होगा। विश्वास का केन्द्र जैसा है मन की स्थिरता और दृढता भी वैसी ही होगी। विश्वास यदि सामान्य जन...

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    दान से बडा न तो कोई पुण्य है, न ही कोई धर्म। किसी भी प्रकार का दान यदि निष्काम भाव से किया जाता है तो उसका श्रेष्ठफल प्राप्त होता है। दान इस भाव से करें कि भगवान प्रसन्न हों और उनकी प्रसन्नता के लिये ही दान कर रहा हूं। महत्वपूर्ण यह भी है कि जब कभी दान करें तो मत बताएं कि कितना दान किया, बांयें हाथ...

  • अनमोल वचन

    किसी के व्यक्तित्व की पहचान उसके रंग-रूप, धन-वैभव, पहनावे से नहीं होती, बल्कि उसकी सबसे बडी सम्पदा उसका चरित्र है। वह सोचता, बोलता और करता क्या है, उसके आधार पर उसके व्यक्तित्व को परखा जाता है। चरित्र ही व्यक्तित्व की सच्ची कसौटी है। किसी विचारक ने सही कहा कि यदि धन नष्ट हो गया, कुछ नष्ट नहीं हुआ,...

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    हमारे जीवन में सुख और दुख दोनों बारी-बारी से आते रहते हैं, किन्तु बुद्धिमानी यही है कि हम दोनों ही परिस्थितियों में सामान्य रहें, सहज रहें। जीवन जीने की कला यही है कि जब हमारे जीवन में सुख का समय आये तो जी भरके हंस लेनाचाहिए और जब दुख आये तो उन्हें हंसी में उडा देना चाहिए। समय चाहे सुख वाला हो या...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य का जीवन सुख-दुख, आशा-निराशा और सफलता-असफलता का मिश्रण है। कभी हम सोचते हैं कि ऐसा करेंगे तो सफलता मिलेगी, परन्तु दूसरे ही पल हमें अपनी सफलता पर संदेह होने लगता है और फिर हम किन्तु-परन्तु के चक्कर में पड जाते हैं, यह हम पर निर्भर है कि हम किस दृष्टिकोण को अपनाते हैं। यदि हम आशावान बनकर सफलता...

  • अनमोल वचन

    अपना पेट भरने के लिये तो पशु-पक्षी आदि समस्त प्राणी प्रयत्न करते हैं, मनुष्य की श्रेष्ठता इस बात में है कि वह दूसरों के हित के लिये भी चिंतन करे, हम जो भी बोलें, मधुर बोलें, सत्य बोलें, ऐसा बोलें जो किसी के दिल को आहत न करे, जो किसी के कष्ट का कारण न बने। आप अपनी वाणी का उपयोग तलवार की तरह भी कर...

  • अनमोल वचन

    हम दूसरों की पीडा को अपनी पीडा समझकर जियें। अपने दुख से दुखी होकर तो हर कोई आंसू बहा लेता है, किन्तु सच्चा इन्सान धार्मिक, ज्ञानी तो वही है, जिसकी आंखें दूसरों के दुख और पीडा देखकर छलछला आती है। मनुष्य तो वही है जो दूसरों के दुख-दर्द को पहचानता है और उन्हें दूर भी करता है। जो दूसरों की पीडा को न...

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