Read latest updates about "अनमोल वचन" - Page 1

  • अनमोल वचन

    कर्म और कत्र्तव्य ये दो ऐसे शब्द हैं, जिनसे हर मनुष्य का वास्ता पडता है। कर्म किये बिना कोई भी व्यक्ति इस संसार में नहीं रह सकता। यदि कोई न भी चाहे तो भी वह कर्म करता है और वह जैसा कर्म करता है, उसके अनुरूप उसका फल भी मिलता है। यदि कोई न भी चाहे तो श्वास लेगा। न चाहते हुए भी विचार करने को वह स्वयं...

  • अनमोल वचन

    कामनाएं असीम हैं, क्या इनका कभी अन्त हुआ है? ये तो सदैव बढती जाती हैं। जब विवेक जागता है, तभी ये शांत होती हैं। जब कामनाएं शांत हो जाती हैं, तभी हम तृप्त होते हैं। जहां हम हैं, जैसे भी हैं, उसी में आनन्द से परिपूर्ण हो जाते हैं, जैसे हम हैं, उसी में गदगद हो जाते हैं। उसी क्षण कामनाओं के बुलबुले से...

  • अनमोल वचन

    आज देश को स्वतंत्र हुए 71 वर्ष पूरे हुए, 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाने को उद्यत है। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये कितनी माताओं के सपूतों ने हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर किये, नई पीढी को कदाचित ज्ञात ही नहीं। गुलामी के अभिशाप से वे अनभिज्ञ हैं। इसीलिये उन्होंने स्वतंत्रता के मायने स्वछन्दता मान लिया।...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य की एक बड़ी दुर्बलता यह है कि अपने प्रारब्ध के अनुसार हमें जो भी प्राप्त है, उससे वह तृप्त और संतुष्ट नहीं होता। कुछ और बन जाये, कुछ और मिल जाये तो तृप्ति हो जाये। गांव के सरपंच की चाहत होती है कि वह विधायक बन जाये। सरपंच होने में जितनी मान प्रतिष्ठा है, विधायक बनने में उससे अधिक है। जब...

  • अनमोल वचन

    कामना में चाहत में संसार बसता है और जब तक चाहतें बनी रहती हैं, तब तक संसार से पीछा छूट नहीं सकता। संसार का अर्थ है सुख की खोज में भटकने वाला भ्रांत मन। भटकाव केवल सुख की प्राप्ति के लिये होती है, कहीं से भी किसी से भी एक क्षण के लिये सुख मिल जाये और यदि मिल भी जाये तो वह अन्य सुख दीर्घ सुख में...

  • अनमोल वचन

    यजुर्वेद के एक मंत्र का अंश 'अहम् ब्रह्मास्मि' का अर्थ बहुत विस्तृत है, परन्तु वर्तमान समय में अधिकांश व्यक्ति 'अहम् ब्रह्मास्मि' को मैं और केवल मैं एवं केवल मेरा को अपनी जीवन शैली का केन्द्र बना चुके हैं। उनके इस 'मैं' के दायरे में घर- परिवार, पास-पडौस, समाज और देश तो दूर, भाई-बहन, मित्र सम्बन्धी,...

  • अनमोल वचन

    'अहम् ब्रह्मास्मि' का अर्थ यह समझ लेना भूल होगी कि मैं भगवान हूं, इसका भाव यह है कि मैं स्वयं ब्रह्म अर्थात निर्माण, कर्ता, सृजन कर्ता, निर्माता हूं। इस परिपेक्ष्य में इसका अर्थ हुआ- मैं स्वयं अपना निर्माता हूं। शाब्दिक अर्थ के अतिरिक्त इस वाक्य का आध्यात्मिक अर्थ है- मैं ईश्वर का अंश हूं, उसी...

  • अनमोल वचन

    कामनाएं प्राय: सभी करते हैं, वे पूरी हो अथवा न हो। कामना पूरी न होने पर क्रोध उपजता है और क्रोध वह अग्नि है, जिसमें सब कुछ स्वाहा हो जाता है। क्रोध से कुछ भी अच्छा होने की आशा नहीं की जा सकती, बना बनाया कार्य भी क्रोध से बिगड जाता है। क्रोध से ही तो विनाश एवं संघर्ष के बडे-बडे उपक्रम खडे होते हैं।...

  • अनमोल वचन

    कामना एक ऐसी धधकती आग है, जो कभी बुझती नहीं। नये-नये रूपों में सदा प्रज्जवलित रहती है। कामना की आग में मिट जाना विनाश है और उसे नियंत्रित कर लेना विवेक है तथा उसे झुका देने का अपार दु:साहस विजय है। कामनाओं में संसार बसता है, संसार छूटता नहीं, अनन्त काल तक पीछा करता है, परन्तु यदि कामनाओं को...

  • अनमोल वचन

    संकल्प शक्ति व्यक्ति में एक चमत्कारिक आध्यात्मिक शक्ति होती है, यदि संकल्प शक्ति का अभाव हो तो आदमी किसी कार्य को करने में अपनी पूरी ऊर्जा का उपयोग नहीं कर पाता। उसके सामने सपने ही रह जाते हैं। सपने तो सभी देखते हैं, परन्तु मन में उभर रही योजनाओं को क्रियान्वित कर पाना उनके लिये चुनौतीपूर्ण होता...

  • अनमोल वचन

    युवावस्था ही वह अवस्था है, जिसमें शरीर में भरपूर शक्ति होती है, परिश्रम करने की क्षमता होती है, उत्साह होता है, कुछ कर गुजरने की चाहत होती है, परन्तु यदि संकल्प शक्ति का अभाव है, तो युवावस्था को सार्थक नहीं कहा जा सकता। संकल्प शक्ति तो एक प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा है, जो आन्तरिक दृढता, स्थिरता,...

  • अनमोल वचन

    युवावस्था ही वह अवस्था है, जिसमें शरीर में भरपूर शक्ति होती है, परिश्रम करने की क्षमता होती है, उत्साह होता है, कुछ कर गुजरने की चाहत होती है, परन्तु यदि संकल्प शक्ति का अभाव है, तो युवावस्था को सार्थक नहीं कहा जा सकता। संकल्प शक्ति तो एक प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा है, जो आन्तरिक दृढता, स्थिरता,...

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