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  • अनमोल वचन

    वह समय चला गया, जब घर का एक आदमी कमाता था और सारा परिवार आनन्द से निर्वाह कर लेता था। महंगाई ने कम और आसमान छूती भौतिक आवश्यकताओं ने अधिक हमारा सारा आर्थिक सन्तुलन बिगाडकर रख दिया है। अब तो बिरले ही आसानी से अपना खर्च चला पाते हैं। कई लोगों की स्थिति तो ऐसी है कि वे बेईमानी की अतिरिक्त कमाई छोड दें ...

  • अनमोल वचन

    यह सब जानते हैं कि आलस्य हमारा बहुत बडा शत्रु है और इस शत्रु को पैदा करने वाला स्वयं मनुष्य है। यह आलस्य व्यक्तिगत प्रगति, सम्मान और अन्य सभी उपलब्धियों की प्राप्ति में बाधक है, फिर भी आलसी व्यक्ति आलस्य को तिलांजलि नहीं देता। जब आलस्य का स्वाभाव बन जाता है, तो मनुष्य कार्यों को टालने लगता हैऔर उसके...

  • अनमोल वचन

    मानव जीवन के रूप में परमात्मा द्वारा जीव को दिये गये अनुदान का आलस्य रोग के द्वारा निरादर करने वालों के विषय में किसी संत कवि का यह कथन कितना सटीक है 'हीरा जन्म अमोल था, मूरख दिया गवाय'। इसका आश्य यही है कि जो व्यक्ति अपने जीवन को शुभ कर्मों के द्वारा सार्थक नहीं करता, उसका जन्म लेना ही व्यर्थ चल गय...

  • अनमोल वचन

    मानव जीवन को भगवान का सबसे बडा वरदान माना गया है। कहा जाता है कि देवता भी इसी पृथ्वी पर जन्म लेने को तरसते हैं, क्योंकि यही कर्मभूमि है। कर्म के द्वारा ही मनुष्य को स्वर्ग अर्थात मुक्ति की प्राप्ति होती है। वह कर्म ही है, जो मनुष्य को ऊंचा उठाने और आगे बढाने की शक्ति रखता है। संसार में जो भी प्रशंसन...

  • अनमोल वचन

    जब तक संसार है, संस्कार हैं, तब तक संताप है। शरीर के साथ अनगिनत कष्ट जुडे हैं। शरीर धर्म का पालन करने के लिये तरह-तरह के कर्म करने पडते हैं। जब तक यह क्रम चलेगा, भटकन चलती रहेगी, तब तक मन का निम्रगामी होना निश्चित है। कितना भी बडा ज्ञानी हो, इस संसार में उसे कालिख लग ही जायेगी। इस सम्बन्ध में एक कवि...

  • अनमोल वचन

    अपने जीवन में मनुष्य द्वारा किये गये अपराधों के पश्चात जब उसका विवेक जागृत होता है तो वह पछताता है और यदि उसे सौभाग्य से अच्छे लोगों की संगति मिल गई तो वह पश्चाताप भी करता है। यदि अपश्चाताप अन्तर्मन से किया जाये तो आगे का जीवन भी सुधर जाता है। ऐसे में वह मनुष्य कहलाने का अधिकारी भी बन सकता है। पश्चा...

  • अनमोल वचन

    संसार में मानसिक व्याधियों से ग्रसित व्यक्तियों की संख्या दिनोंदिन बढती जा रही है। इसके प्रमाण में मनोचिकित्सकों के यहां भीड देखकर आंकी जा सकती है। मानसिक व्याधियों का एक बडा कारण अपराधबोध का भार भी है। मनुष्य विवेकहीनता और पशुप्रवृत्ति की स्थिति में अपराध कर बैठता है, परन्तु जब उसकी आत्मा और विवेक ...

  • अनमोल वचन

    जीवन को प्रेममय बनाओ, दिन को प्रेम से आरम्भ करो, दिन को प्रेम से भरो, प्रेम से ही दिन को व्यतीत करो और प्रेम से ही दिन को समाप्त करो, परन्तु वह प्रेम दीन दुखियों के लिए मन में उपजा हो, असहाय लोगों की सहायता के लिए उठे हुए हाथों में हो, अभावग्रस्तों और जरूरतमंदों की आवश्यकताओं को पूरा करने की भावनाओं...

  • अनमोल वचन

    भगवान शिव को शम्भू, शंकर, महादेव तथा नीलकंठ आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया जाता है। उनके प्रत्येक नाम का अपना महत्व है। शिव की महिमा अपार है। शब्दों में उनकी व्याख्या करना असम्भव है। भगवान शिव की स्तुति करते समय हमारे ऋषियों ने लिखा है कि काले पत्थर की स्याह, समुद्र की दवात, कल्प द्रुम की लेखनी और ...

  • अनमोल वचन

    हम स्वयं को कितना भी धार्मिक सिद्ध करने का प्रयास करें, परन्तु सच्चाई यही है कि हम धर्म के मूल को भूल गये हैं। धर्म के मूल को भूलते जाना अथवा उसके वास्तविक स्वरूप से अनभिज्ञ रहने का ही परिणाम है कि व्यक्ति हर क्षण दुख और पीडा में जीता है, तनाव का बोझ ढोता है, चिंताओं को विराम नहीं दे पाता। लाभ-हानि,...

  • अनमोल वचन

    हम मंदिरों की परिक्रमा करके, पूजा पाठ कर तिलक लगा, नमाज, रोजे के पाबंद होकर स्वयं को धार्मिक मान बैठते हैं, परन्तु धर्म के सच्चे अर्थ को कभी जानने का प्रयास ही नहीं करते। हम धर्म कोप्रतीको, सिद्धान्तों, कर्मकाण्डों, रीति रिवाजों एवं परम्पराओं के निर्वहन को मानते हैं, परन्तु धर्म तो आचरण से जाना जाता...

  • अनमोल वचन

    संसार से कोई कामना न करो, संसार से कुछ मांगो भी नहीं, वह तुम्हें देगा भी क्या? मांगना है तो ईश्वर से मांगो, उसी का आश्रय पाने की कामना करो, क्योंकि ईश्वर की सत्ता ही सर्वोपरि है। वह सर्व शक्तिमान है और सर्वसक्षम है। यमाचार्य ने कठोपनिषद में ईश्वर की व्याख्या इस प्रकार की है 'एतदालम्बनम् श्रेष्ठमेतदा...

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