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  • अनमोल वचन

    दुनिया में जितने भी महापुरूष हुए हैं, वे परोपकारी हुए हैं। परोपकारी व्यक्ति वही है, जिसे दूसरों का दुख-दर्द अपना दुख-दर्द प्रतीत होता है, वह उसे अनुभव करता है और उसे दूर करने का यथा सम्भव प्रयास भी करता है। जो व्यक्ति स्वार्थी होता है, वह केवल अपने लिये जीता है, परन्तु जो परमार्थी और परोपकारी होगा,...

  • अनमोल वचन

    समस्याएं निजी हों या सार्वजनिक, उनके समाधान के लिये सदैव तत्पर रहना चाहिए। निजी समस्याएं हमारे व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती हैं, वहीं सार्वजनिक समस्याएं पूरे समाज को प्रभावित करती हैं, इसलिए समस्याओं को कभी अनदेखा न करें। किसी भी कार्य को आरम्भ करने से पूर्व आने वाली समस्याओं पर अपनी दृष्टि...

  • अनमोल वचन

    बीज जब अंकुरित होता है तो बहुत ही कोमल होता है, उसे आसानी से उखाडकर फेंका जा सकता है। थोडा बडा होने पर जब वह पौधा बन जाता है, तब भी जमीन से हटाया जा सकता है, परन्तु जब वही पौधा पेड बन जाता है, तो उसे धरती से उखाडना व निर्मूल करना आसान नहीं होता, उसे हटाने के लिये कुल्हाडे और आरी से काटना पडता है,...

  • अनमोल वचन

    हम सभी का जीवन तरह-तरह की समस्याओं से घिरा होता है। एक समस्या समाप्त होती है, दूसरी उठ खडी होती है। यदि समस्याओं का समाधान हो जाये तो कुछ पल तो शान्ति मिलती है कि एक समस्या का समाधान तो हो गया, किन्तु फिर उससे सम्बन्धित या उससे अलग अन्य समस्याएं आ खडी होती हैं। जीवन समस्याओं का पिटारा है, जहां इनका...

  • अनमोल वचन

    हमारा चिंतन सदैव सकारात्मक और रचनात्मक होना चाहिए। सकारात्मक सोच जहां होगी, वहां निराशा आ ही नहीं सकती। सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सदैव आशावान रहता है। परमात्मा से प्रार्थना में भी वह सद्बुद्धि, शक्ति और आत्मबल का वरदान मांगता है, किसी धन या वैभव की मांग कभी नहीं करता। अच्छे विचारों और अच्छे...

  • अनमोल वचन

    कर्म से करम (भाग्य) बनायें, क्योंकि कर्म ही अच्छे-बुरे भाग्य का हेतु है। स्वामी विवेकानन्द ने कहा है कि आलसी लोग कहते हैं केवल ईश्वर पर विश्वास करो, जो करेगा, जैसा करेगा, भगवान ही करेगा, किन्तु भक्ति सक्रियता में है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की एक कविता में प्रभु से दया के बजाय संघर्षप्रियता और शक्ति के...

  • अनमोल वचन

    असहाय, असन्तुष्ट एवं दुखित होने पर एकाकी पन में प्रभु को विकलता में लगाई गई पुकार ही प्रार्थना है। अन्त:करण की गहराई से उठती प्रार्थना ही प्रभु के पास पहुंचती है, किन्तु हम विपरीत परिस्थितियों के समाप्त होते ही अपने प्रभु को, उनकी भक्ति से प्राप्त होने वाले आनन्द को भूलने लगते हैं। इसमें अन्त:करण...

  • अनमोल वचन

    भागवत में लिखा है कि 'कलियुग में धर्म का प्रदर्शन तो अधिक से अधिक होगा, धर्माचरण न्यूनतम अर्थात धर्म का दिखावा तो बहुत होगा, परन्तु धार्मिक लोग कम होंगे। धर्म में प्रदर्शन का स्थान नहीं, धर्म तो आचरण में होना चाहिए, किन्तु आज धार्मिक कर्मकांडों को धर्म के प्रतीकों का प्रयोग मात्र ही धर्म मान लिया...

  • अनमोल वचन

    धर्म जीवन का सार है, धर्म ही जीवन का आधार है। धर्म जीवन में न हो तो जीवन मुर्दे के समान हो जाता है। धर्म हमारे पुरूषार्थ का सर्वप्रथम आधार है, शेष जो कुछ भी होना है, इसी को आधार बनाकर किया जाना है। धर्म है तो अर्थ का मूल्य है। धर्म के साथ ही अर्थ अपने सर्वोपरि मूल्यों को ग्रहण कर पाता है। धर्म के...

  • अनमोल वचन

    वर्तमान में किये गये कुछ कर्म ऐसे होते हैं, जो तुरन्त ही परिणाम दे देते हैं, परन्तु कुछ कर्म ऐसे होते हैं, जिनके साथ अतीत का परिणाम भी जुडा होता है। एक ऐसा सच्चा घटनाक्रम है, जो बताता है कि व्यकित के अतीत के कर्म किस प्रकार उसके साथ रहते हैं, अपना प्रभाव दिखाते हैं। एक व्यक्ति के पेट में बहुत दर्द...

  • अनमोल वचन

    हमें जीवन में केवल वर्तमान दीखता है। अतीत अदृश्य होता है, परन्तु यह अतीत समुद्र में डूबे हुए उस असीम शिलाखंड के समान होता है, जो अदृश्य तो होता है, परन्तु किसी भी जहाज से टकराने पर उसे चूर-चूर कर सकता है, जिसे आसानी से बिल्कुल भी तोडा नहीं जा सकता। अतीत उसी प्रकार हमारे जीवन में अदृश्य होते हुए भी...

  • अनमोल वचन

    लोग अतीत को भुला देते हैं, अतीत व्यक्ति को कभी भी नहीं भुलाता, हर पल, हर क्षण उसके साथ जुडा होता है। हमारा अतीत ही यह निर्धारित करता है कि हमारा भविष्य कैसा होगा, हमारा वर्तमान कैसा होगा। यदि किसी को भी अपने भविष्य की चिंता है तो उसे अपने वर्तमान को सुधारना चाहिए, क्योंकि बाद में वही अतीत बन जायेगा...

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