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  • अनमोल वचन

    हमारे जीवन में कौन सा कर्म कब फलीभूत होगा, यह व्यक्ति के संज्ञान में नहीं होता। कर्मों का परिपाक तो जन्म जन्मान्तरों का खेल है और इस क्रम में विधाता ने कहीं कोई त्रुटि नहीं की है। सभी व्यक्तियों को अपने किये हुए शुभ व अशुभ कर्मों का फल भुगतना ही पडता है। कोई भी इससे बच नहीं सकता, चाहे अवतार कहे...

  • अनमोल वचन

    कहा जाता है कि इन्सान नियति के हाथ का खिलौना है, नियति जैसा चाहती है, इन्सान समय-समय पर वैसे ही कर्म करता रहता है, परन्तु यह आंशिक रूप से ही सही है, क्योंकि हमारा जीवन जिन शक्तियों के द्वारा संचालित है, उनका हम सदुपयोग भी कर सकते हैं और दुरूपयोग भी। कार्य करने के लिये हम स्वतंत्र हैं, परन्तु हमारी...

  • अनमोल वचन

    हम यदि अतीत की दुखद घटनाओं को भूलेंगे नहीं, उन्हें बार-बार याद करते रहेंगे तो हमारे विचारों में नकारात्मकता आने लगेगी, सकारात्मक सोच का अभाव हो जायेगा। हमारा हित इसमें है कि हमें ऐसी यादों और विचारों से बचना चाहिए, जो हमें नकारात्मकता से भर देते हैं। इससे बचने के लिये किसी श्रेष्ठ और सर्वहितकारी...

  • अनमोल वचन

    हमारा जीवन वर्तमान के धरातल पर रहता है, परन्तु हम जीते उस अतीत के साथ हैं, जिसकी यादें हमारे मन-मस्तिष्क को कुरेदती रहती है। अतीत के कडुवाहट भरे पल हमारा पीछा नहीं छोडते, ये ही यादें हमें पीडित और परेशान करती रहती हैं। इस कशमकश में हम तनाव, ग्लानि एवं विषाद से घिर जाते हैं, जिससे हमारे सम्बन्ध एवं...

  • अनमोल वचन

    आज से साढ़े आठ लाख वर्ष पूर्व जब श्री राम का इस धरती पर अवतरण हुआ, तब से लेकर आज तक राम की महिमा में कोई अन्तर नहीं आया। आज भी संकट की घडी में सबसे पहले मुंह से राम का नाम ही निकलता है। राम के बिना एक पल भी हमारा काम नहीं चल सकता। उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम राम इसीलिये कहा जाता है कि उन्होंने जीवन...

  • अनमोल वचन

    यह सर्वविदित है कि भारत में मातृत्व परदारेषु की संस्कृति है। मां प्रथम गुरू है, मां प्रथम आचार्य है और बेटी को लक्ष्मी, दुर्गा के रूप में स्वीकार किया जाता है। नवरात्रों में भी लक्ष्मी, सरस्वती और मां काली के रूप में तीन कन्याओं को प्रतिदिन अर्चना अर्पित की जा रही है, प्रणाम कर आशीर्वाद लिया जा रहा...

  • अनमोल वचन

    हमारी आत्मा का भोजन क्या है? आत्मा का भोजन है शान्ति, संतोष और आनन्द, परन्तु वें कहां हैं? सामान्यत: हम सुख को ही आनन्द मान लेते हैं, किन्तु सुख वह होता है, जो हमारे शरीर को मिलता है, सुख शरीर उठाता है। जब जीभ से मीठी वस्तु खाते हैं तो हमें सुख मिलता है, काम (विषय) सेवन से हमें सुख मिलता है। यह सुख...

  • अनमोल वचन

    बच्चे समाज और देश का भविष्य होते हैं। आगे चलकर इन्हीं बच्चों में से प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के बच्चे ही बडे होकर देश को चलायेंगे। इसके लिए जरूरी है कि उनके व्यक्तित्व का समुचित विकास हो। उनके व्यवहार में नम्रता, शीलता, सज्जनता का पुट रहना आवश्यक है। बच्चों का अपमान न किया जाये। उनके स्वाभिमान को ठेस...

  • अनमोल वचन

    बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिये आवश्यक है कि उसे सुसंस्कारित किया जाये। यह उत्तरदायित्व मां और पिता दोनों का है। यदि परिवार संयुक्त है तो परिवार के बच्चों में सुसंस्कार डालने की जिम्मेदारी सभी परिवारजनों की हो जाती है। उन सभी का आपस में अच्छे व्यवहार और आपसी सामंजस्य का होना जरूरी है। यदि घर में कलह...

  • अनमोल वचन

    परिवार में मां का किरदार सबसे मुख्य होता है। उसका बच्चे के प्रति उत्तरदायित्व भी सबसे अधिक होता है। प्रारम्भ में बच्चा शिशु होता है। उसी समय माता को चाहिए कि वह उचित संस्कार ठीक ढंग से लालन पालन करके डाले। इस काल में मां को चाहिए कि वह स्वयं अनुशासन में रहकर सद्व्यवहारी और मधुर भाषी बनी रहे,...

  • अनमोल वचन

    परिवार एक पाठशाला है। बच्चा यहां जो भी सीखता है, वही उसके संस्कार बन जाते हैं। बच्चा उस कोमल डाल के समान है, जिसे जिस ओर चाहे मोडा जा सकता है अथवा कुम्हार की उस कच्ची गीली मिट्टी के समान होता है, जिसे कुम्भकार अपनी इच्छानुसार पात्र बना सकता है। इस कच्ची मिट्टी में जिस प्रकार के संस्कार भरे जायेंगे,...

  • अनमोल वचन

    आज समाज का वातावरण दूषित हो चुका है। अराजकता का साम्राज्य अपना प्रसार कर रहा है। रिश्ते पारिवारिक हों, सामाजिक हों अथवा राजनैतिक हों, सबमें कडुवाहट ही कडुवाहट है। देश का, समाज का, परिवार का इस प्रकार काम चलने वाला नहीं है। मूकदर्शक बनकर रहने से बात नहीं बनेगी। इसका समाधान तो सभी को मिल बैठकर...

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