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  • अनमोल वचन

    आज का इन्सान दुनियादारी में इतना उलझ गया है कि उसके पास अपने लिये समय ही नहीं है। हम केवल एक अंतहीन अंधी दौड का हिस्सा बनकर रह गये हैं। ऐसी दौड जिसकी न कोई दिशा है, न ही कोई उद्देश्य। यह दौड है आधुनिकता की, इच्छाओं की, प्रलोभनों की, सबसे आगे बढने की, जबकि आज आवश्यकता है हमें इस दौड से बाहर निकलकर...

  • अनमोल वचन

    संसार के सभी मनुष्यों की तीन माताएं जगत जननी अर्थात परमात्मा, जिसके उदर में यह सारी सृष्टि समाई हुई है, दूसरे धरती माता, जिससे भौतिक शरीर की रचना हुई, जिसमें पैदा हुए, अन्न-जल से शरीरों का पोषण होता है, तीसरे जननी अर्थात वह मां, जिसने नौ महीने अपने गर्भ में रखा तथा अपना दूध पिलाकर हमारा पोषण किया।...

  • अनमोल वचन

    परमपिता परमात्मा को ईश्वर कहें, अल्लाह कहें अथवा वाहे गुरू, बात एक ही है, क्योंकि ईश्वर एक है, उसे हम किस नाम से पुकारें, कोई अन्तर नहीं पडता। संसार के सारे धर्म लगभग एक ही उपदेश देते हैं कि सदा सच बोलें, सच का ही व्यवहार करें, चोरी न करें, किसी को सतायें नहीं, किसी के साथ विश्वासघात न करें। कोई...

  • अनमोल वचन

    प्रसिद्ध कवि एडविन कहते हैं कि हम दूसरों के जीवन में जो भी भेजते हैं, वही हमारे जीवन में लौटकर आता है। अत: सदैव सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें। वह प्रेम की भाषा की वर्णमाला है। जब यह वर्णमाला आप भली भांति सीख जायेंगे तो फिर प्रशंसा, सहयोग और समयानुकूल वाक्य आप बेहतर तरीके से बोल पायेंगे और जीवन...

  • अनमोल वचन

    योग का शाब्दिक अर्थ है जोडना। एक अलग ईकाई को सम्पूर्ण आत्मा के साथ जोडना। योग के आठ अंग हैं। इनमें पांच बाह्य यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार, तीन अन्तरीय धारणा, ध्यान, समाधि। इस प्रणाली में कोई आसन निर्धारित नहीं किया गया। केवल सुविधाजनक और स्थिर मुद्रा ही ध्यान के लिये बनाई जाती हैं। कोई...

  • अनमोल वचन

    स्वयं को अति आधुनिक दिखाने की होड में आज के आदमी ने अपना जीवन ही बेहद अस्त-व्यस्त कर लिया है। आधुनिकीकरण की अंधी दौड में फंसकर उसने अपने जीवन को अधिक जटिल बना लिया है। इन्हीं अस्त-व्यस्तताओं और जटलताओं के कारण उसने अपने लिये स्वयं ही अनेक समस्याएं पैदा कर ली हैं। आपा-धापी के इस युग में प्रत्येक...

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    संत कबीर कहते हैं 'बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई, जो दिल खोजा आपना मुझसा बुरा न कोय।' भाव यह है कि यदि बुराई की खोज की जाये तो सबसे पहले बुराई हमें स्वयं में ही बहुत मिल जायेगी। हम व्यर्थ ही दूसरों में दोष ढूंढने में लगे रहते हैं। सबसे पहले हमें अपने भीतर ही झांककर देखना चाहिए कि मुझमें...

  • अनमोल वचन

    हमारे देखने के तरीके का निर्माण हमारे बचपन से ही होने लगता है। जिस प्रकार का वातावरण, परिवार के लोग हमें मिलते हैं। परिवार के लोगों की मान्यताएं जिस प्रकार की होगी, परिजन हमें जो सोचने, समझने तथा देखन का तरीका हमें समझाते हैं उसी प्रकार का हमारा नजरिया, हमारा दृष्टिकोण बनता चला जाता है और हम आजीवन...

  • अनमोल वचन

    किसी भी वस्तु, व्यक्ति को देखने, परखने में दृष्टिकोण का बहुत महत्व है। हमारा दृष्टिकोण जैसा होगा हम वैसा ही देखते, सुनते और समझ पाते हैं। यदि हमारे चश्मे पर धूल जमी हुई है तो हमें पूरी दुनिया ही धुंधली नजर आयेगी। जिस रंग का हमारा चश्मा होता है दुनिया भी वैसी ही दिखाई देती है। हम चाहकर भी वास्तविक...

  • अनमोल वचन

    हमारी सफलता के मार्ग में मुख्यतया दो प्रकार की बाधाएं होती हैं- एक आंतरिक, दूसरी बाह्य। बाहरी परिस्थितियों की तुलना में आंतरिक बाधाओं का महत्व अधिक है, क्योंकि बाहरी परिस्थितियों पर हमारा पूर्ण नियंत्रण नहीं होता। कुछ सीमा तक ही हम इन्हें नियंत्रित कर पाते हैं, जबकि दूसरा पक्ष अधिक महत्वपूर्ण और...

  • अनमोल वचन

    सफलता के मार्ग में बहुत सी बाधाएं होती हैं, जिनको जानना, समझना, स्वीकारना और उन्हें दूर करना आवश्यक होता है। अधिकांश लोग अपनी असफलताओं को अपना भाग्य मानकर स्वीकार कर लेते हैं। उनके सारे प्रयास उस असफलता के साथ ही रूक जाते हैं, अपनी असफलता से निराश, हताश हो जाते हैं। इस हताशा और निराशा से जन्म होता...

  • अनमोल वचन

    जीवन में हर व्यक्ति आगे बढना चाहता है, विकास करना चाहता है, सफल होना चाहता है, किन्तु यह सकारात्मक परिवर्तन तभी सम्भव हो पाता है, जब हम अपनी आराम पसन्द जिंदगी से बाहर निकलें, संघर्ष करें, अपनी उन कमियों के विरूद्ध हो हमारे मार्ग में बाधक हैं, किन्तु हर किसी के लिये यह सम्भव नहीं हो पाता। सफलता की...

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