बीएचयू के आरोपी प्रो0 चौबे को लंबी छुट्टी पर भेजा

बीएचयू के आरोपी प्रो0 चौबे को लंबी छुट्टी पर भेजा

वाराणसी काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की छात्र-छात्राओं के दो दिनों तक लगातार चले धरना-प्रदर्शन के दवाब में अपने विभाग की छात्राओं से अश्लील हरकत करने के एक पुराने मामले के आरोपी जंतु विज्ञान के प्रो एस के चौबे को रविवार को पुन: लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। इस मामले को फिर से विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रो चौबे के अवकाश से वापस बुलाने के विश्वविद्यालय प्रशासन ने फैसले तथा आरोपी को बर्खास्त करने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शनिवार शाम से यहां धरना-प्रदर्शन कर रहीं थी। आदोलनकारी छात्र-छात्राओं ने लंका स्थित मुख्यद्वार को बंद कर धरना शुरू किया था। अपनी मांगो को लेकर वह शनिवार रात और रविवार दिनभर धरने बैठी रहीं।

इसके बाद आंदोलनकारियों का पांच सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 राकेश भटनागर से मिलकर उनसे बातचीत की। प्रो0 भटनागर ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ जांच बाद कार्रवाई के आश्वासन पर छात्राओं ने अपना दो दिना पुराना आंदोलन समाप्त कर दिया।

इस बीच बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ राजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्रो0 चौबे को पुन: लंबी छुट्टी पर भेजने का आदेश दिया है। इसके अलावा छात्राओं की शिकायत के आधार पर इस मामले को फिर से विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कुलपति ने इस बात पर फिर जोर दिया है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी प्रकार के लैंगिक भेदभाव अथवा उत्पीड़न की घटना को बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस माहसिचव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया के जरिये छात्राओं के आंदोलन का समर्थन किया, जबकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतलादहन कर विरोध आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

गौरतलब है कि वर्ष 2018 के अक्टूबर में जंतु विज्ञान विभाग की छात्राओं के एक दल को शैक्षाणिक टूर पर पुणे ले जाया गया था, जहां आरोप है कि प्रो0 चौबे ने अश्लील टिप्पणियां तथा अशोभनीय व्यवहार किया था। टूर से लौटने के बाद छात्राओं की शिकायत पर आरोपी को निलंबित कर जांच की गई। इस वर्ष जून में कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को चेतावनी के साथ भविष्य में इस तरह के टूर में नहीं जाने की चेतावनी दी गई थी। इस विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने आरोपी को माफ नहीं किया था।

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