तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश...योगी ने की मोदी की जमकर प्रशंसा

तेजी से विकास  की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश...योगी ने की मोदी की जमकर प्रशंसा

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने आज यहां कहा कि सांस्कृतिक भारत की पुर्नप्रतिष्ठा का युग प्रारम्भ हो चुका है और उसका पूर्वाभास देश की जनता को हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश जहां चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर है, वहीं उत्तर प्रदेश में भी विकास की गंगा बहाई जा रही है। श्री योगी बुधवार को गोरखपुर मंदिर परिसर में अपने गुरू को ब्रहमलीन दिग्विजय नाथ और ब्रहमलीन राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ सप्तदिवसीय श्रद्धान्जलि समारोह के समापन अवसर पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि एक नये युग के भारत की आप सभी को सुनाई दे रही होगी, मगर देश की जनता सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयत्नों के साथ खड़ी हो और हम एक साथ मिलकर भारत को परमवैभव का प्रतिष्ठित स्थान दिलाएं। उन्होंने कहा कि कोई भी विषय जन आन्दोलन का हिस्सा बनता है, तभी वह पूर्ण होता है। उन्होंने गो-संरक्षण, गो-संवर्धन एवं प्लास्टिक का उपयोग न करने का आहवान करते हुए कहा कि सरकारे अपना प्रयत्न कर रहीं है लेकिन जनता भी को आगे आकर काम करना होगा। संतो के प्रवचन के ये विषय भी पर्यावरण, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, प्लास्टिक का उपयोग न करने इत्यादि होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संस्कृत केवल पूरोहिती का विषय न रहे, बल्कि हमारे प्राचीनतम ज्ञान-विज्ञान के शोध का विषय हो। उन्होंने आश्रमों का आहवान किया कि समृद्धशाली गौशाला बनाये ताकि गौ-संवर्धन और गौ- संरक्षण हो सके। भारत की ऋषि एवं कृषि परम्परा को अपने परम्परागत रूप के साथ कायम रखने के लिए पालीथीन का निषेध होना चाहिए, क्योंकि पॉलीथीन से कृषि का नुकसान होता ही है, साथ ही गायें, जो हमारी ऋषि परम्परा की वाहक हैं, के लिए बहुत हानिकारक हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी ने कहा कि उनके गुरू महन्त अवेद्यनाथ समन्वय, सहनशीलता, संस्कार, प्रखर-राष्ट्रभक्ति, समाज सेवा की प्रतिमूर्ति थे। गोरखनाथ मन्दिर के स्वरूप का जो खाका महन्त दिग्वजयनाथ ने तैयार किया, महन्त अवेद्यनाथ ने उसे पूर्ण किया। शिक्षा, स्वास्थ्य को सेवा का साधन बनाकर इस पीठ ने जन सेवा को ही भगवान की सेवा मानकर कार्य किया है। 48 शिक्षण-प्रशिक्षण, स्वास्थ्य एवं सेवा के संस्थान गोरखनाथ मन्दिर द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा कि महन्त अवेद्यनाथ ने भारतीय सनातन धर्म एवं संस्कृति में प्रतिष्ठित धर्म-स्थलों की भूमिका को वर्तमान युग में साक्षात प्रस्तुत किया। गोरखपुर में आज बायोफ्यूल प्लांट के शिलान्यास की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि गोशालाओं से, शहर से, खेत से सभी जगह से निकलने वाले कचड़ो से अब ईधन बनाया जायेगा। गायों के पास उर्जा का असीम भण्डार है और उनके गोबर का विशेष उपयोग बायोफ्यूल प्लांट में किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ के दोनों पूर्व आचार्यों ने जैसा जीवन जिया था और समाज को जिस तरह प्रेरणा प्रदान की थी। आज भी गोरक्षपीठ उसका पूरा का पूरा पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि जितने कल्याणकारी कार्यक्रम गोरक्षपीठ द्वारा चलाये जाते है, वे सब भारत की सनातन धर्म की परम्पराओं का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रीयता अपना स्पष्ट आकार ले रही है। उन्होंने भारत के ऋषि परम्परा के प्रसार के योग को अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता दिलाई। भारत की सनातन कुम्भ की परम्परा को युनेस्को द्वारा दुनियां की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता दिलाई है। आयुष्मान भारत के अन्तर्गत देश के 5० करोड़ गरीब परिवारों को एक वर्ष में 5 लाख रूपये की नि:शुल्क चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराने का अद्वितीय निर्णय लिया है यह दुनिया की सबसे बड़ी चिकित्सा योजना है। चार करोड़ परिवारों को विद्युत कनेक्शन दिये गये है। करोड़ो परिवारों को आवास उपलब्ध करा दिये गये है। श्री योगी ने कहा कि यह बदलते भारत की वहीं तस्वीर है, जिसकी परिकल्पना हिन्दुव और राष्ट्रीयता के प्रबल पक्षधर मेरे गुरूदेव महन्त अवेद्यनाथ किया करते थे। सन्त-महात्मा और देश की जनता रामराज्य को चरितार्थ करने के लिए सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चले, सरकार अपना काम प्रारम्भ कर चुकी है। राम को रोटी से जोड़कर हर गरीब को रोटी, आवास, कपड़ा, दवाई, बिजली, पानी और सुरक्षा जैसे मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही होगा तभी रामराज्य आ सकता है। गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि उनके गुरू महन्त अवेद्यनाथ अपने जीवन के अन्तिम क्षण तक अनेक राष्ट्रीय, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आन्दोलन से जुड़े रहे और वे कहा करते थे कि समाज में यदि छुआछूत पाप नहीं है तो कुछ भी पाप नहीं है। भारत को महाशक्ति बनने के लिए अपनी सामाजिक विकृतियों से मुक्ति पानी होगी। सामाजिक सामूहिकता के बल पर ही राष्ट्रशक्ति खड़ी की जा सकती है। इस युग में सामाजिक समरता के वे अग्रदूत थे। उन्होंने कहा कि मैं हिन्दू समाज को यह आश्वस्त करता हूॅ कि श्रीगोरक्षपीठ की राष्ट्र रक्षा का मंत्र हमारे जीवन का मंत्र है। हिन्दू समाज की सेवा और जिन आदर्शो एवं मूल्यों को महन्त दिग्विजयनाथ एवं मेरे गुरूदेव महन्त अवेद्यनाथ ने स्थापित किया है उनके प्रति गोरक्षपीठ सदैव समर्पित रहेगा और हम उसे आगे बढ़ाते रहेंगे। सामाजिक एकता के माध्यम से राष्ट्रीय एकता के गुरूदेव सदैव पक्षधर थे। बृहद हिन्दू समाज की एकता ही उनकी सांसारिक उद्देश्य की साधना थी और श्रीगोरक्षपीठ इसे मंत्र मानकर आगे बढ़ता रहेगा। इस अवसर पर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती ने कहा कि राष्ट्र-सन्त महन्त अवेद्यनाथ भारतीय संस्कृति, हिन्दू चिन्तक, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे।

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