Read latest updates about "लाइफ स्टाइल" - Page 2

  • जीवन का सच्चा सुख है निरोगी शरीर

    शक्तियों में स्वास्थ्य को पहली प्रत्यक्ष शक्ति माना गया है। एक स्वस्थ व्यक्ति हर क्षेत्र में उन्नति को प्राप्त करता है जबकि रोगी का मन, मस्तिष्क, स्वभाव सभी कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है और वह कोई योजना बनाने तथा उसे सफल करने की स्थिति में नहीं रहता। ऐसी जि़दंगी न अपने लिये प्रसन्नता देती है न दूसरों...

  • तीन मूर्ख भाई

    बात बहुत पुरानी है। किसी गांव में एक किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे। तीनों मूर्ख, निकम्मे और आलसी। किसान उनके बारे में सदा चिंतित रहता था। एक दिन गांव में एक महात्मा जी पधारे। किसान ने तीनों बेटों को महात्मा जी की सेवा में लगा दिया। तीनों ने खूब मन लगाकर महात्मा जी की सेवा की। महात्मा जी पहुंचे...

  • बाल कथा: तलवार की खोज

    चंद्रगढ़ के राजा असित सेन के पास एक सोने की तलवार थी। असित सेन उसे बहुत संभाल कर रखते थे। उस तलवार से राजा असित सेन ने कई लड़ाइयां जीती थीं। तलवार की कीमत भी लाखों में थी। एक रात राजा की वह तलवार चोरी चली गई। तलवार के चोरी जाने से राजा परेशान हो गए। उन्होंने काफी तलाश करवाई, लेकिन तलवार न मिली। ...

  • बाल कथा: आदमी और जानवर

    एक शेर के तीन बच्चे थे। उन्हें अपने पापा की ताकत पर बहुत गर्व था। वे तीनों जब अपने मम्मी-पापा के साथ जंगल में घूमते, सारा जंगल डर से कांप उठता। पशु इधर-उधर अपनी जान बचाने के लिए भागने लगते। पक्षी शोर करते हुए पेड़ों से उडऩे लगते। शेर के बच्चे जब अपनी आंखों से यह सब देखते तो गर्व से उनका सीना फूल...

  • विद्वानों के अनुभव के मोती

    . मूर्ख शिष्य को उपदेश, कर्कशा स्त्री का पालन-पोषण, दुखी लोगों से संबंध रखने पर सज्जन पुरूषों को भी दुख उठाना पड़ता है। . सेवा के अवसर पर सेवकों की, दुख के समय बंधु-बांधवों की, संकट आनेपर मित्र की, धन हानि होने पर पत्नी की परीक्षा होती है। . निश्चित वस्तु को छोड़कर जो व्यक्ति अनिश्चित की ओर भागता...

  • पुनर्जन्म - एक दृष्टि

    भगवान कृष्ण ने गीता में अर्जुन से स्पष्ट कहा है कि न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था, तंू नहीं था अथवा ये राजा लोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इस से आगे हम सब नहीं रहेंगे। शरीर छोडऩे के बाद प्राणी अंतरिक्ष में स्थित छह सूक्ष्म लोकों में से किसी एक में सूक्ष्म शरीर के साथ कुछ काल तक सुख दुख...

  • बाल जगत / जानकारी: चतुर लकड़हारा

    एक गांव में एक लकड़हारा था, जो लकडिय़ां काटकर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। वह रोज सुबह जंगल में जाता और दिन भर लकडिय़ां काटता। शाम को लकडिय़ों का ग_र बांधता व शहर बेचने चल देता और फिर खाने का राशन लेकर घर लौटता। जंगल में जाते वक्त उसे काफी राहगीर मिलते, जो जंगल के रास्ते दूसरे गांव जाते थे। रोजाना...

  • तीर्थस्थल/पर्यटन: राष्ट्र की आत्मा हैं तीर्थ

    भारतीय परंपरा में तीर्थों का महत्व सदैव रहा है। तीर्थ का अर्थ है- पवित्र करने वाला। उस नदी, सरोवर, मंदिर अथवा भूमि को तीर्थ कहा जाता है, जहाँ भगवद् दिव्य शक्ति का वास माना जाता है। जिस भूमि में दिव्य पावन कारिणी शक्ति होती है, वहाँ जाने से मानव अपने अंत:करण में पावनता की अनुभूति करता है। भगवान...

  • बाल कथा: मनुष्य से दूर जा रहा है हाथी

    यह सच है कि हाथी आने वाले भूकम्प का अनुमान पहले से ही लगा लेता है और अपनी भाषा में इसकी सूचना देने का प्रयास भी करता है परन्तु यह भाषा हर किसी की समझ से परे है। भारतीय (एशियाई) हाथी में सिर्फ नर के ही दांत होते हैं जबकि अफ्रीकी हाथी में नर व मादा दोनों के ही दांत होते हैं। अपने जीवन काल में करीब 24...

  • पर्यटन/तीर्थस्थल: दर्शन को तैयार, चारों धाम के द्वार

    देव भूमि उत्तराखंड सदियों से ऋृषि मुनियों की तपस्थली रही है। यह ही कारण है कि लाखों करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष पुण्य कमाने के लिये देश विदेश से उत्तराखंड के विभिन्न तीर्थ स्थानों के साथ ही चार धाम यात्र पर आते हैं। यू तो आज भागम भाग की जिन्दगी में सब कुछ बदल गया है। अब वो पहली जैसी भक्ति नजर नहीं...

  • 13 जुलाई: आज ही के दिन हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री बीना राय का जन्म हुआ था

    नयी दिल्ली । भारतीय एवं विश्व इतिहास में 13 जुलाई की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:1534- ऑटोमन सेना ने फारस में ताबरिज पर कब्जा किया। 1803- राजा राम मोहन राय और अलैकजेंडर डफ ने पांच छात्रों के साथ स्कॉटिश चर्च कॉलेज शुरू किया। 1908- लंदन में चौथे आधुनिक ओलंपिक खेल शुरु। 1905- कलकत्ता के साप्ताहिक...

  • परम त्याग की महामूर्ति शिक्षा के अवधूूत पूज्य स्वामी कल्याण देव जी की 15वीं पुण्य तिथि पर शत-शत नमन

    स्वामी कल्याण देव महाराज का जन्म वर्ष 1876 मे जिला बागपत के गांव कोताना मे उनकी ननिहाल मे हुआ था। उन्होनें वर्ष 1900 मे मुनी की रेती ऋषिकेश मे गुरूदेव स्वामी पूर्णानन्द जी से सन्यास की दीक्षा ली। अपने संयासी जीवन मे स्वामी जी ने 300 शिक्षण संस्थाओं का निर्माण कराया। साथ ही कृषि केन्द्रों, वृ़द्ध...

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