भाग्यांक 3 का अधिष्ठाता बृहस्पति ग्रह को माना गया है। इसको गुरु भी कहते हैं। गुरु ग्रह के प्रभाववश भाग्यांक 3 के व्यक्ति धार्मिक, दानी, उदार,...
भाग्यांक 3 का अधिष्ठाता बृहस्पति ग्रह को माना गया है। इसको गुरु भी कहते हैं। गुरु ग्रह के प्रभाववश भाग्यांक 3 के व्यक्ति धार्मिक, दानी, उदार, सच्चरित्र, ज्ञानी, विद्वान, परोपकारी, शान्त स्वभाव के, सत्य पर आचरण करने वाले व्यक्ति के रूप में ख्याति प्राप्त करते हैं। अनुशासन में रहना एवं दूसरों से अनुशासन की अपेक्षा करना इनका प्रमुख गुण रहता है। ये अपने अधीनस्थों से अधिकांश कार्य अपने बुद्धि कौशल से निकलवाने में सिद्धहस्त होते हैं। सामाजिक, राजनैतिक क्षेत्रों में इनकी रुचि रहेगी एवं आवश्यकता के समय समाज सेवा के कार्य से पीछे नहीं हटेंगे। धर्म-कर्म के कार्यों में इनकी रूचि रहेगी। गुरु धन-सम्पदा का दाता ग्रह है।
अतः गुरु प्रभाव से अपने कर्मक्षेत्र, रोजगार के क्षेत्र में अच्छी सम्पदा एकत्रित कर लेते हैं। भूमि, वाहन, सम्पत्ति का अच्छा सुख प्राप्त करते हैं। ये ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में रूचि लेते हैं और ऐसा कार्य करना पसन्द करते हैं जिनमें इनके अनुभव, ज्ञान का भरपूर उपयोग होता हो और इनको पूर्ण सम्मान, यश, धन इत्यादि मिलता है। भाग्यांक 3 से प्रभावित जातकों के लिए भाग्यांक के प्रभाव से भाग्योदय 21 वर्ष की अवस्था से प्रारंभ होकर 30 वर्ष की अवस्था पर उच्चता मिलती है तथा 39 वर्ष की अवस्था पर पूर्ण भाग्योदय होता है। भाग्यांक के प्रभाव से इनकी आयु के ऐसे वर्ष जिनका योग तीन होता है, वह भी इनके लिए भाग्योदय कारक रहते हैं, जैसे आयु वर्ष 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66 और 75 वें वर्ष इनके sलिए योगकारी सिद्ध होते हैं। ऐसे ईस्वी सन् जिनका योग 3 आता है, वे भी भाग्यांक 3 प्रभावित व्यक्तियों को अनुकूल जाते हैं जैसे सन् 2001, 2010, 2019, 2028, 2037, 2046, 2055, 2064, 2073। इन वर्षों में इनके जीवन में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित होती हैं।
- ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव
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