
मुंबई। नवी मुंबई में फर्जी बिलों की मदद से सेंट्रल जीएसटी और सेंट्रल एक्साइज को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई गई है। दो ट्रेडर्स ने मिलकर 650...
मुंबई। नवी मुंबई में फर्जी बिलों की मदद से सेंट्रल जीएसटी और सेंट्रल एक्साइज को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई गई है। दो ट्रेडर्स ने मिलकर 650 करोड़ रुपये के वस्तुओं की फर्जी सप्लाई की और नकली बिल के आधार पर जीएसटी विभाग से 110 करोड़ रुपये का जीएसटी भुगतान क्लेम कर लिया। जीएसटी अधिकारियों ने एक ट्रेडर्स को गिरफ्तार कर लिया है, तो दूसरा फरार हो गया है। कोर्ट ने आरोपी को 8 मार्च तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जांच में पाया गया कि कंपनियों ने फर्जी बिलों के तौर पर फर्जी खरीदारी दिखाई थी और इसके आधार पर जीएसटी विभाग से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। बता दें कि इनपुट क्रेडिट के जरिए फ्रॉड करनेवाले कुछ कारोबारियों को पिछले साल दिसंबर महीने में भी पकड़ा गया था। इन लोगों ने टैक्स विभाग को 350 करोड़ रुपये की चपत लगाई थी।
जीएसटी कमिश्नरेट की रायगढ़ विंग ने जीएसटी टैक्स चोरी का पता लगाते हुए एक आरोपी आनंद मंगल को हिरासत में लिया है। पनवेल की अदालत ने आरोपी को 8 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में एक अन्य आरोपी राकेश एच. गर्ग फरार हो गया है। बताया जा रहा है कि बेसिक ऑयरन और स्टील बनाने वाली नवी मुंबई की कंपनी सूर्या फेरस अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर है। टैक्स विभाग के अधिकारियों ने छापा मार कर 17 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। दोनों के खिलाफ सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 132 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि मेसर्स मोक्ष अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स लतिशा सेल्स एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स क्युमोंग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स आहन इस्पात प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स तिलीबंध सेल्स एजेंसीज की विभिन्न फर्जी यूनिट्स के नाम पर फर्जी बिल जारी किए गए थे। यह कंपनियां केवल कागजों पर ही चल रही थीं। इन कंपनियों ने कोई माल सप्लाई नहीं किया, लेकिन फर्जी बिल के जरिए 650 करोड़ रुपये का माल सप्लाई किया गया। इन आरोपी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए 110 करोड़ रुपये के जीएसटी पेमेंट का बिल भी बनाया गया था। इस आधार पर कंपनियों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लिया था। सूत्रों ने बताया कि जांच में सामने आया कि फर्जी सेल्स बिल, ई-वे बिल, लॉरी रिसीट और दूसरे ट्रांसपोर्ट डॉक्युमेंट्स को गर्ग ने अपने कॉर्यालय में बनाया था।

