सुशील को 24 साल में कभी डांटने की जरूरत नहीं पड़ी: सतपाल

सुशील को 24 साल में कभी डांटने की जरूरत नहीं पड़ी: सतपाल

नयी दिल्ली। कुश्ती के द्रोणाचार्य महाबली सतपाल ने युवा खिलाडिय़ों को सुशील कुमार जैसा आदर्श शिष्य बनने का संदेश देते हुए मंगलवार को कहा कि उन्हें पिछले 24 साल में सुशील को कभी डांटने की जरूरत नहीं पड़ी।
पद भूषण से सम्मानित सतपाल ने यहां तितिक्षा पब्लिक स्कूल रोहिणी में एक स्वागत और सम्मान समारोह में यह बात कही। समारोह में स्कूल की तरफ से सतपाल और सुशील का सम्मान किया गया। सतपाल ने इस अवसर पर कहा, Þसुशील एक ऐसा खिलाड़ी है जिसने हर जगह देश का झंडा लहराया है। सुशील 11 साल की उम्र से आज तक मेरे साथ है। पिछले 24 साल में मुझे उसे डांटने की कभी जरूरत नहीं पड़ी और दोबारा उसे समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। महाबली सतपाल ने छात्र- छात्राओं से कहा, आप भी अपने फील्ड में आगे जाना चाहते हो इसलिए हमेशा लक्ष्य ऊंचा रखो। गुरु और माता-पिता का दर्जा सिर्फ भगवान से कम होता है इसलिए हमेशा गुरु और माता-पिता का सम्मान करो। मैं इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्कूल प्रबंधन को बधाई देता हूं। उन्होंने बच्चों से कहा, पता नहीं आप में से कौन सुशील से भी आगे निकल जाए। मैं भाग्यशाली हूं जो मुझे सुशील जैसा शिष्य मिला जिसने अपने प्रदर्शन से मेरा मान बढ़ा दिया। सुशील ने भी अपने गुरु के प्रति पूरा आदर प्रकट करते हुए कहा, मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे उनके जैसा गुरु मिला। गुरु को हमेशा भगवान का दर्जा दें और उनसे हमेशा कुछ न कुछ सीखने की कोशिश करते रहें तो आप जीवन में बहुत आगे जाएंगे। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पहलवान सुशील ने कहा, ऐसे सम्मान से आप पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है कि आपको और अच्छा करना है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं देश के लिए आगे भी इसी तरह पदक जीतता रहूंगा। इस अवसर पर दिल्ली टेबल सॉकर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज सैनी ने सतपाल और सुशील का सम्मान किया। तांग सू डो फेडरेशन ने भी दोनों कुश्ती दिग्गजों का सम्मान किया। कार्यक्रम में तांग सू डो के अध्यक्ष लव सहरावत, स्कूल की चेयरपर्सन ऋतम्भरा चौहान, पिं्रसिपल विम्मी जॉली, स्कूल के खेल प्रमुख देवेंद्र गौर तथा मुख्य सहयोगी निरंजन धनकड़, राहुल सैनी और बसंत राणा मौजूद थे।

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