
मुम्बई। चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के सरकार के फैसले से चालू सत्र में चीनी मिलों का मुनाफा तीन से चार प्रतिशत तक बढऩे की उम्मीद है, जिससे...
मुम्बई। चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के सरकार के फैसले से चालू सत्र में चीनी मिलों का मुनाफा तीन से चार प्रतिशत तक बढऩे की उम्मीद है, जिससे उन्हें गन्ना किसानों का बकाया कम करने में मदद मिलेगी।
बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारण करने वाली कंपनी क्रिसिल इंडिया की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि चीनी का समर्थन मूल्य 29 रुपये से करीब सात प्रतिशत बढ़ाकर 31 रुपये कर देने से चालू चीनी सत्र में घरेलू बिक्री से चीनी मिलों को लगभग 3,300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। इसके अलावा ज्यादा निर्यात मूल्य के माध्यम से उनकी कमाई 200 करोड़ रुपये बढ़ेगी। चीनी सत्र 1 अक्टूबर से अगले वर्ष के 30 सितम्बर तक होता है। रिपोर्ट के अनुसार इस समय चीनी मिलों के पास गन्ना किसानों का करीब 20,000 करोड़ रुपये बकाया है। मिलों को 3,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने से यह 18 फीसदी घटकर 16,500 करोड़ रुपये रह जायेगा। इसमें कहा गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढऩे से छोटी चीनी मिलों का परिचालन मुनाफा बढ़कर दो से पाँच प्रतिशत तक रह सकता है। वहीं, बड़ी मिलों का परिचालन मुनाफा बढ़कर 13 से 15 प्रतिशत के बीच पहुँचने की उम्मीद है। बड़ी मिलों की आमदनी में इथेनॉल के उत्पादन से भी वृद्धि होगी क्योंकि सरकार ने इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहनों की घोषणा की है। क्रिसिल का अनुमान है कि इस साल चीनी का उत्पादन पाँच प्रतिशत घटकर 18.50 लाख टन रह सकता है। उत्पादन कम होने से भंडार धीरे-धीरे कम करने में मदद मिलेगी जो अभी काफी ऊँचे स्तर पर है। दूसरी तरफ इससे चालू सत्र में चीनी के दाम भी बढ़ेंगे। पिछले सत्र की समाप्ति पर देश में चीनी का भंडार 88 लाख टन था जबकि पिछले पाँच साल में इसका औसत 70 लाख टन था। चालू सत्र में इसके और बढ़कर एक करोड़ टन पर पहुँचने का अनुमान है। वैश्विक स्तर पर उत्पादन में इस साल पाँच प्रतिशत की गिरावट के आसार हैं। सबसे बड़े उत्पादक ब्राजील में उत्पादन 12 प्रतिशत घटने की आशंका है। चीनी की कीमतों कुछ तेजी आयी है, जिससे भारतीय निर्यात को भी बल मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार चीनी का निर्यात इस साल बढ़कर 25 लाख टन पर पहुँचने का अनुमान है। फरवरी तक सात लाख टन चीनी निर्यात की जा चुकी है। इसमें कहा गया है कि मुनाफे में बढ़ोतरी और नकदी आने से चीनी मिलों की तरलता बढऩे के साथ उनके ऋण पोर्टफोलियो में भी सुधार आयेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन चीनी सत्र में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का औसत बकाया 9,000 करोड़ रुपये रहा है, जबकि वर्तमान में यह सर्वकालिक उच्च स्तर 20,000 करोड़ रुपये पर पहुँच गया है।

