Read latest updates about "हेल्थ" - Page 2

  • लापरवाही न बरतें जब सांस लेने में हो परेशानी

    सर्दी का मौसम दिन प्रतिदिन अब ढलान पर है। अधिक सर्दी के दिनों में कई बीमारियां शरीर को मौका पाते ही अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं पर सर्दी के कम होने पर भी हमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए क्योंकि तब भी कई बीमारियां हमें घेर लेती हैं। इन सब बीमारियों में एक बीमारी है सांस लेने में तकलीफ होना। हमें अगर...

  • रह-रह कर खाने की आदत छोडि़ए

    यह तो आप जानते हैं कि समय पर कोई भी काम होता है तो ठीक होता है। इसी से आदमी फलता-फूलता भी है, इसलिए हर आदमी को चाहिए कि वह निश्चित समय पर खाना खाए, निश्चित समय पर टहले। तभी खाया हुआ अन्न शरीर में लगता है जिससे शरीर एवं मस्तिष्क का विकास होता है। इस विकास के बल पर ही आज आदमी चांद व ग्रहों जैसी जगहों...

  • माउथ फ्रेशनर्स से लें पूरा मज़ा

    खाने के बाद मुंह से दुर्गन्ध न आए, इसलिए माउथ फ्रेशनर्स का खाने के बाद प्रयोग किया जाता है। खाने के बाद माउथ फ्रेश रखने का सबका अपना तरीका होता है जैसे पान, सुपारी, सौंफ आदि। अपने घर पर तो किसी भी तरीके से इनका सेवन किया जाए तो कोई अधिक नोटिस नहीं करता पर जब कभी आप रेस्तरां, पार्टी या किसी के घर...

  • अवसाद के लिए बेहतर है मनोचिकित्सा

    अवसाद का इलाज मनोचिकित्सा द्वारा किया जाता है और दवाइयों द्वारा भी। विश्व में अरबों रूपयें की एंटीडिप्रेसेन्ट दवाइयां हर वर्ष बिकती हैं। अमेरिकन साइकेट्रिक एसोसिएशन में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार मनोचिकित्सा दवाइयों से अधिक प्रभावशाली है। यदि लम्बे समय तक इलाज किया जाना हो तो मनोचिकित्सा लेना...

  • कुछ नये पुराने स्नैक्स

    साबूदाने के बड़े सामग्री:- साबूदाना, आलू, हरी मिर्ची, हरा धनिया, पीसी हुई लाल मिर्ची, अमचूर पाउडर, नमक, तेल। विधि:- साबूदाने को तीन चार घंटे के लिये थोड़ा सा पानी डालकर भिगो कर रखें। आलू को उबाल कर छील लें। हरी मिर्च को बारीक काटें व धनिया भी बारीक काट लें। एक बड़ा प्याला लेकर उसमें आलू डालकर...

  • रोज दही खाएंगे तो नहीं होगी दिल की बीमारी : शोध

    वॉशिंगटन । दही का सेवन करने से दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। यह बात एक शोध में सामने आई है कि हाई-ब्‍लडप्रेशर या हाइपरटेंशन से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जबकि दही का सेवन करने से इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। कई शोध पहले भी यह दावा कर चुके हैं कि डेयरी प्रोडक्ट दिल की...

  • हंसें, हंसें और खूब हंसें

    अनेक रोगों से मुक्ति के लिए तथा उन्हें नियंत्रित रखने के लिए हास्य एक अनुपम औषधि है। यह जरूरी है कि आप सही ढंग से हंसें और स्वस्थ रहें। आप अपने को रोगी अनुभव करते हैं, इसकी वजह यह है कि आपके कहकहे खो गए हैं-एक बार ठहाका लगायें, उन्मुक्त रूप से हंसें। आप भला चंगा अनुभव करने लग जायेंगे। वैज्ञानिक...

  • पुरूषों की मानसिक परेशानियां

    केवल महिलाओं की ही मानसिक परेशानियां नहीं होती, पुरूषों की भी होती हैं जैसे अपने कैरियर को चुनना और उसमें सफल होना, गर्लफ्रैंड के साथ संबंध, शादी के बाद पत्नी को खुश रखना, अच्छा पति और पिता साबित होना, भौतिक सुख सुविधाएं परिवार को देना, पत्नी और अपने माता-पिता के बीच सही से सामंजस्य बिठाना, मोटा...

  • जॉन्डिस लिवर की गड़़बड़ी से होता है

    लिवर हमारे शरीर का एक महत्त्वपूर्ण अंग है जो पेट के ऊपरी हिस्से में दाहिनी तरफ होता है। यह भोजन पचाने में सहायता करता है। शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं तथा परिवर्तनों में यह विशेष योगदान देता है। यदि लिवर सही ढंग से काम नहीं करता या काम करना बन्द कर देता है तो हम विभिन्न बीमारियों की चपेट...

  • ऐसे करें मसालों से उपचार

    प्रकृति ने हमें अनेक अमूल्य जड़ी-बूटियां एवं मसाले उत्तम स्वास्थ्य बनाये रखने हेतु वरदान स्वरूप उपहार में दिए हैं जिनका प्रयोग हम अक्सर भोजन बनाने के लिए किया करते है। यदि इन मसालों के औषधीय गुणों की ओर ध्यान केन्द्रित करें तो पायेंगे कि ये सभी व्यक्तियों की घातक बीमारियों को समाप्त करने में एक...

  • पान के शौकीन बनें

    हमारे देश में हर जगह पान के शौकीन मौजूद हैं, केवल शौक व मुख शुद्धि के बतौर ही नहीं, यह विभिन्न रीति-रिवाजों, शुभ कर्मों, पूजा, विधानों में भी प्रयोग में लाया जाता है। आकार व स्वाद सुगंध की दृष्टि से पान की कई किस्में प्रचलित हैं जैसे, मीठा पत्ता, मद्रासी, बनारसी, कपूरी आदि। स्वाद व पसंद के आधार पर...

  • रोग से आरोग्य की ओर

    रोग शरीर की असामान्य स्थिति है। यह वह स्थिति है जिसमें शरीर अपने अन्दर संचित गंदगी को विभिन्न तरीकों यथा-ज्वर, फोड़े फुंसी, दस्त, आंव आदि के द्वारा बाहर निकालने का प्रयास करता है। दूसरे शब्दों में रोग शरीर को विषमुक्त करने की एक प्राकृतिक प्रक्रि या है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोग का कारण कोई न...

Share it
Top