करियर: अच्छा व्यवसाय है गैंदा पुष्प उत्पादन

करियर: अच्छा व्यवसाय है गैंदा पुष्प उत्पादन

गैंदे के फूलों का अपना खास महत्त्व है। मन्दिरों में पूजा के लिए फूल मालाएं, हार व झालरें बनाने तथा विवाह-शादी, त्यौहारों, उत्सवों व अन्य समारोहों के आयोजनों में सजावट के लिए गैंदे के फूलों का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है।
गैंदे के फूल काफी समय तक खिले व ताजा रहते हैं जिसकी वजह से इनके फूलों की सजावट अति सुन्दर नजर आती है। यही कारण है कि गैंदे के फूलों की मांग प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। गैंदे की खेती करके अच्छा व्यवसाय चलाकर कई बेरोजगार युवा स्वरोजगार चलाकर आर्थिक लाभ कमा सकते हैं।

एक बीघा जमीन में कम से कम 6 क्विंटल फूल उगाए जा सकते हैं व 15 हजार रूपये प्रति बीघा आर्थिक लाभ कमा सकते हैं। गैंदे के फूलों को दो भागों में बांटा गया है जिन्हें अफ्रीकन गैंदा तथा फ्रैंच गैंदे के नाम से जाना जाता है। इन दोनों की खेती विभिन्न प्रकार की जलवायु में सारा साल भर सफलता पूर्वक की जा सकती है।
इसकी खेती सर्दियों में उन क्षेत्रों में नहीं की जा सकती जहां पर अधिक सर्दी या कोहरा पड़ता हो। गैंदे की खेती के लिए धूप वाला क्षेत्र ज्यादा उपयोगी पाया गया है। खेतों मेें पानी की निकासी का उचित प्रबंध होना चाहिए। अफ्रीकन गैंदे की चार किस्में पाई जाती हैं जिनके नाम अफ्रीकन जांयट, डबल, आरेंज क्लाईमैक्स तथा लोवल हैं। इसकी खेती के लिए जमीन नमीयुक्त होनी चाहिए। इसके पौधों को 40 सेमी. ग 40 सेमी. की दूरी पर लगाएं। इसके फूलों का आकार बड़ा होता है तथा पौधे लम्बे होते हैं।
फ्रैंच गैंदे के पौधों की लम्बाई कम होती है तथा फूलों का आकार छोटा होता है। इसकी भी चार किस्में होती हैं जिन्हें रस्टी रैड, बटर स्काच, रैड ब्रोकेट, लोकल नाम से जानते हैं। इसकी खेती के लिए जमीन हल्की होनी चाहिए तथा पौधों को 30 सेमी. ग 20 सेमी. की दूरी पर लगाएं। दोनों वर्गों की मिट्टी बारीक तथा बीमारियों व कीटों से मुक्त होनी चाहिए। एक बीघा जमीन में 50 ग्राम बीज पंक्तियों में डालें। ऊपर से हल्की मिट्टी का मिश्रण डाल कर घास से ढक दें तथा फव्वारे से पानी दें। जब पौधे उग कर 8-10 सेमी. के हो जाएं तो शाम के समय खेत तैयार करके लगाएं। साल में तीन फसलें ली जा सकती हैं।
नर्सरी लगाने का समय वर्ष में जनवरी-फरवरी, मई-जून तथा सितम्बर-अक्तूबर महीनों में उचित है जिनके प्रतिरोपण तथा फूलों को तैयार होने का समय क्र मश: इस प्रकार में होता है। जनवरी-फरवरी की लगाई नर्सरी का प्रतिरोपण फरवरी-मार्च तथा फूलों का आने का समय सितम्बर-अक्तूबर तथा सितम्बर-अक्तूबर में लगाई नर्सरी का प्रतिरोपण अक्तूबर-नवम्बर व फूल आने का समय मार्च-अपै्रल महीनों में होता है।
नर्सरी लगाने के एक महीने बाद फूल के पौधों का प्रतिरोपण करें। खाद में 5 किग्रा. गोबर की खाद, नत्रजन 20 ग्राम, फास्फोरस 20 ग्राम तथा पोटाश 20 ग्राम प्रति वर्ग मीटर डालें। खेत तैयार करते समय नत्रजन की आधी मात्र व फास्फोरस पोटाश की पूरी मात्र खेत में डालें। पौधों के प्रतिरोपण के 30 दिन बाद नत्रजन आधी मात्र डालें। पौधों के प्रतिरोपण के 40 दिन बाद पौधों की पिचिंग करें जिसमें पौधों का उपरी भाग काट दें।
इससे पौधों में अधिक टहनियां निकलेंगी व फूल भी अधिक लगेंगे। जब फूल पूरी तरह खिल जाएं, तब फूलों की तुड़ाई सुबह शाम करके टोकरियों में या फिर जूट की बोरियों में पैक करके बेचने के लिए भेजें। इस तरह गैंदे के फूलों की खेती करके अच्छा स्वरोजगार चलाया जा सकता है।
-प्रताप अरनोट

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