रहस्य रोमांच: जनजातीय विवाह, कुछ विचित्र रस्में

रहस्य रोमांच: जनजातीय विवाह, कुछ विचित्र रस्में

विवाह मानव की एक अनिवार्य आवश्यकता है। यही कारण है कि संसार भर में इसका प्रचलन किसी न किसी रूप में अवश्य है। हां, यह सत्य है कि जनजातियों में प्रचलित विवाह किसी सिद्धान्त या आदर्श पर आधारित नहीं होकर मात्र प्रचलनों एवं अंधविश्वासों पर आधारित होता है। आइए जनजातीय विवाह की इन चित्र-विचित्र रस्मों पर दृष्टिपात करें।
– स्कॉटलैंड में वर को दुल्हन तभी प्राप्त हो सकती है जब लड़की की मां नमक से भरी हुई चीनी मिट्टी की प्लेट को भावी दामाद के सिर पर मारकर फोड़ देती है।
– फिलीपींस के नेग्रिटो नामक द्वीप के मूल निवासियों में विवाह की स्वीकृति देने के उपरान्त वर- वधू को एक सार्वजनिक मंच पर बैठा दिया जाता है। तत्पश्चात वे दोनों तब तक अपना सिर आपस में टकराते रहते हैं जब तक कि दोनों लहूलुहान न हो जायें।
– पूर्वी नाइजीरिया में वर को वधू की प्राप्ति के पूर्व चाबुक के तीन प्रहार सहने होते हैं।
– पोलीनीशिया द्वीपसमूह के आदिवासी शादी के अवसर पर जहां अपने पूर्वजों की अस्थि की पूजा करते हैं वहीं ब्राजील के आदिवासी शादी में वर तथा वधू के कानों में छेदकर सलाई जैसी लकड़ी डालना आवश्यक समझते हैं।
– फिजी में जहां शादी से पूर्व वधू को पिंजड़े में बंद कर दुष्टात्माओं से सुरक्षित रखने का रिवाज है वहीं तिब्बत में दुल्हन पक्ष के लोग वधू को ही छिपा देते हैं और जब वर उसे खोजने आता है तो वधू पक्ष के लोग उसे तरह-तरह से परेशान करते हैं।– सूडान में रहने वाली जनजातियों में शादी से पूर्व वर व वधू के पक्ष वाले सामूहिक नृत्य करते हैं जिनमें वर-वधू अपने-अपने कपड़े नाचते हुए उतार लेते हैं।वधू के कपड़े वर तथा वर के कपड़े वधू नाचते हुए पहन लेती हैं। सामूहिक नृत्य में परिधान बदलने की इस क्रि या द्वारा शादी की स्वीकृति मान ली जाती है।
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– अफ्रीका की जनजाति “अलोवा” वर तथा वधू की उम्र में अधिकतम अन्तर का पक्षधर है। उनका विश्वास है कि अन्तर की जितनी अधिकता होगी, संतान उतनी ही अच्छी होगी। यही कारण है कि 40 वर्ष की वधू व 16 वर्ष के वर को सर्वोत्तम दंपति माना जाता है।
– भारत के सिक्किम की ‘लपेसा’ जनजाति के वर को ही कन्या की जगह अपने मां-बाप को छोड़कर बिलख बिलखकर विदा होकर ससुराल में जाकर बसना पड़ता है।
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– दक्षिण भारत की ‘टोडा’ जनजाति के युवक को जहां अपने भावी श्वसुर के पैर पर बार-बार सिर रखकर याचना करनी पड़ती है कि वह उसकी लड़की को ठीक से रखेगा, वहीं दूसरी ओर छोटा नागपुर क्षेत्र में वधू बनने वाली युवती का अपहरण करना होता है।
– सुमात्रा में कन्या के पिता कन्या की इच्छानुसार वस्तु द्वारा तोलते हैं। तोलने वाली वस्तु अनाज या किराने की वस्तु हो सकती है।
– चीन में विवाह के इच्छुक वर को सुई धागा दिया जाता है जिसे प्रथम प्रयत्न में धागा पिरोना होता है। यदि वर इस में विफल रहा तो शादी विफल मानी जाती है। सहारा मरूस्थल के ‘टिम्बकटू’ नामक स्थान की ‘त्वरिम’ जाति के पुरूष शादी के बाद पर्दे में रहता है। विवाहोपरान्त ये लम्बा सा घूंघट निकालकर अपनी मां, बहन, दादी भाभी तथा पत्नी से पर्दा करते हैं।
– विपिन कुमार

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