आगामी वित्त वर्ष के बजट में कर की दरें कम करने पर विचार : जेटली

आगामी वित्त वर्ष के बजट में कर की दरें कम करने पर विचार : जेटली

 कर की दरें कम करने पर विचार : जेटलीफरीदाबाद । नोटबंदी के बाद केन्द्र सरकार कर की दरों में कमी कर राजस्व बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत है और वह अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये दरें कम करने पर भी विचार कर रही है। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजस्व सेवा के केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क के 68 वें बैच के अधिकारियों को आज यहाँ संबोधित करते हुये कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिये देश में भी करों की दरें कम करने की जरूरत है।  जेटली ने कहा “अब समय आ गया है कि कर की दरें कम हो जिससे सेवाओं को अधिक से अधिक वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाकर आय को बढ़ाया जाये।”
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उन्होंने कहा कि अागे चलकर सेवाओं में यही महत्वपूर्ण बदलाव नजर आयेगा। राजस्व बढ़ाने का जिक्र करते हुये टली ने कहा कि आने वाले समय में देश में ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिससे लोग नियमों का पालन करें और स्वेच्छा से उचित कर की अदायगी करें। आने वाले दशकों में देश एक ऐसा राष्ट्र बनने जा रहा है जहाँ कर को लेकर लोग स्वयं नियमों का पालन करेंगे। देश में कर को लेकर लोगों की भावनाओं का जिक्र करते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से यह धारणा आम थी कि सरकारी राजस्व की अदायगी करना कोई अनैतिक काम नहीं है। इसे कारोबारी सूझबूझ का एक भाग समझा जाता रहा है, किन्तु उपेक्षा की बजह से लोगों को गंभीर नतीजे भी भुगतने पड़े। उन्होंने कहा कि बाजिब कर की अदायेगी देश के लोगों का दायित्व है और कर नहीं चुकाने के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद ऐसी चर्चा जोरों पर है कि सरकार आगामी वित्त वर्ष के बजट में कर की दरों में कमी कर सकती है जिससे लोग स्वेच्छा से कर की अदायगी के लिये स्वयं आगे आयें। 

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