यहां मां के नाम से पहचाने जाते हैं बच्‍चे, पति होता है घर में मेहमान

यहां मां के नाम से पहचाने जाते हैं बच्‍चे, पति होता है घर में मेहमान

सुमात्रा। दुनिया भले ही आज महिलाओं की ताकत को पहचान रहीं हो और उन्‍हें बराबरी का दर्जा देने की बा
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त करती हो, लेकिन इंडोनेशिया में एक ऐसी जगह भी है जहां महिलाएं ही सदियों से राज कर रहीं हैं। हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया के पश्चिमी सुमात्रा में रहने वाले मिनांगकबाउ संस्‍कृति के लोगों की जो पितृवंशीय नहीं बल्कि मातृवंशीय है।इसे दुनिया के सबसे बड़ा मातृवंशीय समाज भी माना है। यहां सदियों पहले ही महिलाओं ने अपने दम पर समाज को संभालना शुरू कर दिया और वक्‍त के साथ यहां हर चीज महिलाओं के हाथ में आ गई।
महिलाएं होती हैं सर्वोपरि
इस समुह की सबसे खास बात यह है कि दुनिया के अन्‍य देशों के बजाय यहां महिलाएं ही सर्वोच्‍च होतीं हैं। समाज में महिलाओं का वर्चस्‍व प्राप्‍त है और पुरखों की संपत्ति के अलावा खेती भी महिलाओं से महिलाओं तक विरासत में पहुंचती है। बच्‍चों को उनके पिता की बजाय मां के नाम से पहचाना जाता है और इन महिलाओं के पति घर के मुखिया ना होते हुए घर में केवल एक मेहमान की तरह होते हैं।
12वीं सदी से चली आ रही परंपरा
कहा जाता है कि 12वीं सदी में राजा महाराजो दिराजो जिन्‍होंने कोटो बाटु किंगडम स्‍थापित किया था, वो तीन बेटों और तीन पत्‍नीयों को पीछे छोड़कर दुनिया से चले गए। इसके बाद उनकी पहली पत्‍नी पुति इंडो जालितो ने बच्‍चों के साथ ही राज्‍य की जिम्‍मेदारी संभाली और यहीं से इस राज्‍य के मातृवंशीय होने के बीज पड़े।
कई धर्मों का है मेल
मिनांग लोग वास्‍तव में जीववादी थे और प्रकृति की हर चीज की पूजा करते थे। यह तब तक रहा जब तक यहां भारत से हिन्‍दू और बुद्ध धर्म नहीं पहुंचा। इसके बाद आज भी इनकी संस्‍कृति स्‍थानीय परंपराओं, मान्‍यताओं और कानूनों पर निर्भर है जो कि हिन्‍दू और जीववादी सिस्‍टम से प्रेरित हैं। इनमें पवांग होते हैं जो अत्‍माओं के एक्‍सपर्ट होते हैं और बीमारियों के इलाज के अलावा भविष्‍य बताते हैं। इन सब के अलावा मिनांग इस्‍लाम को भी मानते हैं।
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अलग है परंपराएंयहां की परंपराएं भी दुनिया से अलग हैं। यहां शादी के बाद पत्‍नी, पति के घर नहीं बल्कि पति उसकी पत्‍नी के घर आता है। दहेज का आंकलन दुल्‍हन के परिवार द्वारा दूल्‍हें की शिक्षा के आधार पर किया जाता है। शा‍दी इस समाज में बड़ा आयोजन होता है। इसमें दूल्‍हे को उसके घर लेकर दुल्‍हन के यहां ले जाया जाता है जहां रस्‍में पूरी होती हैं।मिनांग महिलाओं के लिए शादी एक सामाजिक विशेषाध‍िकार लेकर आती है। वरिष्‍ठ महिलाएं सबकुछ संभालतीं हैं। घर के प्रमुख के रूप में वो परिवार की जिम्‍मेदारी लेने के साथ ही जमीन और घर के काम करती हैं। महिलाएं ही विवाद सुलझातीं हैं साथ ही रिश्‍ते की बात करने के अलावा अन्‍य आयोजनों में मुख्‍य भूमिका निभाती हैं।
पति रहते हैं बाहर
यहां पति को घर में मेहमान माना जाता है और वो घर में कमाकर लाते हैं। इसके अलावा घर के खर्च और बच्‍चों को पालने की जिम्‍मेदारी उनकी होती है। इनमें से कई तो गांव छोड़कर दूसरे शहरों में काम की तलाश में चले जाते हैं और समय-समय पर ही घर आते हैं और जब भी वो घर आते हैं, किसी भी घरेलु काम में दखलंदाजी नहीं करते।

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