असहिष्णुता की बात करने वाले इस देश को समझ नहीं पाए

असहिष्णुता की बात करने वाले इस देश को समझ नहीं पाए

कुछ लोग भारत के हिन्दू और मुसलमानों को नाहक में बरगला रहे हैं। मीडिया के द्वारा बराबर प्रचार किया जाता है कि भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है लेकिन मेरा मानना है कि जबतक इस देश में समझदार लोग जिंदा हैं और भारत का संविधान प्रभावी है, तब तक इस देश में असहिष्णुता किसी कीमत पर नहीं आ सकती है।

आज मैं आपके सामने कुछ उदाहरण प्रस्तुत करता हूं जो इस देश में पनप रहे मौका परस्तों की आंखें खोल देंगे। एक हिन्दू परिवार द्वारा मुस्लिम लड़के का पालन-पोषण किया गया। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है। हकीकत है कि थाने, महाराष्ट्र स्थित बेडेकर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सुचित्रा नायक ने अब्दुल शेख नामक ऐसे अनाथ मुस्लिम लड़के को गोद लिया जिसने उनके कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दाखिला लिया था। दाखिले के दौरान उससे बातचीत करने पर डॉ. सुचित्रा को उसकी स्थिति के बारे में पता चला और उसका भविष्य संवारने के लिए उन्होंने उसे अपनाने का मन बनाया। ऐसा करने से पहले उन्होंने अपने पति श्री नायक तथा परिवार के अन्य सदस्यों से भी परामर्श किया, जिन्होंने उनके इस प्रयास के प्रति अपनी सहमति जताई। अब्दुल को एक भरा-पूरा परिवार मिल गया और वह नायक परिवार का सदस्य बन गया। बाद में उसे स्थानीय डाकखाने में नौकरी मिल गई तो परिवार ने उसकी शादी किसी मुस्लिम लड़की से करने का फैसला किया। डॉ. सुचित्रा नायक तथा उनके पति, अब्दुल के लिए एक योग्य वधू ढंूढने में जुट गए और जल्द ही उन्हें बरसोवा के अंजुमन-ए-इस्लाम बावला अनाथालय में एक योग्य मुस्लिम लड़की ढंूढने में सफलता मिली। परिणामस्वरूप अभी हाल ही में 4 नवम्बर 2०18 को अब्दुल शेख का निकाह उस अनाथ लड़की नईमा शेख के साथ संपन्न हुआ। इस तरह की भलाई तथा सहिष्णुता के कदम सांप्रदायिक सदभावना तथा परस्पर सहिष्णुता, जो हिन्दुस्तान के सामाजिक ताने-बाने में गुंदे हुए हैं जो हमारे समाज को लगातार मजबूती प्रदान कर रहा है।

एक उदाहरण हैदराबाद का है। हैदराबाद के कुंता मोहल्ले में मस्जिद-ए-इशाक ने वहां रहने वाले विभिन्न धार्मिक समुदाय के लगभग डेढ़ लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। इस मस्जिद के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों का इलाज करने के अलावा उन्हें राज्य द्वारा चलाए जाने वाले 3० अस्पतालों में रैफर किया जाता है ताकि ये मरीज वहां दाखिला लेकर उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवा ले सकें और वहां पर तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों की व पैरामेडिकल सेवाओं का लाभ ले सकें। यहां पर गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम, बच्चों के लिए टीकाकरण तथा छुआछूत की बीमारियों की भी जानकारी के लिए कार्यक्र म आयोजित किए जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के लडेवाला गांव में स्थित एक मंदिर जो बाबरी मस्जिद की घटना के बाद से वीरान पड़ा था, की देख-रेख, साफ-सफाई तथा नियमित सफेदी इत्यादि वहां के स्थानीय मुसलमानों द्वारा करवाई जाती है। गांव के मुसलमान उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब उनके हिन्दू भाई गांव लौटें और उस मंदिर के धार्मिक रीति-रिवाज पुन: आरंभ करें। इस मंदिर का रख-रखाव करने के लिए गांव के मुसलमान आपस में चंदा भी जुटाते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर में ही नन्हेरा गांव में रहने वाले एक हिन्दू मिस्त्री का परिवार गांव में स्थित एक 12० वर्ष पुरानी मस्जिद का ध्यान रखते हुए वहां सफाई करवाता है। देख-भाल करता है तथा नियमित तौर पर सफेदी इत्यादि करवाता है। गौरतलब है कि इस गांव में कोई मुस्लिम नहीं रहता। गुजरात के बडोदरा जिले में स्थित तरसाली गांव में एक-घंटे लंबा कव्वाली का आयोजन किया गया। इस कार्यक्र म में कव्वालों ने पवनपुत्र हनुमान का गुणगान करते हुए बहुत ही भाव विभोर कर देने वाली कव्वालियां गाई। जानकारी में रहे कि यहां प्रत्येक शनिवार को इलाके के करीब तीन हजार लोग जिनमें 5०० मुसलमान भी हैं, इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। हनुमान जी का आशीर्वाद पाते हैं। यह अंतरधार्मिक सहिष्णुता का जीता-जागता उदाहरण है।

सदभावना व अंतरधर्मी सहिष्णुता का उदाहरण पेश करते हुए उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर के गांव बाघसराय में रहने वाले एक स्थानीय मुसलमान मोहम्मद सलीम ने अपने हिन्दू मेहमानों के लिए ऐसे निमंत्रण पत्र छपवाए जिनमें हिन्दू देवी-देवता, जैसे-श्रीराम, सीता व पवित्र वस्तुएं, जैसे-पूजा की थाली, कलश व दीपक इत्यादि छपे हुए थे। सलीम को उम्मीद है कि उनके छोटे से प्रयास से हिन्दू और मुसलमानों के बीच सदभाव व प्रेम बढ़ेगा। मैं शर्तिया तौर पर बताना चाहूंगा कि जबतक हमारे देश में यह जिंदा है, हमारे देश का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। हमारे दुश्मन धूल चाट रहे हैं और आने वाले समय में चाटते रहेंगे। इस सहिष्णुता को कोई मिटा नहीं सकता है। हमें इस प्रकार की घटनाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए और प्रचारित भी करना चाहिए। इसलिए हमें सतर्क रहना होगा, साथ ही सरकार को भी सतर्क रहना चाहिए। प्रशासन को इस प्रकार के कार्यों में सहयोग करना चाहिए और मीडिया को इस प्रकार के कार्यों का प्रचार-प्रसार करना चाहिए।

-हसन जमालपुरी

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