Read latest updates about "कहानी" - Page 4

  • बाल कथा: महात्मा का तर्क

    किसी घने जंगल में एक बाघ काफी समय से शिकार के लिये इधर उधर भटक रहा था। शिकार न मिलने के कारण वह निराश होकर एक जगह खड़ा हो गया और चारों ओर निहारने लगा। अचानक उसकी दृष्टि जंगल के खुले भाग पर पड़ी। वहां एक गाय बड़े आराम से हरी हरी दूब चर रही थी। दूब चरते चरते उसने जैसे ही गरदन उठाई तो उसकी...

  • दोस्ती करने से पहले हाथ को देखें

    हाथ हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग हैं। हाथों की रेखाओं और हाथों की बनावट से जीवन की छोटी-बड़ी घटनाओं और व्यक्ति के स्वभाव को जाना जा सकता है। यदि आप किसी से दोस्ती करना चाहते हैं तो उसके हाथों की संरचना को जरूर देखें। उसके हाथों की बनावट को देखकर आप जान सकते हैं कि उस व्यक्ति से दोस्ती हितकर होगी...

  • व्यंग्य: मूर्ख माहात्म्य

    मूर्ख बेहद बुद्धिमान और साधु किस्म के प्राणी होते हैं। वे जानते हैं यदि उन्होंने अपने किसी काम से यह जतला दिया कि उनमें थोड़ी भी अक्ल है तो उन्हें किसी न किसी जिम्मेदारी में फंसा दिया जायगा और वे बैठे-ठाले सांसारिकता के मोह जाल में उलझ जाएएंगे। अपने को मूर्ख दिखाना उनकी स्वभावगत कमजोरी है। इसका...

  • दो गधों का बोझ

    बीरबल और बादशाह अकबर में हंसी मज़ाक की नोंक झोंक तो जग जाहिर है। आइए पढि़ए, हंसिए और हंसाइये दूसरों को। एक बार बादशाह अकबर, उनके पुत्र सलीम और बीरबल फरवरी माह में प्रात: सैर को निकले। काफी देर तक टहलते और बातें करते हुए ये लोग काफी दूर तक निकल गये। सोचा, अब वापिस चलना चाहिए। सूर्य देवता भी काफी ऊपर...

  • बाल कथा: मां के लिए

    मैं एक घर के करीब से गुजर रहा था कि अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज आई। उस बच्चे की आवाज में इतना दर्द था कि अंदर जा कर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका। अंदर जा कर मैंने देखा कि एक माँ अपने दस साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और...

  • जानकारी: समुद्र की चालाकी

    बात बहुत पुरानी है। एक दिन हवा, धरती और समुद्र बातें कर रहे थे। तीनों बढ़-चढ़ कर अपने बारे में बता रहे थे। हवा ने कहा, 'मैं बहुत ताकतवर हूं। मेरे तूफान झंझावात हैं। इससे मैं कुछ भी कर सकता हूं।' समुद्र ने भी शेखी बघारी, 'मेरे पास ज्वारभाटा है, ऊंची-ऊंची लहरें हैं, इनको देखकर कोई भी डर...

  • बाल कथा: एक रोटी

    'एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी।' 'वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी जिसे कोई भी ले सकता था..।''एक कुबड़ा व्यक्ति रोज उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रास्ते पर चलता हुआ...

  • बाल कथा: लालच में जब पड़ी धमाधम

    एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। आज के किसानों की भांति वह भी कड़ी मेहनत करता था। कड़कती धूप में हमेशा अपने खेत में हल जोतता, और बरसते मेहों के बीच भी खेत में कुछ-न-कुछ काम करता रहता। एक दिन वह कड़ी धूप में हल चला रहा था कि आकाश मार्ग से भगवान शंकर व पार्वती उधर से निकले। पार्वती जी...

  • बाल कथा: सही परामर्श

    चन्दननगर एक छोटा सा राज्य था। उदयभानु उस समय वहां के राजा थे। राजा बड़ा दयालु और दानवीर था। उसके राज्य के बाहर जंगल और उद्यानों में अनेक पशुपक्षी निर्भय होकर स्वतंत्र रूप से घूमते थे क्योंकि वहां के नागरिक उनका शिकार नहीं करते थे। इसलिये आसपास के राज्यों में भी पक्षी वहां आकर जंगल में मंगल करने...

  • बाल कथा : चूहे ने घूमा मेला

    पचरी वन में एक चूहा अपने परिवार के साथ रहता था। पास के वन बंगोली में हर साल मेला लगता था। चूहे ने कभी मेला नहीं देखा था। उसकी भी मेला देखने की इच्छा थी। एक दिन चूहे ने सूअर से कहा, 'सूअर भाई, मैं मेला देखने जाना चाहता हूं। मेला कैसा होता है?' सूअर ने कहा, 'भाई, तू भूलकर भी मेले में न...

  • लघु कथा: किनारा

    श्रावण अपनी दादी के साथ रहता है। माता-पिता भी हैं। गरीबी इन्हें पुत्र वियोग पर विवश कर देती है। संयोग सदैव उदर पोषक नहीं हो सकता। गरीबी और वात्सल्य में सनातन बैर है। सो साल के ग्यारह महीने इन्हे बाहर ही रहना पड़ता है। श्रावण अपनी दादी का इकलौता सहारा है। दोनों ही परस्पर अवलंबित हैं। श्रावण कहने को...

  • बाल कथा: लालची पुत्र

    दौलत राम एक गरीब ब्राह्मण था। एक बार वह गर्मी के दिनों में एक घने वृक्ष की छाया में सो रहा था। अचानक उसकी आंख खुली तो उसने एक काले नाग को अपने ऊपर लटकते देखा, जिसकी पूंछ डाल से लिपटी हुई थी। दौलत राम डर के मारे कांपने लगा। काले नाग ने कहा, 'हे ब्राह्मण, घबराओ मत और मेरे लिए एक कटोरा...

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