Read latest updates about "कहानी" - Page 4

  • बाल कथा: साझे की हांडी

    करनदेव खिलौनों का व्यापारी था। वह ईमानदार और मेहनती था। धन्नू और मन्नू भी खिलौनों का व्यापार करते थे। दोनों बहुत बेईमान और ईष्यालु थे। हमेशा करनदेव को नीचा दिखाने की सोचते थे। यदि करनदेव किसी खिलौने को पचास रूपए में बेचता तो वे उसे चालीस रूपए में बेच देते। देखते-देखते करनदेव का व्यापार चौपट होने...

  • बाल कथा: लालची साहूकार

    सेठ करोड़ीमल बड़ा लालची था। आभूषण गिरवी रखकर ब्याज पर उधार देता था। अक्सर आभूषणों की बेईमानी कर लेता था। एक बार नंदलाल आभूषण देकर कुछ रुपये उधार ले गया। कुछ दिनों बाद उसने ब्याज सहित मूलधन वापस देते हुए अपने गहने वापस मांगे। आभूषणों की कीमत रुपयों से कई गुणा अधिक थी। करोड़ीमल ने कोई भी आभूषण गिरवी...

  • बाल कथा :बुद्ध ने कहा

    राजसी ठाठ बाट छोड़कर बुद्ध ने संन्यास ले लिया था। वे अपने शिष्यों के साथ नगर-नगर और गांव गांव घूम कर लोगों को धर्म का उपदेश देते थे। एक दिन महात्मा बुद्ध उपदेश देने के लिये मगध देश के किसी गांव में पहुंचे। उस गांव का मुखिया क्रोधी, तानाशाह और रूढि़वादी विचारों का व्यक्ति था। वह अपने आप...

  • बोध कथा: पुरानी याद ताज़ा

    बहुत निर्धन, असहाय सा परिवार था जिस में बालक बोनापार्ट का जन्म हुआ। फ्रांस देश के एक छोटे से गांव में गांव की ही पाठशाला का वह विद्यार्थी था। अदम्य साहस का स्वामी यह बालक जीवन में कुछ कर दिखाने तथा कुछ बन पाने की मन में हसरतें पाले रहता। वक्त ने करवट बदली। अनेक असफलताओं तथा उतार चढ़ाव से...

  • लघु कथा: चाय

    आम तौर पर हम सब का दिन चाय से शुरू होता है। चाय अब हमारा राष्ट्रीय पेय बन चुका है। जगह जगह चाय के ठेले मिलते हैं। रेल्वे स्टेशनों पर ही नहीं, गाड़ी के अंदर भी चाय हर समय मिलती है। यह बात अलग है कि चाय के कप निरन्तर छोटे होते जाते हैं और दाम उसी अनुपात में बढ़ते जाते हैं। चाय का एक अनुभव...

  • बाल कहानीः भक्षक

    मौर्य साम्राज्य! सम्राट अशोक के वंशज। इस समय राजा वृहद्रथ का शासन था। बहादुर, शांतिप्रिय, बौद्धधर्म का अनुयायी था वह, मगर उसी का सेनापति पुष्पमित्र खलबली मचा, अराजकता का सहारा ले स्वयं राजा बनने के सपने संजोने लगा। उसने सेना के कुछ अधिकारियों में फूट डाल दी। इससे राज्य की स्थिरता को आंच आने लगी। ...

  • बाल कथा: बेटी हो तो ऐसी हो

    नूतन अपनी कॉलोनी के बाल मित्रों के साथ खेलकर कुछ थक गई थी। उसने सोचा चलो घर चलकर कुछ खा पी लें और फिर खेलने आ जाएंगे। वह अपनी सहेली कुसुम से कह कर घर के लिए चल दी। दोपहर का समय था। सूरज आसमान में तप रहा था। भयंकर गर्मी थी। कॉलोनी सुनसान पड़ी थी। ऐसी गर्मी में कौन घर के बाहर निकले। सब अपने...

  • बाल कथा: अफवाह

    चालू लोमड़ एक नं. का ठग था। जब भी उसे मौका मिलता, हाथ साफ करने से बाज नहीं आता। चंपक वन के जानवर उस से परेशान थे। पुलिस से भी उस की मिलीभगत थी। उन्हीं दिनों चंपक वन में चेतू चीता आया। वह एक ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर था। उस ने आते ही चालू के रंगढंग देखे और उसे सुधर जाने को कहा।पर चालू कब...

  • बाल कथाएं: विद्यार्थी

    एक लड़का था, उसे पुस्तकें पढऩे का बड़ा चाव था। वह महापुरूषों की जीवनी बड़े ध्यान से पढ़ता और सोचता कि काश वह भी ऐसा ही बन सकता। वह गरीब मजदूर बाप का बेटा था। बाप इतने पैसे नहीं कमा पाता था कि अपने लाडऩे को अच्छी अच्छी पुस्तकें खरीद कर दे सके। वह परिवार का भरण पोषण ही मुश्किल से कर पाता...

  • कंजूस सेठ, चालाक नौकर

    प्रेमनगर नाम का एक बड़ा-सा कस्बा था। कस्बे के बाजार में सेठ घिस्सूमल हलवाई की मिठाई की दुकान थी। एक ओर बड़े-बड़े थालों में तरह-तरह की मिठाइयां सजी रहती थीं, दूसरी ओर दुकान में बैठकर खाने पीने वालों के लिये इंतजाम था। घिस्सूमल जी कहने को तो सेठ थे पर थे एक नंबर के कंजूस। दुकानदारी के हिसाब...

  • बाल कहानी: चीतों के गाल पर काले दाग

    बहुत पहले की बात है। किसी गांव में एक आलसी शिकारी रहता था। शिकारी की पत्नी सुंदर और अच्छे स्वभाव की थी। मगर शिकारी शिकार के लिए जंगल न जा मटरगश्ती कर के दिन बिता देता था।उस की पत्नी सारे दिन घर के काम में लगी रहती थी। शाम को घर आने पर शिकारी पत्नी से झूठ बोल देता कि जंगल गया था, कोई शिकार...

  • मुर्गे का बंटवारा

    नालंदा में किसी समय रामू नाम का लकड़हारा रहता था।...

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