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  • बोध कथा: प्रेम भाव

    एक करोड़पति बहुत परेशानी में था। करोड़ों का घाटा हो गया था और सारी जीवन की जमापूंजी डूबने के करीब थी। जीवन की नौका डगमगा रही थी। वह कभी मंदिर नहीं गया था, उसने कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी कभी व्यापार से! हालांकि पूजा के लिए उसने पुजारी रख छोड़े थे, कई मंदिर भी बनवाये थे, जहां वे...

  • बाल कथा: प्रश्न का उत्तर

    पदमपुराण की कथा में एक स्थान पर एक प्रसंग आता है कि एक समय ईश्वर भक्त गजराज कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंडकी नदी में स्नान कर रहा था। स्नान करते समय उसका पैर एक विशालकाय मगरमच्छ ने पकड़ लिया। असहय पीड़ा से कराहते हुए हाथी विष्णु भगवान को पुकारने लगा। जैसे ही भगवान विष्णु के कानों में अपने प्र्रिय...

  • खुशामद खुदा को भी पसंद है

    एक बार शहंशाह अकबर ने उस व्यक्ति को 500 मोहरें देने की घोषणा की कि जो उसके दरबारी मुस्तफा के मन में क्या है, यह सही-सही बता देगा। मुस्तफा का चेहरा हमेशा निर्विकार और सपाट रहता जिससे यह कहना बहुत कठिन था कि वह क्या सोच रहा है किंतु बीरबल ने यह चुनौती सहर्ष स्वीकार की।'ठीक है। अभी बताओ कि वह...

  • व्यंग्य: नाम कथा

    नाम मनुष्यों के ही नहीं होते। पालतू पशुपक्षियों, मकानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों, नगरों, गली मुहल्लों, सड़कों चौराहों के भी होते हैं। शेक्सपियर ने कहा है कि नाम में क्या रखा है। गुलाब को किसी नाम से भी पुकारो, गुलाब-गुलाब ही रहेगा, बहुत सही नहीं है। नाम की महिमा अपार है। देवी देवताओं के कई कई नाम...

  • बाल जगत/जानकारी: छिपकलियों का विचित्र संसार

    -सुनील परसाईऐंगुइस: इसे मंद कृमि भी कहते हैं। यह यूरोप तथा एशिया में पाई जाती है। यह सांप जैसी छिपकली है। इसमें पैर नहीं पाये जाते लेकिन मेखलाओं और स्टर्नम के अवशेष पाये जाते हैं। इसके शरीर पर चिकने एवं गोल शल्क पाये जाते हैं। यह मिट्टी में बिल बनाकर उसमें रहती है। यह शिशुप्रज होती है। इसकी खाल में...

  • नाम कथा

    नाम मनुष्यों के ही नहीं होते। पालतू पशुपक्षियों, मकानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों, नगरों, गली मुहल्लों, सड़कों चौराहों के भी होते हैं। शेक्सपियर ने कहा है कि नाम में क्या रखा है। गुलाब को किसी नाम से भी पुकारो, गुलाब-गुलाब ही रहेगा, बहुत सही नहीं है। नाम की महिमा अपार है। देवी देवताओं के कई कई...

  • बाल जगत: लाल किला - कुछ रोचक जानकारी

    - अनिल शर्मा 'अनिल'- 5 अगस्त को प्रधानमंत्री देश को लालकिले की प्राचीर से ही सम्बोधित करते हैं। - विदेशी आक्रमणकारियों ने कई बार इस पर हमला किया। बेशकीमती सामान लूटा। अंग्रेज भी देश से जाते जाते लालकिले से कीमती वस्तुएं ले जाने से नहीं चूके।- महल में बादशाह के कर्मचारियों की रिहायश के भी भवन बने...

  • बाल कथा : ईमानदारी का फल

    बहुत पुरानी बात है। किसी गांव में कालू नाम का एक बालक रहता था। उसकी उम्र उस समय बारह वर्ष की थी। वह एक लकड़हारे का पुत्र था। उसका पिता बूढ़ा और बीमार था, इसलिये वह अधिक चलने फिरने और शारीरिक परिश्रम करने के योग्य नहीं था। घर में बस दो ही प्राणी थे-कालू और उसका पिता। अपने पिता की देखभाल...

  • बोधकथा: मां की सीख

    एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से वीडियो चैट करते वक्त पूछ बैठी- 'बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?'बेटा बोला-'माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके...

  • सवाल एक बल्ब का

    अपने घर मकान में बिजली गुल होने पर बैट्री या जेनेरेटर की व्यवस्था की जाती है। घर का दरवाजा बंद होने पर रोशनी सिर्फ घर के भीतर ही रहती है। यदि कमरे के बाहर छोटा या बल्ब लगा दिया जाये तो कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आयेगा। इसी तरह मकान या बंगले के जेनेरेटर की लाइन से एक बल्ब मुख्य द्वारा पर लगा...

  • व्यंग्य: अंडे का फंडा

    अंडों के साथ बचपन से अपनी निकटता देखकर अक्सर मुझे भ्रम हो जाता है कि मैं कहीं अंडा तो नहीं? जन्म से ब्राह्मण इस व्यंग्यकार पर मां के दूध से ज्यादा अंडों की कृपा दृष्टि रही है। मेरे मरियल शरीर पर मेरी मां ने शैशव से ही अंडों का उबटन लगाया है। अपने इस स्वस्थ शरीर को अब देखता हूं तो अपने जीवन में...

  • बाल कथा: मक्कारी की सज़ा

    बहुत समय पहले की बात है। सुंदरवन में बहुत से हाथी रहते थे। उनका मुखिया हाथी बड़ा दयालु, बुद्धिमान और गम्भीर स्वभाव का था परन्तु उसका पुत्र बड़ा ही शरारती और खुरापाती दिमाग का था। किसी का दर्द क्या होता है वह जानता ही नहीं था। उसे अपनी शक्ति पर बड़ा घमंड था। वह जंगल में दूर दूर तक आवारा घूमता और...

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