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  • बाल जगत/जानकारी: छिपकलियों का विचित्र संसार

    -सुनील परसाईऐंगुइस: इसे मंद कृमि भी कहते हैं। यह यूरोप तथा एशिया में पाई जाती है। यह सांप जैसी छिपकली है। इसमें पैर नहीं पाये जाते लेकिन मेखलाओं और स्टर्नम के अवशेष पाये जाते हैं। इसके शरीर पर चिकने एवं गोल शल्क पाये जाते हैं। यह मिट्टी में बिल बनाकर उसमें रहती है। यह शिशुप्रज होती है। इसकी खाल में...

  • नाम कथा

    नाम मनुष्यों के ही नहीं होते। पालतू पशुपक्षियों, मकानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों, नगरों, गली मुहल्लों, सड़कों चौराहों के भी होते हैं। शेक्सपियर ने कहा है कि नाम में क्या रखा है। गुलाब को किसी नाम से भी पुकारो, गुलाब-गुलाब ही रहेगा, बहुत सही नहीं है। नाम की महिमा अपार है। देवी देवताओं के कई कई...

  • बाल जगत: लाल किला - कुछ रोचक जानकारी

    - अनिल शर्मा 'अनिल'- 5 अगस्त को प्रधानमंत्री देश को लालकिले की प्राचीर से ही सम्बोधित करते हैं। - विदेशी आक्रमणकारियों ने कई बार इस पर हमला किया। बेशकीमती सामान लूटा। अंग्रेज भी देश से जाते जाते लालकिले से कीमती वस्तुएं ले जाने से नहीं चूके।- महल में बादशाह के कर्मचारियों की रिहायश के भी भवन बने...

  • बाल कथा : ईमानदारी का फल

    बहुत पुरानी बात है। किसी गांव में कालू नाम का एक बालक रहता था। उसकी उम्र उस समय बारह वर्ष की थी। वह एक लकड़हारे का पुत्र था। उसका पिता बूढ़ा और बीमार था, इसलिये वह अधिक चलने फिरने और शारीरिक परिश्रम करने के योग्य नहीं था। घर में बस दो ही प्राणी थे-कालू और उसका पिता। अपने पिता की देखभाल...

  • बोधकथा: मां की सीख

    एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से वीडियो चैट करते वक्त पूछ बैठी- 'बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?'बेटा बोला-'माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके...

  • सवाल एक बल्ब का

    अपने घर मकान में बिजली गुल होने पर बैट्री या जेनेरेटर की व्यवस्था की जाती है। घर का दरवाजा बंद होने पर रोशनी सिर्फ घर के भीतर ही रहती है। यदि कमरे के बाहर छोटा या बल्ब लगा दिया जाये तो कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आयेगा। इसी तरह मकान या बंगले के जेनेरेटर की लाइन से एक बल्ब मुख्य द्वारा पर लगा...

  • व्यंग्य: अंडे का फंडा

    अंडों के साथ बचपन से अपनी निकटता देखकर अक्सर मुझे भ्रम हो जाता है कि मैं कहीं अंडा तो नहीं? जन्म से ब्राह्मण इस व्यंग्यकार पर मां के दूध से ज्यादा अंडों की कृपा दृष्टि रही है। मेरे मरियल शरीर पर मेरी मां ने शैशव से ही अंडों का उबटन लगाया है। अपने इस स्वस्थ शरीर को अब देखता हूं तो अपने जीवन में...

  • बाल कथा: मक्कारी की सज़ा

    बहुत समय पहले की बात है। सुंदरवन में बहुत से हाथी रहते थे। उनका मुखिया हाथी बड़ा दयालु, बुद्धिमान और गम्भीर स्वभाव का था परन्तु उसका पुत्र बड़ा ही शरारती और खुरापाती दिमाग का था। किसी का दर्द क्या होता है वह जानता ही नहीं था। उसे अपनी शक्ति पर बड़ा घमंड था। वह जंगल में दूर दूर तक आवारा घूमता और...

  • जानकारी: ब्लैक होल क्या है

    आप लोगों ने समाचार पत्रों में 'ब्लैक होल' के संबंध में पढ़ा होगा। आप सोचते होंगे यह 'ब्लैक होल' अर्थात 'काला छेद है क्या'? वास्तव में जब किसी तारे से प्रकाश, ताप आदि के रूप में निकलने वाली ऊर्जा उस तारे पर बाहर की ओर दबाव उत्पन्न करती है और यह दबाव उस तारे की संहित द्वारा केन्द्र की ओर...

  • व्यंग्य: डेटा लीक भयो रे

    बचपन में जब मैं स्कूल में था तो फाउंटेन पेन का उपयोग करता था। प्राय: दौड़ भाग में या गर्मी से पेन की स्याही लीक कर जाती थी। शर्ट की जिस जेब में फाउंटेन पेन खोंस कर रखा होता था, उस पर स्याही का दाग लग जाता था। माँ कान उमेठती थीं। फिर जब थोड़ा बड़ा हुआ तो परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों से आमना...

  • बरकरार है आदमी का आदमी से भेदभाव

    भारत को आजाद हुए आज 7० वर्ष बीत जाने के बाद भी आदमी का आदमी से भेदभाव बरकरार है। यह सही है कि भेदभाव की जड़ धीरे-धीरे खत्म होगी। एकदम खत्म हो जाए, ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि शिक्षा का अभाव भेदभाव का कारण है। ज्यों-ज्यों शिक्षा का प्रचार-प्रसार होगा, त्यों-त्यों भेदभाव में कमी आती जायेगी। ...

  • रहस्य रोमांच: किस्से कंजूस महिलाओं के

    यूं तो पूरे संसार में एक से बढ़ कर एक महाकंजूसों के ढेरों-ढेर किस्से बिखरे पड़े हैं। यदि उन का नाम-मात्र संग्रह भी किया जाए तो एक आश्चर्यजनक, अविश्वसनीय, हास्यास्पद एवं रोमांचपूर्ण भारी-भरकम पुस्तक तैयार हो जाए, मगर हम अपने प्रिय पाठकों के मनोरंजन हेतु कुछ कंजूस औरतों के किस्से ही प्रस्तुत कर रहे...

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