जानकारी: ब्लैक होल क्या है

जानकारी: ब्लैक होल क्या है

आप लोगों ने समाचार पत्रों में 'ब्लैक होल' के संबंध में पढ़ा होगा। आप सोचते होंगे यह 'ब्लैक होल' अर्थात 'काला छेद है क्या'?
वास्तव में जब किसी तारे से प्रकाश, ताप आदि के रूप में निकलने वाली ऊर्जा उस तारे पर बाहर की ओर दबाव उत्पन्न करती है और यह दबाव उस तारे की संहित द्वारा केन्द्र की ओर लगने वाले गुरूत्वाकर्षण बल को संतुलित रखता है परन्तु जिस समय उस तारे के ताप नाभिकीय ऊर्जा का भण्डार पर्याप्त हो जाता है, तब उस तारे की गुरूत्वाकर्षण मृत्यु हो जाती है।
अब अगर उस तारे का भार सूर्य के भार से 1.06 गुना अथवा इससे ज्यादा हो तो वह तारा स्वयं के केन्द्र की ओर लगने वाले गुरूत्वाकर्षण बल के कारण लगातार सिकुडऩे लगेगा और इसका आकार लगातार छोटा होता चला जायेगा तथा आकार के साथ-साथ इसकी त्रिज्या भी छोटी होती चली जायेगी परंतु इस तारे के अन्दर की ओर से लगने वाले गुरूत्वाकर्षण बल के कारण छोटी होने की इस प्रक्रिया में इसकी त्रिज्या जब एक विशेष लंबाई की रह जायेगी। तब इसके अन्दर की ओर लगने वाला गुरूत्वाकर्षण बल अनन्त होगा जो तारे के सारे पदार्थ को चारों ओर से दबा कर केन्द्र में ले जायेगा और उस तारे को निगल जायेगा। इस प्रक्रिया में केन्द्र का आयतन तो शून्य हो जाता है परन्तु इसका घनत्व अनन्त हो जाता है। इस प्रकार उस तारे की गुरूत्वाकर्षण मृत्यु हो जाती है। इसी अनन्त शक्ति के इसी गोले को ब्लैक होल कहते हैं।
इस ब्लैक होल में केवल एक ही रास्ता होता है अर्थात् इसके अन्दर कोई भी चीज जा तो सकती है परन्तु फिर बाहर नहीं आ सकती। इसके अन्दर क्या है? अन्दर गई वस्तु बाहर क्यों नहीं आ सकती? यह अनबूझ पहेली है। यहां आकर पदार्थ और ऊर्जा की अविनाशिता का नियम भी असफल हो जाता है। इस ब्लैक होल के अन्दर पदार्थ और ऊर्जा दोनों ही पूर्णत: समाप्त हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों का कथन है कि आकाश में अनगिनत ब्लैक होल हैं। इनमें छोटे छोटे ब्लैक होल अधिक हैं। यदि कोई भी बड़ा ब्लैक होल हमारी इस विशाल पृथ्वी के आमने-सामने आ जाये तो यह सारी पृथ्वी उसके गर्भ में चली जायेगी।
जिस प्रकार ये तारे अंतरिक्ष में चलते रहते हैं उसी प्रकार तारों की ही तरह ये ब्लैक होल भी अंतरिक्ष में चक्कर काटते रहते हैं। यदि कोई ब्लैक होल पृथ्वी के पास से गुजर रहा हो और वो हमारे हिमालय या किसी समुद्र महाद्वीप को ही नोच कर ले जाये तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
ब्लैक होल के स्थान को ढूंढना:- जब 'ब्लैक होल' के स्थान का पता लगाना होता है तब वैज्ञानिक विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रकाश अथवा रेडियो तरंगें भेजते हैं। यदि ये तरंगें अकारण ही मुड़ जाती हैं तो वैज्ञानिक समझ जाते हैं कि अमुक स्थान पर 'ब्लैक होल' है। यह 'ब्लैक होल' न तो हम आंखों से देख सकते हैं और न ही किसी यंत्र से क्योंकि ब्लैक होल में सूचना लाने के लिये भेजी गयी प्रकाश किरणें और रेडियों तरंगें दोनों ही इस ब्लैक होल में समा जाती हैं। कोई भी सूचना लेकर वापिस नहीं आ सकती अत: इन ब्लैक होल की स्थिति केवल 'विद्युत चुम्बकीय' तरंगों के द्वारा ही पता लगाना संभव हैं।
-प्रदीप कुमार नन्दा

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