व्यंग्य: डेटा लीक भयो रे

व्यंग्य: डेटा लीक भयो रे

बचपन में जब मैं स्कूल में था तो फाउंटेन पेन का उपयोग करता था। प्राय: दौड़ भाग में या गर्मी से पेन की स्याही लीक कर जाती थी। शर्ट की जिस जेब में फाउंटेन पेन खोंस कर रखा होता था, उस पर स्याही का दाग लग जाता था। माँ कान उमेठती थीं। फिर जब थोड़ा बड़ा हुआ तो परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों से आमना सामना हुआ। पानी की टंकी लीक हो तो रात भर में सारा पानी रिस सकता है। साइकिल के टायर से हवा लीक हो तो चक्का बैठ जाता है। नहर से पानी लीक हो तो सिंचाई रुक जाती है। दस्त होने पर बदहजमी से पेट लीक होने की समस्या से मैं तो ग्रस्त नहीं हुआ पर इन सारे अनुभवों से अनजाने में बहुत पहले से ही लीक होने या पोंकने की समस्या का महत्त्व समझ आने लगा था।
नया समय स्याही लीक होने का नहीं है। अब विकी लीक्स से डाटा लीक होते हैं । बजट प्रस्तुत होने से पहले ही लीक हो जाता है। सरकारों की पालिसी लीक होती है। मिलिट्री के राज लीक होते हैं। फिल्मों की कहानियां लीक होती हैं। विकी लीक्स ने क्लाउड स्टोरेज से पकड़कर कुछ ईमेल क्या लीक कर दिये, दुनियां भर की कई सरकारों की कुर्सिंयां हिल गईं । स्विस बैंक का डैटा हैक हुआ तो ब्लैक मनी के मालिक व्हाईट कालर्ड लोगों के नाम लीक हो गये। रक्षा सौदों का मसविदा लीक हुआ तो पक्ष विपक्ष को चुनावी सभाओं में भाषण देने के लिये चटपटा मसाला मिल गया। बोफोर्स की तोपें तन गईं। कुछ सीडी लीक हुईं तो कईंयों को इस्तीफा देने के लिये बाध्य होना पड़ा।
एक तरफ तो पारदर्शिता अपने चरम पर है, इतनी कि एक क्लिक पर सुंदरियां स्वेच्छा से अनावृत हो रही हैं। दूसरी ओर हम निजता पर बहस कर रहे हैं। फेसबुक हमारे विचारों को भी एनालाइज कर रहा है। सड़क , रेलवेस्टेशन , बैंक व विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगे कैमरों से हमारा मूवमेंट निजी नहीं रह गया है। इस सबके साथ, आधार कार्ड और बायोमैट्रिक आईडेंटिटी से हमारा हाल चाल चरित्र सब कुछ लीक हो कर सार्वजनिक हो रहा है। एप परमिशन ले या न भी ले पर अब हम सब हमाम में नंगे हैं, इस तथ्य से वाकिफ रहना बहुत जरूरी है। इसलिये सदा सच कहो, सदा सच करो। फिर डेटा लीकेज की समस्या की हवा स्वत: ही निकल जाएगी।
- विवेक रंजन श्रीवास्तव

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