दो गधों का बोझ

दो गधों का बोझ

बीरबल और बादशाह अकबर में हंसी मज़ाक की नोंक झोंक तो जग जाहिर है। आइए पढि़ए, हंसिए और हंसाइये दूसरों को। एक बार बादशाह अकबर, उनके पुत्र सलीम और बीरबल फरवरी माह में प्रात: सैर को निकले। काफी देर तक टहलते और बातें करते हुए ये लोग काफी दूर तक निकल गये। सोचा, अब वापिस चलना चाहिए। सूर्य देवता भी काफी ऊपर तक चढ़ आए थे।
वापिसी की राह में बादशाह अकबर और उनके पुत्र सलीम को गर्मी लगने लगी तो बादशाह अकबर ने अपने भारी वस्त्र उतारे और बीरबल की ओर बढ़ा दिए। उनकी देखा देखी शहजादे सलीम ने भी अपने भारी वस्त्र उतारे और बीरबल की ओर कपड़े बढ़ा दिए। बेचारे बीरबल इतना बोझ उठाकर चलने लगे।
बीरबल को इस प्रकार चलते देख बादशाह अकबर ने मज़ाक किया और कहा, 'बीरबल, अब तो तुम्हारे ऊपर एक गधे का बोझ हो गया होगा।' बीरबल ने भी एकदम हंसते हुए उत्तर दिया, 'जहांपनाह, एक का नहीं बल्कि दो गधों का बोझ हो गया है।'
बादशाह अकबर ने जब जवाब सुना तो वो झेंप गये।
हथेली पर बाल क्यों नहीं
एक दिन अकबर बादशाह के मन में एक बात आई कि, 'मेरी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैं? बहुत सोचा पर उत्तर न मिल सका।' उन्होंने बीरबल से पूछा कि, 'ऐसा क्यों है कि मेरी हथेली पर बाल नहीं हैं? बीरबल हाजिऱ जवाब तो थे ही।' उन्होंने एक दम जवाब दिया, 'आलम पनाह, आप इन्हीें हाथों से गरीबों को रोजाना इतना दान देते हैं उसकी रगड़ से बाल जम नहीं पाते।'
बादशाह उत्तर पाकर प्रसन्न हुए। फिर भी सोचा इसकी बुद्धि का परीक्षण किया जाए तो उन्होंने अगला प्रश्न किया-'तुम्हारी हथेली पर बाल क्यों नहीं है? बीरबल ने तपाक से उत्तर दिया, 'आपकी ओर से भेंट, दान, उपहार, पुरस्कार लेते लेते उनकी रगड़ से मेरी हथेली पर भी बाल नहीं आते।
फिर बादशाह बोले, 'और लोगों की हथेली पर बाल क्यों नहीं आते।' बीरबल बहुत स्वाभाविक ढंग से बोले कि इसका उत्तर स्पष्ट है-'जब आप मुझे या अन्य लोगों को दान देते हैं और उन्हें नहीं देते तो वे बेचारे ईष्र्या के मारे अपने हाथ मलते रहते हैं। इसी कारण उनकी भी हथेली पर बाल नहीं आते।'
लकीर छोटी हुई
बादशाह अकबर ने एक बार बीरबल को कहा कि एक लकीर को छोटा करना है ऐसा कोई उपाय बताओ कि 'न तो लकीर को घटाया जाए, न मिटाया जाए मगर छोटी हो जाये।' यह कहकर अकबर ने एक कागज़ पर पेंसिल से एक लकीर खींची।
बीरबल ने फौरन लकीर वाला कागज़ लिया और पैंसिल लेकर नीचे एक बड़ी लकीर खींच दी और बोले, 'हुजूर देखो, अब आपकी लकीर छोटी हो गई है। बादशाह अकबर बीरबल की निपुणता को मान गये।'
- सुदर्शन चौधरी

Share it
Top