बाल कथा: रविवार की खोज

बाल कथा: रविवार की खोज

मनन एक छोटा बच्चा था। उसे भी अन्य बच्चों की तरह रविवार की छुट्टी अच्छी लगती थी। एक दिन उसने सोचा कि रविवार रहता कहां है? और वह रविवार को खोजने निकल पड़ा। थोड़ी दूर जाने के बाद ही वह एक पहाड़ी के पास पहुंच गया। उसने वहां एक छोटे बच्चे को देखा जो कपड़े धो रहा था। जैसे ही वह लड़का पीछे मुड़ा, मनन ने उससे पूछा, 'मैं रविवार को खोजने आया हूं। वह कहां मिल सकता है?'

वह लड़का हंसते हुए बोला, 'दोस्त, मैं सोमवार हूं। रविवार पांच दिन के बाद आता है। वह बहुत दूर नहीं है। क्या तुम थोड़ी देर के लिए मेरी मदद कर सकते हो?'

मनन कपड़ों को रस्सी पर डालने में मदद के लिए तैयार हो गया। काम करते-करते शाम हो चुकी थी। सोमवार ने उसे खाना दिया और वह रात में वहीं रूक गया।

अगले दिन सुबह मनन ने अपनी खोज फिर से शुरू की। जब वह थोड़ा आगे गया, तब उसने वहां एक लड़की को कपड़े सिलते हुए देखा। मनन ने उससे पूछा, 'मैं रविवार को खोजने आया हूं, वह कहां मिल सकता है?'

'मैं मंगलवार हूं। रविवार चार दिन के बाद आता है। क्या तुम मेरी मदद करोगे?' लड़की बोली। मनन मदद करने के लिए तैयार हो गया और कपड़ों को तह करने में उसकी मदद करने लगा। फिर से शाम हो गई थी, इसलिए मंगलवार ने उसे खाना दिया। खाना खा कर मनन रात में वहीं सो गया और अगले दिन सुबह फिर से अपनी खोज में निकल पड़ा।

मनन अब पहाड़ों के पास पहुंच चुका था। वहां उसने एक बच्चे को भेड़ों के एक समूह के साथ देखा। वह उन्हें पहाड़ों की चढ़ाई पर घास खिलाने के लिए लाया था। वह बोला, 'हैलो दोस्त, मैं रविवार की खोज में आया हूं। वह कहां मिल सकता है?'

'मैं बुधवार हूं। यहां से रविवार का घर बहुत दूर नहीं है। वह सिर्फ तीन दिन बाद आता है। क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो।' लड़का बोला। मनन उसकी मदद के लिए तैयार हो गया और भेड़ों को घर वापस लाने में बुधवार की मदद करने लगा। बुधवार ने जब उसे खाना दिया, तब तक काफी देर हो गई थी। इसलिए वह रात में वहीं रूक गया।

सुबह वह फिर से रविवार को खोजने निकल गया और अब वह पहाड़ों के बहुत नजदीक पहुंच गया था। उसने ऊपर देखा तो पहाड़ों की चढ़ाई पर एक लड़की सब्जी लगा रही थी। मनन को अब बहुत उम्मीद थी। वह पूछा, 'हैलो, मैं रविवार को खोजने आया हूं, वह कहां है?'

मैं गुरूवार हूं। आज से रविवार सिर्फ दो दिन बाद आता है। इस बीच क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?' लड़की ने कहा। मनन सहमत हो गया और जुताई में उसकी मदद करने लगा। काम करते हुए शाम हो चुकी थी। गुरूवार ने उसे खाना दिया और मनन रात में वहीं सो गया।

अगली सुबह वह फिर से रविवार को खोजने निकला। अब वह पहाड़ी के नीचे पहुंच चुका था। वहां वह एक लड़के से मिला जो सुंदर चित्र पेंट कर रहा था। वह शुक्र वार था। मनन उसके साथ रूक कर कागज व रंग में मदद करने लगा। शाम को शुक्र वार ने उसे खाना दिया। एक रात वहां रूकने के बाद मनन फिर से रविवार को खोजने निकल गया।

पहाड़ों के आधे रास्ते में पहुंचने पर वहां उसे एक छोटा बच्चा मिला जो लकड़ी काट रहा था। वह बहुत मेहनत कर रहा था। मनन ने उससे पूछा, 'मैं रविवार को खोजने आया हूं, वह कहां मिल सकता है?'

यह सुन कर लड़का हंस कर बोला, 'दोस्त, मैं शनिवार हूं। रविवार यहां से बहुत पास है। क्या तुम थोड़ी देर मेरी मदद करोगे?' मनन आसानी से मदद करने के लिए सहमत हो गया और लकड़ी का कुंदा घर ले जाने में शनिवार की मदद करने लगा।

वापस घर पहुंचते-पहुंचते शाम हो चुकी थी। खाना खाने के बाद मनन वहीं सो गया और अगले दिन सुबह जल्दी उठ गया। वह बहुत उत्साहित था कि वह अपने पसंदीदा दिन रविवार से मिलने वाला है। उसने शनिवार को बॉय कहा और रविवार को ढूंढऩे निकल गया।

वह थोड़ा ही आगे गया था कि उसे वहां एक सुंदर बगीचा दिखा। मनन बगीचे में गया। वहां उसने देखा कि एक हंसता हुआ लड़का उसका इंतजार कर रहा था। उसने मनन को गले लगा लिया और बोला, 'मनन, मैं रविवार हूं। मुझे पता चला है कि तुम मुझसे मिलने आ रहे हो। चलो, हम खेलते हैं। मैंने पार्टी के लिए कई मेहमानों को बुलाया है।'

मनन ने देखा कि वहां कुछ बच्चे खड़े थे जो पार्टी के लिए आए थे। वहां सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्र वार और शनिवार थे। उन्हें वहां देख कर मनन बहुत खुश हो गया। वे सब उसके अच्छे दोस्त थे। सबने मनन को गले लगाया और मिल कर खेलने लगे, डांस करने लगे।

उस दिन मनन ने एक अच्छी चीज सीखी। उसने जाना कि अगर आप रविवार का मजा लेना चाहते हैं तो आपको हफ्ते के सभी छह दिन काम करना होगा।

- नरेन्द्र देवांगन

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