बाल कथा: तलवार की खोज

बाल कथा: तलवार की खोज

चंद्रगढ़ के राजा असित सेन के पास एक सोने की तलवार थी। असित सेन उसे बहुत संभाल कर रखते थे। उस तलवार से राजा असित सेन ने कई लड़ाइयां जीती थीं। तलवार की कीमत भी लाखों में थी।

एक रात राजा की वह तलवार चोरी चली गई। तलवार के चोरी जाने से राजा परेशान हो गए। उन्होंने काफी तलाश करवाई, लेकिन तलवार न मिली।

राजधानी में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी काफी चतुर थी। उसने एक बोलने वाला तोता भी पाल रखा था।

राजा असित सेन ने घोषणा करवा दी, 'जो भी तलवार को खोज लाएगा, उसे वह मंत्री बना देंगे।'

ब्राम्हण की पत्नी ने जब राजा की घोषणा सुनी, तो अपने पति से कहा, 'तुम तोते को लेकर शहर के चक्कर लगाओ। एक न एक दिन तलवार जरूर मिल जाएगी।'

पंडित की पत्नी ने तोते को बोलना सिखा दिया, 'तलवार जिसने चुराई है, उसे मैंने देखा है।'

ब्राह्मण तोते का पिंजरा लेकर चलने लगा तो पत्नी बोली, 'इसे लेकर तुम दिन भर चंद्रगढ़ की गलियों में चक्कर लगाओ, लेकिन शाम घिरते ही लौट आना।'

ब्राह्मण तोते को लेकर दिन भर चंद्रगढ़ में घूमता रहा। तोता सीखी बात बार-बार बोलता, 'तलवार जिसने चुराई, उसको मैंने देखा है।'

दिन भर ब्राह्मण चंद्रगढ़ में पिंजरा लेकर घूमता और शाम होते ही घर लौट आता। रात को ब्राह्मण और उसकी पत्नी तोते के पिंजरे के आसपास छिपकर पहरेदारी करते थे।

काफी दिन बीत गए। एक रात, ब्राह्मण की पत्नी चौंक पड़ी। एक व्यक्ति अंधेरे में ही तोते के पिंजरे की ओर जा रहा था। दोनों सावधान, पहरे पर तैनात थे। पत्नी ब्राम्हण से बोली, 'तलवार चोर आ पहुंचा है। इसे झट से पकड़ लो।'

पत्नी के कहने पर ब्राह्मण ने दौड़कर उस व्यक्ति को दबोच लिया। फिर दोनों ने उसके हाथ-पैर बांध कर एक कोठरी में बंद कर दिया।

सुबह होने पर ब्राह्मण ने राजा को सूचना दी। राजा के सिपाही उसे पकड़ ले गए। पता लगा, वह व्यक्ति राजमहल का ही एक कर्मचारी था। जब उसे मार पड़ी, तो उसने तलवार की चोरी कबूल कर ली। उसके घर से राजा की वह तलवार भी बरामद हो गई।

राजा असित सेन ने गरीब ब्राम्हण को मंत्री बना दिया। ब्राह्मण अपनी पत्नी की चातुरी पर बेहद खुश था। उसने तोते के लिए सोने का पिंजरा बनवा दिया।

- नरेंद्र देवांगन

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